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Tuesday, December 28, 2010

बहुत उपयोगी है सहजन का पेड़-various use of drumstick tree

     सहजन का पेड़ भारत वर्ष में बहुतायत से पाया जाता है | इसके लिए ज्यादा ठण्ड नुकसान दायक है गर्मी कितनी भी हो झेल लेता है | बहुत दिनों से सोच रहा था इस पेड़ के बारे में लिखने के लिए लेकिन किसी न किसी कारण से ये पोस्ट लिखने का कायक्रम आगे खिसकता रहा |
सहजन का पेड़ फूल और फली के साथ

     सहजन का अंग्रेजी नाम ड्रमस्टिक,संस्कृत नाम सोभांजना, आयुर्वेद में मोक्षकाद्व और वानस्पतिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा (moringa oleifera ) है | सहजन के बारे में काफी वैज्ञानिक खोजे हुई है | और बहुत से परिणाम भी निकाले गए है |
सहजन के बारे में कुछ निम्न तथ्य है :-

  • फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में भी सहजन की काफ़ी माँग है।
  • दक्षिण भारतीय लोग इसके फूल, पत्ती का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में साल भर करते हैं।
  • इस पौधे के सभी भागों का उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता है।
  • सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं।
  • इसमें दूध की तुलना में ४ गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।
  • सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।  
     ये तो थी तथ्यों की बात अब मै बताता हूँ इसका देशी स्टाइल में फायदा | मेरे घर में पांच छ साल से से इसका पेड़ है | इसका पेड़ लगाना बहुत ही आसान है | इसका पेड़ इतना आसानी से लग जाता है की आप को यकीन नहीं होगा की जिस झोपडी के बीम में इसकी लकड़ी का उपयोग किया जाता हो उसमे भी बगैर मिट्टी के ही पत्तियां फूट नि्कलती है | और यहां तक की एक पेड़ को मैंने एक जगह से दूसरी जगह स्थनांतरित भी किया था जिसका तना तकरीबन दो फुट परीधी का था और वजन लगभग आधा टन था | और उस तने को स्थान ना मिलने की वजह से तीन महीने तक धुप में बगैर पानी और मिट्टी के जमीन पर चित पडा रहा था | उस पर एक भी पत्ती नहीं थी | उस तने को जब तीन महीने बाद खड़ा कर मिट्टी में दबाया गया और पानी दिया तो उसमे भी अंकुरण हुआ और पेड़ फिर तैयार हो गया जिसे आप तस्वीर में देख सकते है |
हमारे घर मे सहजन का वो पेड़ जो स्थनांतरित किया हुआ है 

     अगर आपको मई के महीने में धूप से बचाव हेतु पेड़ चाहिए तो आप जनवरी में इसकी एक शाख जो तकरीबन दस फुट बड़ी हो का वृक्षारोपण कर सकते है तो ये तैयार होकर मई के महीने चारपाई डालकर सोने हेतु छाया दे देगी |कहने का अर्थ ये है की ये बहुत जल्दी विकास करता है |

     इसके फूलो की सब्जी मुझे बहुत पसंद है ,थोड़ा मेहनत वाला काम जरूर है लेकिन स्वाद एक बार जिसे लग जाए वो इसको जिन्दगी भर नहीं भूल सकता है | सब्जी बनाने की विधी -:
इसके फूलों को जो खिले ना हो उनको तोड़ लीजिए कडाही में तेल गर्म कीजिए उसमे प्याज अदरक लहसुन हरी मिर्च आदि भून लीजिये | उसमे सब्जी का मसाला यथा लाल मिर्च धनिया पाउडर हलदी,नमक आदि पानी के साथ मिक्स करके डाल देवे | जब मसाला पक जाए तब उसमे सहजन के फूल(कलियाँ) डाल देवे थोड़ा पानी और मिला देवे जो की पकने पर जल जाता है,अगर आप चाहे तो इसमें टमाटर भी डाल सकते है या फिर पकने के बाद थोड़ा टमाटर सॉस भी मिलाया जा सकता है | तीन मिनट बाद सब्जी को तैयार होने के बाद चूल्हे से उतार लेवे | आपकी लाजवाब सब्जी तैयार है | ये सब्जी जितनी स्वादिष्ट होती है उतनी ही गुणकारी भी होती है | इस सब्जी को बदहजमी वाले,मधुमेह वाले ,ह्रदय रोग के मरीज भी आराम से खा सकते है | इसकी फली की सब्जी भी इसी प्रकार से बनती है अंतर केवल इतना है की फली की सब्जी में पानी की मात्रा ज्यादा रखते है जिससे चावल के साथ भी खाया जा सकता है |
इन फूलों और  कलियों को सब्जी हेतु तोड़ा गया है 

     इसके फूल, फली व पत्तों में इतने पोषक तत्त्व हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के मार्गदर्शन में दक्षिण अफ्रीका के कई देशों में कुपोषण पीडित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती व प्रसूता महिलाओं व वृद्धों के शारीरिक पोषण के लिए यह वरदान माना गया है। हमारे यंहा भी कैन्सर व पेट आदि शरीर के आभ्यान्तर में उत्पन्न गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ो में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है। जोड़ो का दर्द वायु विकार के कारण होता है | और सहजन वायु नाशक माना जाता है|सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से विषाणु जनित रोग चेचक के होने का खतरा टल जाता है।

     अब आते है पानी साफ़ करने वाली बात पर | इस से पहले भी पानी के शुद्धीकरण के लिए मैंने एक पोस्ट लिखी थी | पानी के शुद्धीकरण के लिए ये उपाय भी आप आजमा सकते है | माइक्रोबायलोजी के करेंट प्रोटोकॉल में कम लागत में पानी को साफ करने की तकनीक प्रकाशित की गई है। यह तकनीक आसान और सस्ती है। इस तकनीक की मदद से विकासशील देशों में जल जनित रोगों से बड़े पैमाने पर होने वाली मौत की घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इस तकनीक में पानी को साफ करने के लिए सहजन के बीज का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया के द्वारा पानी को 90.00 फीसदी से 99.99 फीसदी तक बैक्टीरिया रहित किया जा सकता है।

     सहजन दो प्रकार का पाया जाता है एक मीठा दूसरा कड़वा मीठे सहजन का ही उपयोग किया जाता है कडवे का उपयोग नहीं करते है | इस के बारे में कुछ और जानकारी चाहिए तो आप मुझे टिप्पणी द्वारा बताये या सीधे ही मेल करे |

चार लाख रु.लालच भी नहीं भुला सका मित्र की यादें-----ज्ञान दर्पण 

ताऊ पहेली 106 (हवा महल, जयपुर, राजस्थान)

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर,    मालीगांव

श्री राजपूत करणी सेना के शीर्ष सस्‍थांपक व कांग्रेसी नेता लोकेन्‍द्र सिंह कालवी ने निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता----राजपूतवर्ल्ड 

 

 

 

Friday, December 24, 2010

आपकी जन्म कुंडली में कैसा है भाग्य स्थान -How's your horoscope fortune location


अपने जीवन पर भाग्य या किस्मत का प्रभाव सभी मानते हैं। कहते हैं कर्म से ही भाग्य बनता है लेकिन कई बार पूरी मेहनत से अच्छे कार्य करने के बाद भी संतोषजनक फल प्राप्त नहीं होता। ऐसे में यही बात सामने आती है कि हमारे भाग्य में यह परिणाम ही निर्धारित किया गया होगा। जन्म कुंडली ( horoscope )के अनुसार कड़ी मेहनत के बाद भाग्य की कितनी मदद मिलेगी यह भी मालूम किया जा सकता है।
  • - ज्योतिष में जन्म कुण्डली (horoscope) का नवम भाव भाग्य का होता है। यह स्थान यदि दूषित अथवा अशुभ फल देने वाला हो तो व्यक्ति सदैव भाग्यहीन रहता है।
  • - यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में भाग्य के नवम स्थान पर यदि चंद्र हो या उसकी दृष्टि हो तो वह भाग्यशाली होता है।
  • - यदि भाग्य का स्थान नवम भाव में राहु, मंगल, शनि यदि शत्रु राशि युक्त या नीच के हो तो व्यक्ति भाग्यहीनता से परेशान हो जाता है। उसे छोटे-छोटे कार्यों में भी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  • - सूर्य, शुक्र, बुध भाग्य स्थान पर सौभाग्यवती नारी दिलाते हैं। जो व्यक्ति के भाग्य को उच्च शिखर तक ले जाती है।
  • - भाग्य स्थान पर गुरु मान-सम्मान और वैभव दिलाता है। ऐसे व्यक्ति को हमेशा भाग्य का साथ मिलता है और वह कई सफलताएं प्राप्त करता है।
  • - भाग्य स्थान पर केतु सामान्य फल देने वाला होता है।
यदि आपको भाग्य का साथ नहीं मिल रहा है तो किस्मत बदलने में केवल ईश्वर ही सक्षम है। अत: अपने इष्टदेव की प्रतिदिन पूजन, अर्चन, आराधना करें। कुंडली के अशुभ ग्रह का ज्योतिषीय उपचार करें।
(उपरोक्त लेख भास्कर समाचार पत्र से लिया गया है )

Tuesday, December 21, 2010

चर्चा हिन्दी के कुछ यूनिक ब्लोगों की पार्ट १ ..............नरेश सिंह राठौड़

हिन्दी ब्लॉग जगत में चिटठा संसार बहुत तेजी से बढ़ रहा है | इतने सारे ब्लोगों में कुछ ब्लॉग ऐसे भी है जो अपने आप में अलग है | मै यहां उन ब्लोगों की चर्चा कर रहा हूँ ताकी नए पाठको को उनके बारे में भी पता चल सके |

१. तीसरा खम्भा -यह ब्लॉग श्री दिनेश्वर राय द्विवेदी जी द्वारा लिखा जा रहा है | इस ब्लॉग में पाठको की क़ानून सम्मत समस्याओं का समाधान बताया जाता है जो की निःशुल्क सेवा है | ये ब्लॉग एक सक्रिय बलोग है |तथा अपने आप में यूनिक है | दिनेश्वर राय जी कोटा (राजस्थान ) में रहते है तथा वकालत के पेशे में है |

२. भाग्योदय ओगेनिक - यह ब्लॉग कृषि आधारित ब्लॉग है इसमें पेड़ पौधे एवं बागवानी पर बहुत सी सामग्री लिखी गयी है  |

विज्ञान गतिविधियाँ इस ब्लॉग के लेखक श्री दर्शन लाल बवेजा जी  है | इसमें बच्चो को विज्ञान के छोटे छोटे सरल प्रयोग सिलाये जाते है,जो की बच्चो के पढाई के साथ साथ सर्जनात्मकता को भी विकसित करते है |

४. मीडिया डॉक्टर यह ब्लॉग डोक्टर प्रवीण चौपड़ा जी का है - जो की  रेलवे विभाग में दांतों के स्पेशलिस्ट है |हरियाणा में रहते है इनके बलोग में दांतों के रोग एवं उनका उपचार कैसे किया जाता इस विषय पर बहुत पोस्ट लिखी गयी है |

५. मुसफ़िर  हूँ यारो- इस बलोग को नीरज जाट लिखते है जो दिल्ली मेट्रो में काम करते है ये ब्लॉग उनके द्वारा जितना पर्यटन किया गया है उसका लेखा जोखा है | ये ब्लॉग पर्यटन हेतु बढ़िया सन्दर्भ का काम देता है | इस बलोग पर चित्रों की भी बहुतायत है जो की पोस्ट को सजीव कर देती है |

..ब्लॉग परिक्रमा  - ये एक ब्लॉग जगत के ऊपर पैनी नजर रखने वाले रविन्द्र प्रभात जी ने बनाया है इस ब्लॉग में ब्लॉग जगत के सभी नए पुराने ब्लोगों के बारे में लिखा गया है | हिन्दी ब्लॉग जगत के विकास को विस्तार पूर्वक बताया गया है |इस प्रकार का ज्ञानवर्धक ब्लॉग,हिन्दी ब्लॉग शोधक विद्यार्थी के बहुत काम आता है  |

७. मल्हार    - इस ब्लॉग के लेखक   श्री पी.एन.सुब्रमनियन साहब  है | यह ब्लॉग ऐतिहासिक यात्राओं के ऊपर लिखा गया है| इसमें उस स्थान की स्थापत्य कला एवं संस्कृति के बारे में विस्तार से पढने को मिलता है |

८. गत्यात्मक ज्योतिष - ये ब्लॉग संगीता पुरी जी चलाती है | जो की बोकारो बिहार में रहती है | इस बलोग में ज्योतिष विधा का अलग ढंग से परिचय करवाया गया है जो की ग्रहों एवं नक्षत्रो की चाल का गणन करके भविष्य फल का निष्कर्ष निकाला जाता है |

९. हिन्दी बलोगरो के जन्म दिन - ये बलोग बी एस पाबला जी द्वारा संचालित है इसमें समस्त हिन्दी बलोगरो का जन्मदिन का ब्योरा रहता है जिस दिन जिस बलोगर का जन्म दिन होता है उस दिन उसकी सूचना इस ब्लॉग पर पोस्ट के रूप में लगाई जाती है | जिससे पाठको को पता चल जाता है की आज किस बलोगर भाई का जन्म दिन है और वो उन्हें बधाई सन्देश भेज सकता है |

१०. दाल रोटी चावल - ये बलोग पाक कला पर आधारित कम्यूनिटी बलोग है जिसे काफी लोगो द्वारा मिल कर चलाया जाता है | यहां नयी नयी रैसिपी से रूबरू करवाया जाता है |

११. नारी ये महिलाओं द्वारा बनाया गया साझा ब्लॉग है जिसकी मोडरेटर रचना जी है | ये एक नई प्रधान ब्लॉग है जिसमे नारी से जुडी समस्याओं पर लिखा जता है |इस ब्लॉग पर केवल महिलाए ही लिख सकती है |

१२. शब्दों का सफर - इस बलोग के लेखक श्री अजित वडनेरकर जी है | इसमें किसी भी एक शब्द पर पूरे पोस्ट लिखी जाती है जैसे की उस शब्द का उद्भव ,उसका दूसरी भाषा में प्रयोग आदि आदि विस्तार पूर्वक समझाया जाता है | इस प्रकार का ये एक मात्र हिन्दी बलोग है |

१३. प्राईमरी  का मास्टर - ये फतेहपुर के प्रवीण त्रिवेदी के द्वारा संचालित बलोग है जिसमें प्राथमिक शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को उकेरा गया है | इसमें मास्टरों के अन्तर्द्वन्द को भी दिखाया गया है | बालको को कैसे शिक्षा दी जानी चाहिए वो भी बताया गया | 

१४. चिट्ठा चर्चा  - ये बलोग हिन्दी बलोगो [पर लिखी जा रही पोस्टों के बारे में बताता है | इस प्रकार के और भी बलोग है जैसे बलोग ४ वार्ता | लेकिन  चिट्ठा चर्चा  ब्लॉग पुराना है और सक्रिय है |

१५. तरकश डोट कोम - ये पोर्टल बहुत बढ़िया है | इस पोर्टल पर रोजाना चार पांच पोस्ट पब्लिश होती है जो की स्वास्थ्य ,समाज ,सामाचार ,तकनीक ,गैजेट्स आदि पर आधारित होती है |

१६.  मेरे अंचल की कहावते _ यह एक साझा बलोग है जिसमे क्षेत्रीय  कहावतो का समावेश रहता है |

१७ .हिन्दी फिलम संगीत का खजाना _ इस बलोग में हिन्दी गीतों के वीडियो लिरिक्स सहित मिलते है गीतों का वर्गीकरण भी वर्ष के हिसाब से टैग लगे है |

१९. भाषा शिक्षा एवं रोजगार - इस बलोग पर आपको रोजगार संबंधी ताजा सुचनाये मिलेगी | देश भर की सभी यूनिवर्सिटी के लिंक यहां मिल जायेंगे और भी बहुत कुछ है यहां पर |

२०.सर्प संसार  ये साझा बलोग है जिसमें सांपो की दुनिया के बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बताया गया है |

२१. हिन्दी इंटरनेट   यंहा आपको हिन्दी का संसार मिलेगा हिन्दी के महत्वपूर्ण बलोग ,साईट,एवं पोस्ट और वो भी वर्गीकरण किये हुए | बहुत कुछ मिलेगा, हिन्दी प्रेमी लोग  एक बार अवश्य देखे |

नोट- ये ब्लॉग मैने अपने नोलेज के आधार पर छांटे है अगर आप भी इस प्रकार के किसी अन्य ब्लॉग के बारे में जानते है जो अपना अलग विषय रखता हो तो उसे भी यंहा पर बताए |

Friday, December 17, 2010

विस्तरित बातचीत वरिष्ठ पत्रकार और टोटल टीवी के संपादक श्री उमेश चन्द्र जोशी जी से

     "आप सत्य के साथ समाज हित की लड़ाई लड़ोगे तो सफलता आपके साथ हमेशा चलेगी " ये कथन है वरिष्ट पत्रकार और टोटल टीवी के संपादक श्री उमेश चन्द्र जोशी जी का | ११ दिसम्बर सुबह सुबह मिलने का वक्त तय किया था श्री जोशी जी ने,और मै ने उन्हें सुबह सुबह ही घेर लिया मै पहुंचा तब वे ठीक से तैयार भी नहीं हो पाए थे |
ऊर्जा वान जोशी जी मुस्कराते हुए 


     जोशी जी अपनी भतीजी की शादी में पिलानी(जिला -झुंझुनू (राज.) आये हुए थे | मेरी उनसे फोन पर बातचीत हुई थी मेरी प्रार्थना पर उन्होने मुझे मिलने का समय दिया  | और मै ठहरा एक हिन्दी ब्लोगर मौक़ा कैसे चुकता सो मैं  फ़टाफ़ट उनसे मिलने पहुच गया | हालांकि पिलानी आगमन उनका पारिवारिक कार्यक्रम था सो किसी पत्रकार को खबर ना कर के अकेले ही इस सुअवसर का लाभ उठा लेना उचित समझा |

     श्री जोशी जी की पैदाइश राजस्थान के अलवर जिले में नायसराना नामक गाँव की है | नायसराना में उस समय विधा अध्ययन करना बहुत ही कठिन काम था | जमीन पर बैठना पड़ता था अपने घर से बोरी या चटाई लेकर जाना पड़ता था स्कूल की छत फूस की थी जो बारिश के समय चुने लग जाती थी | मजबूरन बरसात के दिनों में छुट्टी करनी पड़ती थी | ये बताते हुए जोशी जी अतीत में खो जाते है | और अपने भाईयो की तरफ इशारा करते हुए गर्व से बताते है की ये लोग भी उसी स्कूल से निकले हुए है | जिनमे एक भाई आजकल आर्थोपेडिक सर्जन है जयपुर रहते है ,एक वकील है जो कोटपुतली में रहते है | एक भाई लक्ष्मीनारायण झुंझुनू वाला ग्रुप में मैनेजर है | एक भाई सरकारी वैध की पोस्ट से रिटायर हो गए है और आजकल गाँव में ही दवा दारू करते है | जोशी जी ने बहुत आत्मीयता के साथ अपने परिवार जनों से मेरा परिचय करवाया | परिवार के लोग बहुत ही मिलन सार है |
फोन में कुछ ढूंढते हुए जोशी जी 
     जोशी जी ये बात बताते हुए रोमांच से भर जाते है की वे हिन्दुस्तान के पहले  ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने रेडियो ,टीवी ,और अखबार तीनो माध्यमो में काम किया है | २९ साल से कैमरे का सामना कर रहे है | जनसत्ता में उन्हें २१ साल का कार्यानुभव रहा है | रेडियो में १५-१६ साल काम किया है और टीवी में १९८१ में समाचार वाचन का काम किया | १९८४ में उन्होंने आकाशवाणी में समाचार वाचक का काम शुरू किया | उद्घोषक के तौर पर काफी पहले ही काम करना शुरू कर चुके थे | ये बताते हुए जोशी जी फिर अतीत में खोने लग जाते है |वे बताते है की समय की पाबंदी और आवाज का सामंजस्य उन्होंने आकाशवाणी में सीखा था | वहा उस समय रिताशु भादुड़ी नामके एक दिग्गज थे जिन्होंने मुझे माइक्रोफोन पकडना सिखाया और सांस कैसे लेना है कब रूकना है कब बोलना है, मुह से माइक की दूरी कितनी होनी चाहिए ये सब उन्होंने सिखाया जो आज भी काम आ रहा है |

     एकरिंग के अलावा मैंने कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मे भी बनाई है | लेकिन समय अभाव के कारण अब ये काम नहीं कर पाता हूँ भविष्य में समय मिल पाया तो इस काम को आगे बढ़ाऊंगा |

     पत्रकारिता के बारे में पूछने पर बताते है की वो जनसत्ता से काफी समय से जुड़े रहे है | एक्सप्रेस ग्रुप में काम करके उन्हें काफी अनुभव हुआ है | जनसत्ता में पत्रकारों का चयन बहुत ही कठिन परीक्षणों के बाद होता है | वहां जो भी काम कर लेता है वो इस क्षेत्र में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता है | इस ग्रुप की काम करने की शैली स्पष्टवादिता की रही है |   यंहा के बारे में बताते हुए जोशी जी कहते है की मैंने स्वर्गीय प्रभाष जोशी के समय में काम किया है | प्रभाष जी कहते थे की आप का काम है न्यूज लाना और विज्ञापन विभाग का काम है विज्ञापन लाना | जिसका विज्ञापन लगा है और उसके खिलाफ भी कुछ लिखना पड़े तो उस विज्ञापन के बाजू में बेहिचक छाप दो ज्यादा ज्यादा ये होगा की अगली बार विज्ञापन नहीं देगा लेकिन सच्चाई से मुह तो नहीं मोडोगे | प्रभाष जी ने कभी भी किसी पत्रकार की कोइ भी खबर छपने से नहीं रोकी भले ही वो किसी के भी विरूद्ध क्यों ना हो |ये मेरा सौभाग्य है की मै आज तक जिन संस्थानों में काम किया है वहां मेरे ऊपर किसी का अनावश्यक दबाव नहीं रहा है यही वजह है की मै आज तक अपनी बात खुल कर कहता आया हूँ |

     पत्रकारिता के वर्तमान हालात पर चर्चा करते हुए वे बताते है की बहुत दुःख होता है जब किसी व्यक्ति से परिचय कराया जाता है और यह क़हा जाता है की इनसे मिलिए ये फला साहब है और बहुत ही इमानदार है | क्यों की इमानदार होना मनुष्य का पहला गुण होना चाहिए | ईमानदारी तो इनबिल्ट होती है उसे उस के लिए परिचय में जोड़ने की क्या जरूरत है | एक पत्रकार के लिए ईमानदार होना पहली जरूरत है | अगर आपको बेईमानी ही करनी है तो आप पत्रकारिता का पेशा क्यों चुनते है दूसरा ही कोइ व्यवसाय चुन कर करे | इस पेशे में ना आये तो ही बेहतर है | अगर शराब बेचना है तो विटामिन का लेबल लगाकर ना बेचे उसे शराब के ही रूप में बेचे | दलाली ही करनी है तो पत्रकार ना बने, दलाल ही बने | हमारे समाज को पत्रकारों से बड़ी आस है मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ समझा जाता है | अगर तीनों स्तंभों पर अंकुश रखने वाला चौथा स्तम्भ ही भ्रष्ट हो जाएगा तो लोकतंत्र का क्या होगा  | मै गरीबी से ऊपर उठकर आया हूँ उसी ग्रामीण समाज से हूँ | जो आज अभावो को झेल रहा है | आज उसके लिए आवाज उठाना ही मेरी प्राथमिकता है |

     जब मैने उनसे ये जानना चाहा की आप कैमरे के सामने होते है या लिखते है तब आपकी राजनैतिक विचारधारा का प्रभाव कभी आपके ऊपर हावी नहीं होता ये चीज कैसे संभव होती है ? जवाब में वे कहते है की जब मै प्रोग्राम कर रहा होता हूँ तो मेरे सामने हमेशा आम आदमी का हित और सच्चाई ही सर्वोपरि होता है ना की मेरी राजनैतिक विचारधारा | मै जिस पार्टी को चाहता हूँ अगर उस पार्टी के द्वारा भी कुछ गलत हुआ है तो मै उसकी भी बुराई करने में नहीं हिचकता हूँ |

      जोशी जी से परिवार के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया की उनके तीन बेटियाँ है | एक बेटी जिसका नाम विधा लाल है वो कत्थक की राष्ट्रीय स्तर की डांसर है | उसके पति भी उसके साथ परफोर्म करते है वर्तमान में फीजी में रहते है  | दूसरी बेटी साक्षी जोशी है जो पहले यहां स्थानीय न्यूज चैनल में काम करती थी आजकल बी बी सी में काम करती है |  तीसरी बेटी ने एम् बी ए किया है और अपनी गृहस्थी में मस्त है| (नीचे वीडियो में आप उनकी लड़की विधा लाल को फीजी में परफोर्म करते हुए देख सकते है ) 

     मैंने उनसे हिन्दी बलोग के बारे में पूछा तो उन्होंने क़हा की ये माध्यम भी आजकल अपनी आवाज को समाज के दुसरे वर्गों तक पहुंचने का जरिया बन गया इसमें दोनों तरफ से प्रतिक्रिया मिल जाती है |आपके लिखे जाने का प्रभाव तुरंत पता चल जाता है | मैंने भी अपनी बात कहने के लिए एक ब्लॉग बनाया था जिस पर आजकल समयाभाव की वजह से कोइ पोस्ट नहीं का पा रहा हूँ |

     इस उम्र में उनकी एनर्जी का राज भी उन्होंने मरे पूछने पर जाहिर कर दिया | वे कहते है सुबह चार बजे उठता हूँ चार गिलास पानी पीकर ६ किलोमीटर की सैर पर निकल जाता हूँ | वापस आकर आधे घंटे प्राणायाम करता हूँ | और ये दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा ही मेरी ऊर्जा का राज है |

     मै जोशी जी का प्रशंसक कैसे बना इसके बारे में भी बताता चलू की जोशी जी को मै टोटल टीवी पर रोजाना शाम को ८ बजे से ९ बजे तक उनके एक कार्यक्रम मूड ऑफ इंडिया में देखता हूँ | एक समाचार वाचक खबर पढता है उसके बाद वो उस पर जोशी जी से प्रतिक्रिया पूछता है और जोशी जी उस खबर का सारा गुना भाग समझाते है | ऐसा लगता है जैसे वाचक ने उस खबर को लाल रंग के प्याज की शक्ल में थमाया हो और जोशी जी उसकी परत दर परत उतार कर उस लाल रंग के प्याज को छोटे से सफेद प्याज में बदल देते है | आखिर में जब खबर का सार निकल कर सामने आता है तब वो खबर इस प्रकार की खबर बन जाती है जिसका सरोकार समाज एवं आम आदमी से होता है | जोशी जी की ये ख़ासियत दूसरों से अलग करती है |

     समय काफी हो गया था(लगभग ४ घंटे ) उनके परिवार वाले भी विवाह की रस्मो के लिए उन्हें बुलवा रहे थे सो मेंने फिर मिलने का वादा लिया उन्हें अपने गाँव आने का निमंत्रण दिया और विदा ली | वो मुझे छोड़ने बाहर तक आये |
जोशी जी का ब्लॉग  है -: मुझे बोलने दो http://mujhebolnedo.blogspot.com

Thursday, December 16, 2010

इन्हें पहचानिये ये कौन है

           आप नीचे दिए गए चित्र को देखिये और बताइये की ये कौन है | ये दिल्ली में रहते है | ब्लोगर है ,इन्हें आप देखते है | इन्हें आप सुनते थे ,इनका लिखा पढते थे | इनकी पहुच आपके घर तक है | इस पहेली का दूसरा हिंट शाम तक दिया जाएगा | अगर फिर भी नहीं पहचान पाए तो फ़िकर करने की जरूरत नहीं है कल की पोस्ट में आप इनके बारे में विस्तार से जानेगे जो आपने शायद कही नहीं पढ़ा होगा |
बंटी चोर जी आप भी कोशिश कर सकते है |






6:00 PM अपडेट -:  ये साहब रोजाना शाम को टीवी के एक न्यूज चैनल पर दिखाई  देते है | पत्रकार है ,समाचार वाचक है ,समाचार विश्लेषक है | देश की राजनीतिक आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति पर खुल कर बोलते है , राष्ट्रीय स्तर के एक दैनिक समाचार पत्र में इन्होने काफी लंबे समय तक पत्रकार के रूप में काम किया है |रेडियो पर समाचार वाचन और उद्घोषक के रूप में कार्य किया है | दूरदर्शन में समाचार वाचक के रूप में काम किया है |
अगर जवाब नहीं सूझ रहा है तो कोइ बात नहीं है तब तक आप इन्हें पढ़ सकते है |

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर,         मालीगांव

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2-    ज्ञान दर्पण 

श्री राजपूत करणी सेना के शीर्ष सस्‍थांपक व कांग्रेसी नेता लोकेन्‍द्र सिंह कालवी ने निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता-    राजपूत वर्ल्ड 

एक ब्लागर सम्मेलन इधर भी-    ताऊ नामा 

 

 

 

Monday, December 13, 2010

गूगल रीडर के द्वारा पढ़िए अपने पसंदीदा ब्लोगों की नयी पोस्ट (पुन प्रकाशन )

क्या आप भी Internet पर पढने की आदत रखते हैं?
क्या आपके पसंदीदा Blogs की सूची जरा लम्बी है?
क्या आपका  Email Box केवल आपके Subscribe किए ब्लॉग के पोस्टों से भरा रहता है?
क्या आप भी ब्लोगवाणी और चिठ्ठाजगत की अनियमितता से नयी पोस्ट पढ़ने से वंचित रहते है ?
अगर आपका जवाब “हाँ” हैं तो आपके लिए Google Reader काफी फायदेमंद हो सकता है.
आप अपने पढने के शौक को और मजेदार बना सकते हैं और थोड़ा काम का भी.

चलिए जानते है कैसे. लेकिन पहले कुछ जरूरी और Basic जानकारी.

Google Reader, Google का Feed Reader Application है जिससे आप किसी भी ब्लॉग के Updates यानि उसके नए पोस्टों को पढ़ सकतें हैं.  ये आपके Google Account (Gmail या Orkut वाला) पर ही काम करता है यानि नया Account बनने की जरुरत नही.
पर इसका क्या फायदा है? ये काम तो आप उस ब्लॉग पर जाकर भी कर सकते हैं, तो एक नए जंजाल की क्या आवश्यकता? यही सोच रहें है ना?
तो हरेक ब्लॉग को उसके वेब पते पर जाकर पढ़ना और सबसे बड़ी बात उन्हें याद रखना काफी जटिल काम हो जाता है. और अगर वहां पर कोई नए पोस्ट न हो तो मेहनत बेकार !!! है ना?
तब यहाँ पर Google Reader का काम आता है. इससे आप जितने चाहें ब्लॉग को एक ही जगह से पढ़ सकतें है. बस Google Reader खोलिए और जो भी ब्लॉग अपडेट हुए है उन्हें पढ़ लीजिये या फिर उनकी पुरानी पोस्टों को भी.

और आपको सभी ब्लॉग को Email से भी पढने की जरुरत नही होगी. बस उन्हें अपने Google Reader में Subscribe कर लीजिये और काम खतम.
Google Reader में किसी भी ब्लॉग को Subscribe करने के दो रास्तें हैं.
Manualy Subscription : जिसमे आपको किसी भी ब्लॉग या उसकी Feed का पता डालना होगा और वो आपके Google Reader से जुड़ जायेगी.(नीचे वाले स्क्रीन शोट में आप देख सकते है )
Automatic Subscription : जिस भी ब्लॉग या साईट में लिंक हो “Add To Google” या ऐसा ही कोई और Option हो तो आप उस लिंक पर क्लिक करके ही उसे अपने Google Reader में जोड़ सकतें हैं.


तो ये तो थी ब्लोगों को Google Reader में जोड़ने की विधि.
अब आप स्वतंत्र है खुल के पढने के लिए. और हाँ इससे आपका प्यारा Email Box भी थोड़ा खाली ही रहेगा क्योकि आप अब Email Subscription की जगह Feed Subscription को वरीयता देना शुरु कर देंगे.

Google Reader for Advanced Bookmarking

अगर आप दिन भर में बहुत ज्यादा नई नई Sites या ब्लॉग को देखते रहते हैं तो Google Reader उनमे से कुछ Special को याद रखने में आपकी काफी मदद कर सकता है. आपको बस एक छोटा सा काम करना होगा.
आपके Google Reader में Notes नाम का option होगा.

इस पर क्लिक करने के से आपके save किए गए Notes खुल जायेंगे. और उसके साथ साथ Notes save करने का Bookmarklet भी.

उस Bookmarklet को Drag (खींच) करके अपने Browser के Bookmark Bar में ले जाईये.

बस काम खतम. अब कोई भी Site देखिये और वो important है तो इस Bookmarklet पर Click कर दीजिये.

Google Reader का एक बॉक्स खुल जाएगा और फिर आप वही से इस पेज में Note लगाकर अपने Google Reader Note में  Save कर सकते हैं.
लेकिन Google Reader में login होना मत भूलियेगा.
है ना मजेदार? अब कभी आप ये शब्द नही कहेंगे की “अरे यार Site का नाम याद नही आ रहा है जिसमें मैने उस चीज को देखा था“. बस अपना Google Reader खोलेंगे और वही से Note में जाकर सभी को देख लेंगे.

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आप देख सकतें है कितने सारी सुविधाएँ है यहाँ पर. तो एक अच्छे दोस्त होने का काम कीजिए और अच्छी चीजों को लोगो को बताईये……….

कैसे लगे ये Google Reader के Advanced प्रयोग?
(नोट- ये पोस्ट अंकित भाई के  ब्लॉग(प्रथम) पर  प्रकाशित हुई थी  अब वो पेज वंहा नहीं नहीं है | अगर ये पोस्ट अब वंहा पर होती तो मुझे दुबारा इसे प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं थी सीधे ही आपको उसका लिंक दे देता | इस पोस्ट का 95 प्रतिशत भाग अंकित भाई का है चित्र मेरे है | इस लिए इसका सारा श्रेय अंकित भाई को जाता है )
 आपके पढ़ने लायक यंहा भी है 





उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे -----ज्ञान दर्पण

भीम और दुर्योधन का टेस्ट : ब्लागाचार्य द्वारा टी.आर.पी. बढाने के लिये?.....ताऊनामा 

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर, ............       मालीगांव

 राजपूत वर्ल्ड 

Wednesday, December 8, 2010

नए पुराने ब्लोगरो हेतु ब्लोगिंग टिप्स

     मुझे हिन्दी ब्लोगिंग में बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है लेकिन जितना समय हुआ है उसमे बहुत कुछ सीख गया हूँ | ये पोस्ट लिखने की आवश्यकता भी रोहतक में ब्लोग्गर मिलन के बाद ही महसूस हुई है | ज्यादा भूमिका बनाए बगैर सीधे काम की बात पर आते है |

     नए बलोगर जो गलती करते है उनके बारे में पहले भी एक पोस्ट मैंने लिखी थी | उन बातों को दुबारा यहां लिख रहा हूँ |
वर्ड वैरिफ़िकेशन - नए ब्लोगर इसे हटाते नहीं जिससे उनके बलोग पर टिप्पणी देने में परेशानी आती है और मजबूरन पाठक दुसरे बलोग पर चले जाते है | इसका तरीका है -ब्लोगर डेशबोर्ड --> सेटिंग---> कमेंट्स ---- >शो वर्ड वैरिफ़िकेशन फार कमेंट्स ---->सेलेक्ट नो-----> सेव सेटिंग्स
     
     सब्सक्राईब करने का लिंक - अपने पाठको को ई मेल द्वारा सब्सक्राईब करने का लिंक जरूर लगाए |
विजेट बार में फोल्लोवर बनने का विजेट जरूर लगाए - आज कल नए टेम्प्लेट में तो यह सुविधा आती ही है अगर नहीं भी हो तो आप इसे चालू कर सकते है |
टिप्पणी देने में कंजूसी ना करे - टिप्पणियां हिन्दी बलोग जगत के विकास में टिप्पणियों की अहम भूमिका रही है | कोइ भी बलोग्गर इसके महत्त्व को नकार नहीं सकता है |तो आप भी ज्यादा से ज्यादा टिप्पणी दे ताकी आपका लिंक ज्यादा से ज्यादा जगह पर दिखाई दे | और वो गूगल सर्च में टॉप पर आये | चिट्ठा जगत में भी ताजा टिप्पणियों में आपका जिक्र होता रहेगा | 
 
      मित्र ब्लॉग -अपने मित्रो के ब्लॉग का लिंक अपने ब्लॉग के साईड बार में दिखाए और उन्हें भी ऐसा करने का आग्रह करे |जिससे आपके ब्लॉग का लिंक ज्यादा से ज्यादा जगह पर दिखाई दे और आपके विजिटरो की संख्या में इजाफा हो|
अपने ब्लॉग को ब्लॉग अग्रीगेटर से जोड़े  - अपने ब्लॉग को जितने भी ब्लॉग अग्रीगेटर है उनमे पंजीकृत करे | जिससे की आपके ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा पाठक मिल सके और आपके ब्लॉग का लिंक भी ज्यादा जगह पर पहुचे |

     अच्छे पाठक बने - आप किसी भी ब्लॉग की नयी पोस्ट कैसे पढ़ते है | सबका अलग अलग जवाब होगा | रोहतक में जब बलोगर मिले थे तब भी बहुत से ब्लोगरो ने यही समस्या बतायी थी की ब्लॉग वाणी के बंद होने के बाद चिट्ठो की नयी पोस्ट पढने में परेशानी होती है | और अब तो चिट्ठाजगत भी बीमार चल रहा है | अजय भाई ने इसका एक सरल उपाय बताया था की आप अपने पसंदीदा ब्लॉग को फोल्लो कीजिये और अपने ब्लोगर डेशबोर्ड पर उनकी नयी पुरानी पोस्ट आराम से पढ़िए | लेकिन मुझे ये तरीका कम पसंद है |इसका सबसे बढ़िया उपाय है गूगल रीडर | गूगल रीडर सबसे बढ़िया माध्यम है जिससे की आप अपने पसंदीदा ब्लॉग या वेब साईट की नयी पुरानी पोस्ट को आराम से पढ़ सकते है |  इस के बारे में आपको बता दू की आपको गूगल रीडर के लिए अलग से खाता बनाने की आवश्यकता नहीं है आप इसमें अपने जी मेल से भी लोगिन कर सकते है | आपने जिन ब्लॉग को फोल्लो कर रखा है वो वंहा आपको स्वत ही मिल जाते है |बाकी जानकारी आप अगली पोस्ट में पढ़ सकते है |

     गूगल चैट का उपयोग - आप अपने गूगल चैट विंडो के स्टेटस में आप अपनी जिस पोस्ट को पढवाना चाहते है यानी की नयी पोस्ट उसका लिंक वंहा लगा सकते है | उस मैसेज को संपादित भी कर सकते है| आपके दोस्त उस मैसेज को पढ़कर आपकी नयी पोस्ट पर पहुच जायंगे |
                                                                                                      
     ऑरकुट और फेस बुक जैसी शोसल नेटवर्किंग साईटो का उपयोग - ये साईट भी विजिटरो को आपके ब्लॉग तक लाने का अच्छा माध्यम हो सकती है | आप अपने प्रोफाइल में, नए ताजा मेसेज में अपनी पोस्ट और ब्लॉग का जिक्र कर सकते है | फेस बुक में तो अपने नोट्स के रूप में अपने ब्लॉग को ही इम्पोर्ट कर सकते है जिससे आपके ब्लॉग की पुरानी पोस्ट भी वंहा आ जायेगी ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार होगा |

     अपने दोस्तों को,जान पहचान वालो को ई मेल द्वारा अपने ब्लॉग के बारे में बताये लेकिन एक बात का ध्यान रखे उनको एक बार ही मेल करे , बार बार करने से गलत असर होता है |
अपने ब्लॉग को सर्च इंजन में जोड़े - इस बारे में आप आशीष भाई के ब्लॉग पर जाए उन्होंने बहुत बढ़िया पोस्ट लिखी है |
अपने ईमेल के हस्ताक्षर में अपने ब्लॉग का पता जरूर लिखे -जिससे मेल प्राप्तकर्ता एक बार आपके ब्लॉग पर जरूर जाएगा अगर ब्लॉग अच्छा लगा तो वह उसे बुक मार्क कर पढेगा |

     अपने ब्लॉग को ज्यादा तडक भड़क वाला ना बनाए क्यों की पाठक वंहा साज सज्जा देखने नहीं आता है वो उसकी विषय सामग्री हेतु ही आता है | जितने ज्यादा जावा विजेट्स होंगे उतना ही पेज लोडिंग का समय बढेगा जो की एक पाठक के लिए उबाऊ होगा |

     सर्च इंजन में आने का सबसे बढ़िया फार्मूला है जो भी शब्द ज्यादा सर्च किये जाते है उन पर पोस्ट का ताना बाना बुना जाए | जैसे आज कल"मुन्नी बदनाम " "विकिलीक्स" आदि शब्द ज्यादा सर्च किये जाते है |
यह पोस्ट आपको किसी लगी अपनी राय दे | अगर कुछ समझ में ना आये तो टिप्पणी या मेल द्वारा पूछे |

इन्हें भी देखे






Sunday, December 5, 2010

रचना बी के तुलसीदास (चर्चा रचना बी की भाग २ )....................नरेश सिंह राठौड़

     पिछली पोस्ट में मैंने आपसे वायदा किया था की रचना बी के और भी किस्से मै आपको समय समय पर सुनाता रहूँगा | अब पाठक मित्रों के आग्रह पर उनका ये दूसरा किस्सा सुनिए |

     हुआ यू की हमारे मोहल्ले में रहने वाले पंडित हीरानंद जी शास्त्री रामायण के बहुत बड़े भक्त और विद्वान है | आस पास में रामायण का पाठ करने जब तब जाते रहते है | एक दिन वो भी चढ़ गए रचना बी के चक्कर में और वो ही क्या जो भी अपने आप को बड़ा ताऊ समझता है वे सभी रचना बी के साथ पंगे ले चुके है | पूरा गाँव भर जानता है की रचना बी के साथ पंगा लेने का अंजाम क्या है | उनसे पहले वो खाज जाटिया जिसकी कपडे की दूकान है और वो मालीत शर्मा जो पत्रकार है ,और भी ना जाने कितने सक्सेना,शर्मा,खत्री,पत्री,जोसेफ,थोमस आदि को पंगा लेना भारी पड गया था | खैर लम्बी लिस्ट है लेकिन आज चक्कर में चढ़े हीरानन्द शास्त्री जी |

     शास्त्री जी और रचना जी दोनों बहस करते हुए मेरी दूकान पर आये| रचना कह रही थी की तुलसी नारी विरोधी है जबकी शास्त्री जी कह रहे थे की तुलसी जी नारी को पूजनीय मानते है और पूरा सम्मान देते है | रचना ने अपनी बात के पक्ष में रामायण की एक चौपाई कही की
ढोल गंवार शुद्र पशु नारी,ये सब ताडन के अधिकारी || (जिसका अर्थ रचना बी ने बताया की ढोल(बाजा ),गंवार मनुष्य, निम्न जाती का मनुष्य, पशु और नारी ये सब जर्मन मेड लठ के लायक है )
जब की पंडितजी अपनी बात को मजबूत करने हेतु दूसरी चौपाई कही  "धीरज धरम मित्र अरू नारी आपति काल परखिये चारी || (जिसका अर्थ पंडितजी ने बताया की धैर्य ,धर्म ,मित्र और नारी ये सब विपत्ति के समय काम आने वाले सिद्ध होते है |
दोनों के तर्क देख का एक बरगी हम जैसे अज्ञानियों का भी सर चकराया लेकिन क्या करते बच कर निकने का कोइ रास्ता भी तो नहीं था |

     हमने कहा ये बात पूरा गाँव जानता है रचना बी आपने हमेशा ही अर्थ का अनर्थ किया है | आप अपनी बातों से पानी में आग लगा सकती है | ये बेचारे सीधे साधे पंडितजी तुम्हारे चक्कर में चढ़ गए है लेकिन बात तुलसी दास जी की है सो गलत कभी नहीं हो सकती है | आपने अपनी चौपाई में एक छोटे से कोमा को हटा कर पूरा अर्थ ही बदल दिया है | यहां तुलसी दास जी ने पशु और नारी दोनों को अलग नहीं किया है उनका आशय पशु समान नारी से है | जो नारी पशु समान व्यवहार करेगी जर्मन मेड लठ खायेगी ही उसे ना आप बचा सकती है और न ही तुलसी दास जी |

     आप घर जाओ कुछ ज्ञान ध्यान की और बाते पढ़ो तब पता चलेगा| रचना बी की हालत घायल नाग जैसी हो गयी अब फिर कभी ना कभी नया हमला करने की तैयारी में है | आल इज वैल ...आल इज वैल...

(नोट -उपरोक्त व्यंग का सम्बन्ध किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से नहीं है ,फिर भी अगर कोइ अपना सम्बन्ध इससे जोड़ना चाहे तो ये उसकी मर्जी है| )


इन्हें भी देखे





Wednesday, December 1, 2010

एक रूपये में लाईव सोंग एक संतुष्टी दायक अहसास(वीडियो ) ---------------नरेश सिंह राठौड़

एक रूपये में आज भी बहुत कुछ आता है आपके नहाने के शैपू से लेकर गुटखा,टॉफी,पेपर सोप ,पता नहीं क्या क्या आ जाता है | एक रूपये में बहुत दम है दो रूपये में भले ही दम ना हो लेकिन एक रूपये में बहुत दम है| अगर आपकी जेब में एक रूपया नहीं हो,तो आप बिना मोबाईल के फोन भी नहीं कर पायेंगे |

मेरा इरादा आपको ज्यादा भटकाने का नहीं है | कल मेरी दूकान पर एक भिखारी सा बच्चा आया और एक रूपया मांगने लगा | मैंने उससे पूछा भाई कुछ काम काज करोगे दूकान के आगे साफ़ सफाई ही कर दे मै तुझे रूपया दे दूंगा | लेकिन कहते है ना की काम चोर लोग ही भिखारी और बाबा बनते है | उसने भी ना बोल दिया फिर मैंने उससे पूछा कुछ गाना वाना आता है तो उसने एक राजस्थानी गीत सुनाया उसका आप वीडियो देखे |
अगर आपको राजस्थानी,हरयाणवी या गुजराती भाषा बिलकुल नहीं आती है तो समय बर्बाद ना करे ये आपके किसी काम का नहीं है |
video

रोहतक ब्लाग स्पेक्ट्रम : ताऊ महाराज और ताई महारानी चिंतित

पीछोला (मरसिया)Elegy-२

भूखे भक्तों को भगवान , भोजन कब पहुचाओगे

हठीलो राजस्थान-54

 

 

Monday, November 29, 2010

हाथ का दर्द और कम्प्यूटर पर बैठने की आदत........................नरेश सिंह राठौड़

     आप और हम सब लोग जो भी कम्प्यूटर के उपयोग कर्ता है उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय कम्प्यूटर के सामने बैठ कर बिताना होता है | कम्प्यूटर हेतु बाकायदा आजकल उसके लिए निर्धारित टेबल का उपयोग किया जाता है | कई बार ये देखने में आया है की काम करने वालों के हाथ या कंधे में दर्द रहता है और वे अपने आप को असहज महसूस करते है | ये दर्द इतना बढ़ जाता है की वे कम्प्यूटर पर काम करने में भी असमर्थ रहते है |

     मेरे कहने का मतलब ये नहीं है की कम्प्यूटर पर काम करने से हाथ या कंधे में दर्द होता है | दर्द किसी भी वजह से हो सकता है लेकिन उस दर्द में स्थायित्व और वृद्धि कम्प्यूटर पर बैठने की गलत आदत की वजह से होती है | अब गलत आदत क्या है वो मै आपको बताता हूँ जिस पर आपने कभी ध्यान ही नहीं दिया होगा |

     आप जब कम्प्यूटर पर काम करते है तो आपकी कोहनी को सहारे की जरूरत होती है विशेषकर के दाहिने हाथ की कोहनी को जिससे की आप माऊस को आपरेट करते है | कम्प्यूटर की निर्धारित टेबल की साईज इतनी छोटी होती है की आप की कोहनी को सहारा मिलना लगभग नामुमकिन होता है | टेबल की चौडाई को देखे तो उस पर केवल आपका मोनिटर ही आ सकता है की बोर्ड और माऊस के लिए जगह उसके नीचे ही बनाई जाती है | उस परिस्थिति में आपकी कोहनी बगैर सहारे के ही रहती है | उससे उसकी मांस पेशियों में खिचाव बढ़ जाता है | जिससे दर्द बढ़ता है | जब कभी आपके कोहनी या कंधे में दर्द हो तो आप इस बात का जरूर ध्यान रखे की आपकी कोहनी को सहारा मिलता रहे और आपका हाथ कोहनी के पास ९० डिग्री का कोण बनाता हुआ रहे|

     पिछले कुछ दिनों से मेरे हाथ में किसी कारण से दर्द हो गया था जिसे ठीक होने में बहुत समय लग गया तकरीबन तीन महीने जैसा अब इन दिनों में मैने इस बात पर काफी चिंतन किया है वो सब मै आपको इस पोस्ट के जरिए ही बता रहा हूँ |
बैठने की सही स्थिति के लिए आप इस चित्र को देखे |
चित्र गूगल से सभार
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भूखे भक्तों को भगवान , भोजन कब पहुचाओगे

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 सभी राजकुमारों ने रोहतक तिलयार झील पर पिकनिक के लिये जिद्द की!

 

Friday, November 26, 2010

चर्चा रचना बी की ---भाग १ .............................नरेश सिंह राठौड

     रचना बी जैसा की आप सभी जानते है यह नाम नया है | लेकिन मेरे शहर में यह नाम पुराना  है रचना बी की उम्र लगभग ३० - ३२ के आस पास है | आज सुबह सुबह दूकान पर चढ़ गई राशन पानी लेकर (मतलब आटा चावल लेने ) |

     वैसे मेरा कभी उससे ज्यादा वास्ता नहीं पड़ा था, लेकिन मोहल्ले भर के लोग कहते थे रचना बी पढ़ी लिखी बेवकूफ है | एक तो पढ़ी लिखी ऊपर से बेवकूफ यानी करेला और नीम पर चढा हुआ | मै इस प्रकार के लोगो से हमेशा बचा करता हूँ | मेरे पिताजी हमेशा कहा करते थे बेवकूफ को टका दे दो लेकिन अकल मत दो | मैने भी रचना बी को ज्यादातर ना नुकर से टरकाया है | लेकिन आज तो हालात कुछ अलग थे दाल कुछ ज्यादा ही जला कर आयी थी | सो आते ही बोली आप अकेले ही काम कर कर रहे है दूकान पर | मै ने कहा क्या करू , नौकर जितना काम ही नहीं है | क्यों आप अपनी घरवाली को क्यों नहीं रखते है ? आजकल घरवाली को परदे में रखना गैर कानूनी है| उन्हें समानता का अधिकार देना चाहिए | मै आप की महिला आयोग में शिकायत करूंगी रचना बी ने धुवा उड़ाते हुए कहा | रचना बी जब भी गुस्से में होती है , तो उनके कान में से धुवा निकलता रहता है | क्या कहते, हमें भी नियम कानून का कंहा पता है जो रचना बी से पंगा ले सकते | क़ानून की जानकारी तो दिवेदी जी को है|

      वैसे भी ताऊ ने कह रखा है बच्चे,ब्रह्मण ,गाय,जल,अग्नि ओर नारी से पंगा नहीं लेना, वरना इज्जत का फ़ालूदा बनते देर नहीं लगेगी | हमने भी रचना बी की बात मानते हुए अपनी अनपढ़ घरवाली को दूकान में रखने लग गए | वो भी साथ साथ काम करके सहयोग करने लगी |

    कुछ दिन बाद फिर अचानक रचना बी के दर्शन हुए , घरवाली को देखते ही कहा अरे ! आप घरवाली से काम करवाते है | आपको शर्म नहीं आती | औरतों पर अत्याचार करते हुए, घर का काम भी करे और आपकी दूकान का भी, यह तो नारी जाती पर अन्याय है आपकी शिकायत कोइ जागरूक महिला बलोगर से करनी पड़ेगी मै आपको ब्लॉग जगत में बदनाम करके रहूंगी | सूना है आपने भी ब्लॉग जैसा रोग पाल के रखा है | आपके इस दूकान में कम्प्यूटर भी नजर आ रहा है | आप जानते नहीं है मेरे सम्बन्ध बहुत ऊपर तक है | पूरा मोहल्ला मेरे नाम (आतंक ) से सलाम करता है | मेरे पसीने छूटने लगे आमिरखान  का आल इज वैल भी कुछ काम नहीं आया | मैने कहा रचना बी आप अभी तो घर जाइए आपकी दाल जल जायेगी जो आप चूल्हे पर चढ़ा कर आयी थी और टीवी पर आपके पसंदीदा कोमेडीयन अलबेला खत्री का प्रोग्राम  भी निकल जाएगा |
जैसे तैसे मैंने रचना बी से पीछा छुड़ाया लेकिन अब लगता है संगीता जी के ज्योतिष का सहारा लेकर देखना पडेगा की ये साढ़े साती है या ढया है|  जन्म कुण्डली के कोनसे भाव में क्या बैठा है पता ही नहीं चल रहा है | या सुबह सुबह कही शीशे में अपना ही चेहरा तो नहीं देख लिया ? क्या पता भगवान जाने क्या होने वाला है | आल इज वैल...... आल इज वैल.... आल इज वैल.....|
(नोट :-उपरोक्त पोस्ट का किसी भी जीवीत या मृत आदमी से कोइ सम्बन्ध नहीं है फिर भी अगर कोइ सम्बन्ध जोड़ना चाहे तो ये उसकी मर्जी है  )

पहेली बूझक राजा को ताऊ ने सिखाया सबक 

भूखे भक्तों को भगवान , भोजन कब पहुचाओगे-- मालीगांव

झुंझुनू में मनाई गयी महा राव शेखा जी की जयंती --- Rajput World


 


Thursday, November 25, 2010

तिलियार में हुआ सम्मलेन भाग -२ --------- नरेश सिंह राठौड़

      पिछली पोस्ट में मै बता चुका हूँ की किस तरह रोहतक पहुँचा और वहां पर कौन कौन मौजूद था | चित्र आपने इतने देख लिए है की नया कुछ नहीं है | सभी चित्र जो अब  तक आपने विभिन्न पोस्टो पर देख चुके है वो सतीश भाई की मेहरबानी है | इस विषय से जुड़ी सभी पोस्ट के लिंक आपको यहां पर मिल जाएंगे | अगर किसी की कोइ भी पोस्ट का लिंक यहां नहीं हो तो कृपया मुझे बताये ताकी मै उसे लगा सकू और मेरी शेखावाटी के पाठको को ज्यादा से  ज्यादा  जानकारी हो सके | बार बार उन्हीं चित्रों को यहां लगाने का कोइ औचित्य नहीं है |
अब आप वो चित्र देखिये जो ताऊ स्टाइल में है यानी की इस चित्र में कोइ बलोगर शिकायत नहीं करेगा की वो मौजूद नहीं है यंहा तक की मै खुद भी हूँ |
इस चित्र में बाए से - डॉ.श्री मति अरूणा कपूर  ,श्री महेन्द्र जी कपूर ,मै (नरेश सिंह राठौड़ ),अजय कुमार झा ,संजय भास्कर ,केवल राम ,कविराज योगेन्द्र मोदगिल ,खुशदीप सहगल, निर्मला कपिला जी ,श्री मति संजू तनेजा ,श्री मति संगीता पुरी जी ,ललित भाई,डॉ.प्रवीन चौपडा ,राजीव तनेजा जी ,हरदीप राणा ,शाहनवाज भाई आयोजक राज भाटिया जी ,अंतर सोहिल जी ,नीरज जाट,सतीश सक्सेना जी
     इस चित्र में एक शख़्स गायब है जो ताऊ के फोटो खींचने के बाद आये थे | जी हां अलबेला खत्री जी वो काफी देर से आये थे|  इस लिए आपको उन की फोटो इस विषय पर लिखी गयी पोस्टो में बहुत कम जगह मिलेगी | अलबेला जी जब पधारे थे तब मेरा वंहा से निकलने का समय हो रहा था इस लिए केवल उनसे हाथ ही मिला सका मेरे लिए ये भी बहुत गर्व वाली बात थी |

     वहां आये हुए बलोगरो ने आपनी अपनी कमिया बताई और  बताया की बलोगिंग में आने के बाद उनको कैसा महशूस होता है | उसके बाद कवियों और  कवियत्रियो ने अपनी रचनाओं से झिलवाया (सुनाया ) जो की मेरे जैसे मूढ़ प्राणी के लिए भेजे के ऊपर से निकलने वाली चीज है | केवल तालिया बजाई और झेली | कई किस्म के कवी थे दाढी वाले कवि, मूंछ वाले कवि  | उनकी कविताएं तो बहुत अच्छी रही होगी लेकिन हम जैसे मजदूर(लठमार ) आदमी को अच्छी रचना की कंहा समझ है| और जाते जाते भी योगेन्द्र मोदगिल जी ने अपनी रचनाओं की पुस्तक "अंधी आँखे गीले सपने" भेंट की और रास्ते भर उस पुस्तक को झेला और बस में अपने पास सहयात्री  को भी झेलवाया |

     उनकी इसी पुस्तक से चार  लाइन आप भी झेल ले .....

वो भी मुझ जैसा लगता है,
शीशे में उतरा लगता है || 
  
बूढी विधवा -टूटी लाठी ,    
दुक्खो का मेला लगता है ||

इसको पानी देना री बहूओ,
ये पीपल प्यासा लगता है ||

     अब बात करते है कमियों की मुझे इस समारोह में आयोजन में कोइ कमी नजर नहीं आयी ,लेकिन जो बलोगर वंहा आये उनकी समस्यों का समाधान वंहा नहीं हो सका इसका मलाल जरूर  है | जैसे की बहुत से बलोगरो ने यह क़हा की बलोग्वानी बंद हो गयी है इसका उन्हें बहुत दुःख है अब ये पता नहीं चलता है की किस चिट्ठे पर नयी पोस्ट कब आयी है | इस प्रकार के आयोजन पर जब इतना खर्चा हो रहा है तो एक प्रोजेक्टर का खर्चा और किया जाना चाहिए  | उसके द्वारा सभी बलोगरो को नए टूल नयी तकनीक का प्रदर्शन किया जाता तो और भी ज्यादा ज्ञानवर्धन हो सकता था | मेरा ये भी मानना है की प्रत्येक  ब्लोगर किसी न किसी तकनीक के बारे  में जरूर  जानता है जिसे दुसरे नहीं जानते है| हमें उन तकनीको को आपस में एक दुसरे से ग्रहण करना चाहिए | ताकी उनकी रचनाये शिघ्रता से सटीकता से ज्यादा से ज्यादा से लोगो तक पहुच सके |

     दूसरी एक बड़ी कमी नजर आयी वो थी लाईट(रोशनी की ) की जंहा पर सब लोग मिलते है फोटो वगैरा खीची जाती है उसके लिए  रोशनी, थोड़ी ज्यादा होनी चाहिए जिससे फोटोग्राफ्स ज्यादा सुन्दर आ सके क्यों की सभी लोगो के पास उन्नत तकनीक वाले कैमरे नहीं होते है |
इस सम्मेलन की अन्य बातों को जानने के लिए आप इन पोस्ट पर भ्रमण करे

कैसे हो ब्लोग्गिं से आर्थिक लाभ - रोहतक ब्लोगर मिलन---from प्रेम रस

तिलयार में छाया ब्लॉगरों का जादू ....संजय भास्कर from आदत.. मुस्कुराने की

रोहतक (तिलयार) में ब्लॉगर सम्मलेन : कुछ अविस्मरणीय पल ..केवल राम from चलते -चलते ....!

अंधी आँखें गीले सपने from अन्तर सोहिल = Inner Beautiful by अन्तर सोहिल


जब तिलियार में मिल बैठे यार ....रोहतक ब्लॉगर्स बैठक ..some photos cliked by झाजी from कुछ भी...कभी भी..  

हिंदी पोस्टों/ ब्लॉगर्स के प्रति केवल एक नॉन ब्लॉगर ही निष्पक्ष रह सकता है ...दिल्ली से तिलियार ..एक कार सफ़र विमर्श ..रिपोर्ट नं १ from कुछ भी...कभी भी.. by अजय कुमार झा

तिलयार में ब्लॉगरों की बहार...रोहतक लाइव रिपोर्टिंग...खुशदीप from नुक्कड़

तिलयार चिल यार...रोहतक लाइव रिपोर्टिंग कंटीन्यू...खुशदीप from देशनामा

तस्वीरें बताती है कल क्या था आलम...रोहतक रिपोर्टिंग...खुशदीपfrom देशनामा by खुशदीप सहगल


  इस पोस्ट में अपडेट  की ये जाने की सम्भावना है अगर कोइ पोस्ट का लिंक रह गया हो तो जरूर बताये | एक बात और  चलते चलते , रचना बी

आजकल हमारे मोहल्ले में आ गयी है सो अब उनके चर्चे आपको सुनाऊंगा |

Wednesday, November 24, 2010

रोहतक की यात्रा और बलोगर मिलन (raohatak jurny for blogar meetingh )

     कल यानी की २१ दिसम्बर को तय था, श्री राज भाटिया जी के द्वारा आयोजित बलोगर मिलन | ये बलोगर मिलन हमेशा होने वाले बलोगर मिलन से हटके था क्यों की इसका कोइ एजेंडा नहीं था | पहले से कोइ मकसद नहीं था सो इस पर सफल या असफल की टिप्पणी तो हो ही नहीं सकती है |

     रोहतक की यात्रा के लिए मुझे सुबह बहुत जल्दी उठाना पडा हमारे यंहा से पहली सीधी बस रोहतक के लिए ५ बजे के आस पास जाती है मै सुबह जल्दी जल्दी तैयार हुआ लेकिन बस स्टैंड पर पहूचा तो..... ओले भाई.....नीरज दहिया वाला डायलोग याद आ गया | मतलब की बस जा चुकी थी | इस लिए यात्रा टुकड़ो टुकड़ो में करनी पडी, नहीं तो समय पर नहीं पहुच पाता | मैने बगड से बस पकड़ी पिलानी पहुँचा, वंहा से बस पकड़ी लूहारू आया, लूहारू से बस पकड़ी भिवानी पहुँचा और भिवानी से रोहतक | टुकड़ों टुकड़ों में की गयी यात्रा का भी अपना अलग ही अनुभव होता है हर जगह के बस स्टोपेज को देखने का समझने का मौका मिल जाता है | अब एक चित्र देखिए जो भिवानी से रोहतक की बस में लिया था | और कुछ दृश्य बस स्टोपेज के भी है |
भिवानी से रोहतक की यात्रा में लिया गया एक फोटो 

रोहतक का बस स्टैंड 

     तिलियार लेक यही नाम था उस जगह का जहां ये मिलन आयोजित किया गया था | मुझे यह जगह ढूँढने में ज्यादा परेशानी नहीं हुयी क्यों की मेरे मोबाइल में भी गूगल मैप है उसके सहारे आराम से उस जगह पर पहुंचा जा सकता था |
इस सम्मेलन का सारा श्रेय मै अगर एक आदमी को दू तो वो है श्री राज भाटिया जी जो हाल ही में जर्मनी से यहां आये है | और उन की इच्छा थी की सभी बलोगरो से मिल लिया जाए कम समय में, सबसे मिलने का इससे बढ़िया जुगाड़ और हो भी नहीं सकता था | इस सम्मेलन में जिन लोगो ने अपना कर्त्तव्य निभाया वो इस प्रकार है:

आयोजक -श्री राज भाटिया
व्यवस्थापक -श्री अंतर सोहिल
तकनीकी जिम्मेदारी -शाहनवाज सिद्धिकी  ओर खुशदीप सहगल
संचालन किया -अजय कुमार झा ने |
इस में शामिल होने वाले ब्लोगर निम्न लिखित थे |
ऊपर जिनका जिक्र हुआ उनके अलावा
केवल राम
संजय भास्कर
नीरज जाट
ललित शर्मा 
राजीव तनेजा
श्रीमती संजू तनेजा
सतीश सक्सेना
अरूणा कपूर
कविराज योगेन्द्र मौदगिल

निर्मला कपिला
संगीता पुरी
योगेन्द्र मौदगिल
हरदीप राणा
इस बलोगर सम्मेलन के बारे में अगली पोस्ट में भी बताऊंगा कि वंहा किसने क्या कहा और क्या क्या कमिया दिखी..अगली पोस्ट का इंतज़ार करे |
ताऊ के कैमरे द्वार ली गयी वो फोटो भी देखना ना भूले जिसे आपने अब तक नहीं देखा है | जी हां ताऊ वंहा मौजूद थे |

Wednesday, November 17, 2010

अपने काम के प्रति समर्पित एक व्यक्तित्व - झुंझुनूं जिला कलेक्टर श्री मति मुग्धा सिन्हा

     आप सब सोच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है सभी लोग तो अपने काम के प्रती समर्पित होते है |मगर इस बलोग के पुराने पाठक तो इस बात को जानते है कि यहां उसी व्यक्ति के बारे में बात की जाती है जो अपने काम में कुछ विशेष हो, हां ये अलग बात है कि मै इस बार इस पोस्ट में एक सरकारी अधिकारी को ले रहा हूँ |सरकारी अधिकारियों के बारे में हमारी राय कुछ नकारात्मक ही रहती है | उनकी छवी हमारे मानस पटल पर भ्रष्टाचार और कामचोरी में संलिप्त की रहती है इस लिये सरकारी अधिकारी कभी भी इस ब्लॉग या यूं कहे कि हिन्दी बलोग में जगह नहीं बना पाए है |

     श्री मति मुग्धा सिन्हा के यहाँ झुंझुनू में पद भार ग्रहण करने के बाद यहां जो परिवर्तन आये है वो यहाँ कि कोइ भी अनपढ़ महिला भी अपने शब्दों में आशीष वचनों के साथ बयाँ कर देगी | इससे ज्यादा उन की सफलता के बारे में क्या कहा जा सकता है | किसी भी सरकारी अधिकारी के कार्यों का सकारात्मक परिणाम आपके घर रसोई या गली कूचो में दिखाई दे तो उसे आप क्या कहना चाहेंगे |


     मै काफी समय से यही सोच रहा था कि ये पोस्ट लिखू या ना लिखू अगर ना लिखू तो अपने दायित्वों से मुँह मोडना हो जाता है ,अगर लिखता हूँ तो एक सरकारी अफसर का फेवर करने का आरोपी बनता हूँ | आखिर में इस मानसिक द्वन्द में जीत एक बलोगर के नैतिक दायित्व की ही हुई है | परिणाम स्वरूप ये पोस्ट आपके सामने है |

     झुंझुनू आते ही उनहोने पहला काम ,साफ़ सफाई का हाथ में लिया | ज्यादातर अधिकारियों को सफाई के सर्वे में साफ़ सुथरी मुख्य सड़के दिखाई जाती है ,लेकिन यह बात उन्हें पता थी इस लिये उन होने सर्व प्रथम उस जगह का दौरा किया जो शहर की सबसे गंदी जगह (शहीद चौक ,सब्जी मंडी के पास) का दौरा किया और स्थानीय परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों को कहा कि इससे गंदा शहर मेंने अपने कार्यकाल में नहीं देखा है |
 
     गैस एजेंसी की काला बाजारी रोकने के लिये इस प्रकार का आदेश जारी किया कि आज कुकिंग गैस सप्लाई वाला घर घर जाकर बिना बुकिंग किये ही डिलीवरी देता है| वरना हालात रोजाना चक्का जाम और सर फूटोव्वल के रहते थे |


     सडको पर इतना अतिक्रमण था कि एक साथ दो गाड़ी तो दूर की बात है एक गाड़ी को निकालने में भी परेशानी का अनुभव होता था | उनके आने के बाद में नाजायज खड़े रेहड़ी वालो को हटा दिया गया है | दुकानदारों को ताकीद की गयी है कि सामान दूकान के बाहर ना रखे ताकी वाहनों के आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी ना हो | जो सड़के आठ फुट चौड़ी दिखती थी वो आजकल बीस फुट चौड़ी नजर आने लग गयी है |

     यंहा के सरकारी विभागों में काफी दिनों से मीटिंग का कलेंडर नहीं बना हुआ था जिसे अब इन्होने लागू किया है| यानी कि सभी कर्मचारियों को पहले से पता रहता है कि मीटिंग कब होगी | जो भी मीटिंग देर तक चलने की संभावना रहती है उसे शनिवार और रविवार को रखा जाता है | ताकी जन  साधारण का कोइ भी काम नहीं रुके | उन के बारे में एक बात और भी मशहूर है कि उनका फोन व्यस्त होने पर अगर आपकी मिसक़ाल उन्हें मिलती है तो उनका फोन आपके पास जरूर आएगा  आपको दुबारा फोन नहीं करना पड़ता है |


श्री मति मुग्धा सिन्हा जी के पुराने कार्यकाल में हनुमान गढ़ जिले में भी बहुत उल्लेखनीय कार्य हुए है जिनकी जानकारी हमारे एक मित्र (श्री ओम पुरोहित 'कागद ')जो लेखक भी है और ब्लोगर भी है ,ने भिजवाई थी | जिसे मै संक्षेप में लिख रहा हूँ |उन्होंने बताया कि हनुमान गढ़ में पहली बार वरिष्ठ पेंशनरों को इन्होने सम्मानित किया |वंहा भी सफाई के अनेक कार्य योजनाबद्ध तरीके से किये गए | गरीबो एवं असहायो हेतु उन्होंने सारथी योजना  बनाई | इसमें शहर के धनी लोगो को  प्रेरित कर जरूरतमंद लोगों की सहायता करवाई गई | चित्र कला में इनकी विशेष रूची होने की वजह से इन्होंने इस कला के प्रोत्साहन हेतु  बहुत सराहनीय कार्य किया है | और स्वयं भी एक बहुत अच्छी चित्रकार हैं |
 
     मै जब इस पोस्ट में उनके कार्य शैली के बारे में लिखने हेतु उनसे जानकारी चाही तो मुझे साफ़ मना कर दिया गया | क्यों कि उनके बारे में सूचना मिली थी कि वो प्रचार प्रसार से हमेशा बचती रही है | फिर भी मुझे उनके बारे में जो जानकारी नेट कि दुनिया में मिली है वो इस प्रकार है |

नाम -श्रीमती मुग्धा सिन्हा

जनम तिथि -04/06/1974

शहर -आगरा

शिक्षा - बी. ए. (हिस्टरी ) एम. ए.(अन्तराष्ट्रीय समबन्ध )

एम. फिल.(अन्तराष्ट्रीय कूटनीति )

वर्तमान कार्य स्थल -जिला कलेक्टर झुंझुनूं (राज.)
 


S.N.POST HELD BY SMT.MUGHDHA SINHAFROMETO
1COLLECTOR &DISTRICT MAGISTRATE, JHUNJHUNU 06/09/2010--
2REGISTRAR, BOARD OF REVENUE, RAJASTHAN, AJMER 06/01/200903/09/2010
3COLLECTOR & DISTRICT MAGISTRATE, HANUMANGARH 30/4/200703/01/2009

4
COLLECTOR & DISTRICT MAGISTRATE, BUNDI 15/06/200528/04/2007
5DEPUTY SECRETARY TO CHIEF MINISTER, RAJASTHAN, JAIPUR 15/12/200315/06/2005
6ADD. COLLECTOR & ADD. DISTRICT MEGISTRATE, JAIPUR-I 30/05/200315/12/2003
7SUB-DIVISIONAL OFFICER, AJMER13/08/200129/05/2003
8UNDER IInd PHASE TRAINING AT LBSNAA, MUSSOORIE25/06/200104/08/2001
9ASSST. COLLECTOR & EXE. MAGISTRATE (UNDER TRAINING), UDAIPUR 20/07/2000----

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Saturday, November 13, 2010

एयर सेल जी पी आर एस की स्पीड की तुलना (एक माईक्रो पोस्ट )

जी पी आर एस का मतलब है मोबाइल द्वारा अपने पीसी पर इंटरनेट काम में लेना | अभी राजस्थान में एयरसेल कंपनी ने अपनी सेवा लांच की है | मेरे क्षेत्र में भी इसका आगमन हुआ है | तो सोचा इसकी नेट स्पीड के बारे में मै आपको बताता चलू | इससे पहले भी मैंने इसी विषय पर बताया था कि आप मोबाइल द्वारा अपने पीसी पर इंटरनेट कैसे चला सकते है

आप नीचे दिये गए दोनों चित्र देखिए (जिनमें परिणाम दर्शाया गया है )आपको समझ में आ जाएगा कि मै क्या कहना चाहता हूँ |
एयर सेल द्वारा प्राप्त की गयी डाटा स्पीड 




रिलायंस जी एस एम् द्वारा प्राप्त की गयी डाटा स्पीड 

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माली गाँव :मन मोहक नजारा गणेशोत्सव की झांकी का
एक वीर जिसने दो बार वीर गति प्राप्त की

Wednesday, November 10, 2010

शेखावाटी की पहली महिला ब्लोग्गर : डॉ.मोनिका शर्मा

पिछली पोस्ट में मैंने आपका परिचय शेखावाटी के हिन्दी बलोगरो से संक्षिप्त रूप में करवाया था | इस बार मै आपको डॉ. मोनिका शर्मा जी से मिलवाता हूँ |

मोनिका जी सीकर जिले के गाँव जानकीपुरा की रहने वाली है | हमारा गृह जिला झुंझुनू इनकी ससुराल है | लेकिन अब इनके पति महोदय की सेवा कनाडा में होने की वजह से आजकल कनाडा में रहती है| प्रारम्भिक शिक्षा पुश्तैनी गाँव जानकीपुरा में करने के बाद इनकी पढाई भोपाल म. प्र. में हुई । वहां से अर्थशास्त्र में एम. ए. करने के बाद इन होने पत्रकारिता और जनसंचार में भी मास्टर्स डिग्री ली। उसके बाद अपना शोधकार्य राजस्थान विश्वविद्यालय , जयपुर से पूरा किया। जिसका विषय ‘हिन्दी समाचार पत्रों में प्रकाशित सामाजिक चेतनामूलक विज्ञापन’ था। कुछ समय तक निजी महाविद्यालय में बतौर लेक्चरर और जयपुर दूरदर्शन के लिए समाचार वाचक का काम भी किया।अब तक इनके कई पत्र-पत्रिकाओं ( राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण, नई दुनिया, डेली न्यूज , दैनिक हरिभूमि , दैनिक नवज्योति, दिशा-दृष्टि, वुमन ऑन टॉप और अनौपचारिका आदि) में बतौर स्वतंत्र लेखक करीब 500 आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
इन के पिताजी कोमर्शियल पायलट के पद से कुछ समय पूर्व ही रिटायर हुए है | इनके भाई भी एक कोमर्शियल पायलट ही है | इनका परिवार उच्च पदों पर होने के बावजूद गाँव कि मिट्टी से ये लोग जुड़े हुए है | जिसकी झलक इनके ब्लॉग में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है |


ब्लोगिंग करने का कारण वे कुछ यूं बयाँ करती है "आज के दौर में अपने विचारों को साझा करने के लिए ब्लॉगिंग बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें एक तरफा संवाद नहीं होता । पाठकों की राय भी हाथों-हाथ मिल जाती है । इस तरह एक वैचारिक प्रवाह बना रहता है जो मुझे काफी सकारात्मक लगता है।"


उनके बलोग तीज तेवार के बारे में पूछने पर उंहोने बताया " तीज-तेवार राजस्थानी भाषा में है। इस ब्लॉग पर मैंने खासतौर पर राजस्थानी नेगचार, रीति-रिवाज और तीज-त्योंहारों से जुङी बातों को सहेजने की कोशिश की है। यह हमारे रीति-रिवाजों के बारे में जो चीजें मुझे पीहर-सासरे में देखने-सीखने को मिली उन्हें अंतरजाल पर सबके साथ बांटने का प्रयास है। इस ब्लॉग को बनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि आगे आने वाली पीढियां भी हमारे गीत-नात, नेगचार को जानें और इनके माध्यम से हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत से जुड़ाव रखे।"

अपनी सफलता का सारा श्रेय वे अपने माता पिता को देते हुए कहती है "मेरे माता पिता मेरे लिए शक्ति स्तंभ रहे हैं. माँ एक गृहणी हैं और ज़्यादातर समय गाँव में ही रही हैं पर उन्हों ने हमेशा चाहा की मैं अपनी पढाई जारी रखूं . इसी तरह पापा ने भी हमेशा उत्साहवर्धन किया और आगे बढ़ने की हिम्मत दी है |"

भविष्य के बारे में उनका नजरिया " मेरा मानना है- आने वाले समय में हम पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक उन्नति चाहते हैं तो बच्चों का सही तरह से पालन पोषण बहुत जरूरी है। इसके लिए उन्हें समय देना उन्हें समझना बेहद आवश्यक है।मेरा इस बात में पूरा विश्वास है कि माँ होने से बढकर जिम्मेदारी दूसरी कोई नहीं हो सकती। यही वजह है कि फिलहाल मैं अपना पूरा समय अपने बेटे चैतन्य की बेहतर परवरिश में लगाना चाहती हूं। जितना समय मिलता है उसमें अच्छा पढने लिखने की कोशिश जरूर करती हूं"

मोनिका जी के ब्लॉग :
परवाज ....शब्दों के पंख
तीज तेवार
चैतन्य का कोना

Monday, November 8, 2010

10 साल पुराने वो 110 रूपये

     बटुआ, पर्स, वैलेट अपनी पेंट की पिछली जेब में सभी लोग रखते है | मै भी रखता था | लेकिन अब दिन भर दूकान में बैठता हूँ तो यह आदत भी छूट गयी थी | आज अचानक हमारी गुडिया ने मेरा पुराना  पर्स(बटुआ)कही से निकाल लिया जिसका मैंने काफी दिनों से उपयोग बंद कर दिया था | और उसने एक एक जेब की तलाशी लेनी चालू की | लेकिन जब पर्स में कुछ रखा हुआ हो तब मिले ना | अचानक उसके होठो पर मुस्कान तैर गयी क्यों कि पर्स के अंदर की जेब (गुप्त जेब) में उसे एक सौ का नोट और एक दस का नोट दिखाई दे गए |अब उसके सवाल चालू हो गए |
चित्र गूगल के सौजन्य से 

चित्र गूगल के सौजन्य से

     मेरा ध्यान अपने पुराने बीते हुए समय की तरफ लौट गया | यही कोइ दस ग्यारह साल पहले मै जब सूरत में पेमेंट कलेक्सन का काम करता था | यह पैसे उसी समय के रखे हुए थे | उस समय ये रूपये मुझे मजबूरन सबसे छिपाकर रखने पड़ते थे | यह उस समय का टूव्हीलर का नो पार्किंग चार्ज था जो ट्रैफिक वाले वसूलते थे | आजकल की रेट  मझे भी पता नहीं है कितना बढ़ गया है | लेकिन तब 110  ही था | ये 110 रूपये केवल आपात स्थिति में ही काम में लेने हेतु रखे जाते थे | जो भी मार्केटिंग का काम करता है | उसे अपना व्हीकल नो पार्किंग में ही रखना पड़ता है क्यों कि अगर पार्किंग में पार्क करे तो उसे घुसाने और बाहर निकालने में ही 15-20  मिनट लग जाते है जो कि बैंकिंग हावर में बहुत महत्वपूर्ण होते है | इस लिये नो पार्किंग चार्ज हमेशा ही पास में रखना मुनासिब रहता है |
     अगर उस समय आपके पास रुपये है और आप समय पर पहुच जाते है,तो आप की बाइक क्रेन पर लटकने से बच जायेगी नहीं तो आपकी बाइक ट्रैफिक पुलिस की क्रेन पर झूला झूलते हुयी जायेगी | ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय जाने पर ही छुड़ा पायंगे | मुख्यालय तक आप को ऑटो में जाना पड़ेगा | दूसरी बात जिस इन्सपैक्टर ने उसे उठाया है वो ही उसका चालान अपनी चालान बुक में से काटेगा दूसरा नहीं | जब आप वंहा पहुचते है और वो क्रेन दुसरे राऊंड हेतु गयी हुयी हो तो आप को मुख्यालय में दो तीन घंटे इंतज़ार भी करना पड सकता है |अगर आप ने एक दिन से ज्यादा वंहा छोड़ दिया तो तो आपकी बाईक की असेसरीज से लेकर टायर ट्यूब तक गायब हो जाते है | इन सब बातो को एक भूक्त भोगी अच्छी तरह से समझ सकता है |इन सब खतरों को देखते हुए ये 110 रूपये हमेशा पर्स की चोर जेब में ही रखे जाते थे | आप कहाँ रखते है ?


राजस्थान के लोक देवता
पहेली से परेशान राजा और बुद्धिमान ताऊ
माली गाँव

Saturday, October 16, 2010

शेखावाटी से जुड़े हुए हिन्दी ब्लोगर (परिचय )

शेखावाटी का सीधी भाषा में अर्थ है राजस्थान राज्य के तीन जिले झुंझुनू ,सीकर और चुरू | इन जिलों में अनेक हिन्दी ब्लोगर है | कुछ को मै ढूंढ पाया कुछ को शायद नहीं | कई बार कुछ लेखक ब्लॉग बनाकर छोड़ देते है उस पर कुछ लिखते ही नहीं है मैने उन्हें शामिल नहीं किया है | इस पोस्ट में उन लोगो को शामिल किया गया है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शेखावाटी क्षेत्र से जुड़े हुए है |

सबसे पहला नाम है संजय बेगानी जी का ,ये किसी परिचय के मोहताज नहीं है हिन्दी बलोग जगत में जाना पहचाना नाम है | लेकिन लोग इन्हें अहमदाबाद के निवासी के रूप में ही जानते है | इनका मूल गाँव बीदासर के पास में है | जो की चुरू जिले में आता है | लेकिन अब ये अहमदाबाद में रहते है और अपनी मीडिया कंपनी चलाते है | इनका वेब पेज जोग लिखी: संजय बेगानी का ब्लॉग है | और तरकस डोट कोम को तो आप सभी जानते ही है | इनके भाई भी हिन्दी ब्लॉग लेखक है |

दूसरा बड़ा नाम है ताऊ रामपुरिया का ये भी हमारे नजदीकी जिले सीकर के कस्बा पाटन के पास के ही रहने वाले है | ये बहुत ही ज्ञानी है इस लिए इन्होने अपना असली नाम गुप्त रख कर ताऊ ही रख लिया है | आजकल इन्होने अपनी कर्म स्थली इंदौर (म.प्र. ) को बना रखी है | इनके वेब पेज का नाम रामपुरिया का हरियाणवी ताऊ नामा है | वाकई हिन्दी बलोग जगत में ताऊ के जैसी इमेज भी है इनकी | इनकी भाषा शैली हरियाणवी मिश्रित है जो बहुत मजेदार लगती है |

तीसरा बड़ा नाम है रतन सिंह शेखावत का इनका गाँव है भगत पूरा जो की सीकर जिले में है | काम काज के सिल सिले में ये फरीदा बाद में रहते है | इनके ब्लॉग भगतपुरा गाँव के बारे ,ज्ञान दर्पण ,राजपूत वर्ल्ड ,तन सिंह जी (बाड़मेर ) आदि है | ये तकनीक के महारथी भी है अगर किसी को अपनी वेबसाईट बनवाना हो या डोमेन नेम लेना हो तो इनसे संपर्क किया जा सकता है |

चौथा एक बड़ा नाम है डॉ. मिहिर धाबाई का ,ये सीकर शहर में रहते है | यंहा इनका निजी क्लिनिक है | इनके ब्लॉग दो है एक है तत्वचर्चा दूसरा है स्वास्थ्य चर्चा ,इसमे त्वचा सम्बन्धी लेख लिखते है | तत्व चर्चा में ताजा सामाजिक घटनाओं पर चर्चा करते है |

पांचवा बड़ा नाम है, हरी राम जी का ये भी सीकर के रहने वाले है लेकिन आजकल दक्षिण भारत में रोजी रोटी के कारण रहते है | ये हिन्दी को कंप्यूटर पर बढ़ावा देने में बहुत ही अग्रणी रहे है | हिन्दी प्रेम इनके रग रग में बसा हुआ है पुराने स्थापित ब्लोगर इन्हें बखूबी पहचानते है | आजकल काम काज की व्यस्तता के चलते ये निष्क्रिय है | लेकिन जो इन्होने लिखा है वो हम जैसे नए बलोगरो का मार्ग दर्शन कर रहा है | इनका ब्लॉग है प्रगत भारत |

बाकी सब छोटे मोटे ब्लोगर है , मेरे जैसे जिनमे हमारे दोस्त सुरेन्द्रजी भाम्बू जिनको हमने बलोगिंग का ऐसा शौक लगाया की लगातार पोस्ट पेलते रहते है | इनका ब्लॉग इनके गाँव मालीगांव के नाम पर बनाया गया है | इनकी कर्म स्थली बगड़ यानी की हमारा कस्बा ही है | यहां पर इनकी कम्प्यूटर आर्टस एंड फोटोग्राफी की दूकान है |

झुंझुनू जिले के बिसाऊ कस्बे के रहने वाले बलोगर भाई मुकेश मीणा ने बहुत अच्छा ब्लॉग बना रखा है | इनका ब्लॉग जनताकी आवाज नाम से है | इनसे अभी ज्यादा परिचय नहीं हुआ है |

अब बात करते है एक एसे बलोगर की जो आजकल निष्क्रिय है | ये है राजेश चौधरी ये झुंझुनू जिले से है गाँव का पता नहीं चला है | इनका ब्लॉग है उदयमान भारत | जिसमें इन होने जीनोलोजी के बारे में लिखा है |

एक ब्लोगर है विनोद कुमार शिवरायण जिनका ब्लॉग उनके नाम पर शिवरायण कुमार विनोद ही है | लेकिन आजकल निष्क्रिय है |

एक और बलोगर है उम्मेद जी जिनका ब्लॉग अभिव्यक्ति के नाम से है | ये चुरू के रहने वाले है | पेशे से कोलेज लेक्चरार है | इनका ब्लॉग बहुत सुंदर चित्रों व जानकारियों से भरपूर है | ये सभी प्रकार की पोस्ट लिखते है जिनमे राजस्थानी कविताएं भी शामिल है |

अपडेट -बाद में कुछ साथी बलोगरो ने निम्न नाम और भी सुझाए है |
इनमे एक नाम है भास्कर भारद्वाज जी का ये जयपुर में रहते है | एक इंटरनेशनल इवेन्ट कंपनी में काम करते है |ये रामगढ़ (शेखावाटी )के रहने वाले है | इनका ब्लॉग है भास्कर टाईम्स जिसमे ये विभिन्न प्रकार के तकनीकी लेख लिखते है |

एक नाम है दूला राम जी सहारण का ये पेशे से वकील है | चुरू के रहने वाले है | इनका बलोग है इन दिनों ... इसमें ये आजकल के हालात पर लिखते है | दूसरे और भी बहुत से बलोग बना रखे है |

फ़तेह पुर शेखावाटी के रहने वाले श्री अंकित जी बूबना ने बहुत सुन्दर बलोग बना रखा है | इस ब्लॉग की सुन्दरता की जितनी तारीफ़ की जाए उतना कम है | इस बलोग का नाम है फतेहपुर शेखावाटी रो बलोग |

इसी कड़ी में बाद में अपडेट प्राप्त हुए है जिसमे एक ब्लॉग है बहती धारा इस ब्लॉग के लेखक है संदीप कुमार मील | ये दिल्ली विश्वविद्यालय से पढाई कर रहे है ये नवलगढ के पास के रहनेवाले है |

महिला ब्लोगर ,डॉ.मोनिका जी है जिनका ब्लॉग परवाज ....शब्दों के पंख है | अगली पोस्ट में मोनिका जी बारे में विस्तार से लिखूंगा

और अंत में हम अपने बारे में क्या कहे आप जब यंहा तक आ ही गए है तो हमारे बारे में भी जान ही जायेंगे |

अपडेट
-हमारे कुछ खास बलोग्गर भी इस लिस्ट में जुडने से रह गए थे | इनका नाम है डॉ.जीतेन्दर ( जीतू) बगडिया | ये अभी जयपुर से मेडीकल की पढाई कर रहे है | इनके ब्लॉग का नाम एक कदम दूसरों के लिये है |ये भी सीकर जिले के रहने वाले है |

श्री विश्वनाथ जी सैनी  नवलगढ़ के पास झाझड गांव के रहने वाले है | ये गाँव झुंझुनू जिले में आता है | सैनी जी राजस्थान पत्रिका के चुरू कार्यालय में कार्यरत है | इनके बलोग का नाम है खबरो का अड्डा   इस बलोग में स्थानीय खबरों का विस्तार से प्रकाशन किया जाता है |
(आप सब पाठक मित्रो से अनुरोध है अगर आप किसी भी अन्य ब्लोगर को जानते है जो राजस्थान के झुंझुनू सीकर और चुरू जिले से जुडा हुआ है तो हमें भूल सुधार हेतु जरूर बताये )

राजनैतिक दल एवं क्षत्रिय
पहेली से परेशान राजा और बुद्धिमान ताऊ
माली गाँव :मन मोहक नजारा गणेशोत्सव की झांकी का