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Thursday, March 19, 2009

राजस्थान कि ओर्गेनिक सब्जी

राजस्थान के मरूस्थलीय भागों मे एक वनस्पति पायी जाती है जिसे यहाँ स्थानीय भाषा मे खींप कहते है । इसके मार्च के महीने मे फ़ली लगती है |जिसकी सब्जी बनायी जाती है । अब आप यह कहेंगे कि इसमें अनोखी बात क्या है । सब्जी तो सभी जगह बोई जाती है सभी जगह पैदा होती है इस पोस्ट का लिखने का क्या मतलब है । वर्तमान मे जो सब्जियां तैयार हो रही है उनके बीज हाई ब्रीड होते है यानि कि शंकर होते है । जिससे पैदावार तो ज्यादा होती है लेकिन गुणवत्ता कम हो जाती है । स्वाद भी बहुत बढ़िया नही होता है। किसान ज्यादा पैदावार लेने के चक्कर मे उस पर ज्यादा रसायनिक खादों व कीट कीटनाशकों का उपयोग करता है । परिणाम स्वरूप उसका स्वाद व गुणवत्ता खत्म हो जाती है । राजस्थान के शेखावाटी प्रदेश मे भी सब्जियां बहुतायत मे बोई जाती है । आजकल केवल कुछ ही सब्जियां है जिनमें प्राकृतिक स्वाद निहित है । जैसे कैर.ककोड़ा,सांगर(खेजडी की फ़ली),फ़ोगला (रायता बनाने के काम मे लेते है )खींपोळी (खींप की फली )आदि । अन्य सभी सब्जियों मे ज्यादा या कम मात्रा मे रसायनों का प्रयोग होता ही है । मुझे खेत की तरफ़ गये हुये काफ़ी दिन हो गये थे समय अभाव कि वजह से नही जा पाया। कल जाने का वक्त मिला चित्र मे जो हरे रंग के तार से दिखते है इसे ही खींप कहते है। इसकी फली बहुत गुण दायक होती है । आयुर्वेद मे शरीर मे कुछ विकारो के बारे मे बताया गया है जिसमें एक वायु विकार भी है । वायु विकार कि वजह से शरीर मे दर्द रहने लग जाता है । वायु विकार को दूर करने मे कैर व खींपोळी बहुत ही सहायक है । कहने का मतलब यह है कि आम के आम और गुठलियों के दाम ।

खींपोळी
की सब्जी बनाने में खटायी देने के लिये छाछ का प्रयोग किया जाता है । रस्से को गाढा करने के लिये बेसन का उपयोग किया जाता है । सबसे पहले फ़ली को धोकर काट ले तथा उबाल ले । दबा कर उसका पानी निकाल ले तथा दूसरे बर्तन मे तेल मे सब्जी का मशाल पका उसमें उबली हुयी फ़ली डाल कर चलाये । एक कप मे थोड़ा सा बेसन व छाछ की पेस्ट बनाकर वह भी इसमें डाल दे । व चम्मच से चला कर चूल्हे से उतार ले आपकी सब्जी तैयार है

“खींपोळी ए म्हारी खींपा छायी तारां छायी रात---------गणगौर के गीतो मे भी इसका बखान किया जाता है । राजस्थान की माटी से जुड़े हुये लोग इसके स्वाद को बहुत अच्छी तरह जानते है । अगर हो सके तो मित्रों आप एक बार इस सब्जी को चख कर जरूर बताये ।

17 comments:

  1. यह तो बढ़िया जानकारी दी है आपने ..शुक्रिया

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  2. हमारे हाड़ौती में नहीं होती यह खींपोली। पर कभी जोधपुर गए तो मांग कर खाएंगे।

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  3. नाम तो पहली बार सुना है.
    खाने के बाद ही पता चलेगा की ..........
    चित्र नही खुल रहा है. शायद कुण्डी लगी हुई है.
    रोचक जानकारी के लिए धन्यवाद

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  4. भाई नरेश जी क्युं कर याद दिलवाई सै ? खाई तो खूब है पर यहां कहां? और कैर भी जो शेखावाटी के आते हैं उनमे जो स्वाद है वो यहां जो कैर (सूखे) मिलते हैं उनमे वैसा मजा नही आता.

    खैर बहुत बढिया याद दिलाई आपने.

    रामराम.

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  5. और हां आजकल तो आप गणगौर के गीतों का ज्यादा आनन्द ले रहे होंगें ?:)

    रामराम.

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  6. बढ़िया याद दिलाई ! लेकिन क्या करे हमारे खेतों में तो ट्रेक्टरों ने सब कुछ उखाड़ फैंका ! खींप तो अभी है लेकिन ककेडा की बेलें गायब हो गयी ! दरअसल आज से बीस साल पहले ही खेत के पडोसी जाट ने ककेडे की बैलों की जड़े एक एक कर सारी निकाल ली वो अपने कपडे धोने के लिए साबुन की जगह इन जड़ों का इस्तेमाल करता था और उस समय हम भी इतना समझते नहीं थे सो कभी उसे मना नहीं किया अब याद आती है तो बड़ा पछताते है | और केर,फोगडे, बैरों की छोटी छोटी झाडिया ये सब ट्रेक्टरों ने निकाल फैंकी |

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  7. कुदरत कितनी मेहरबाँ होती है देखिये - राजस्थान की मरुभूमि मेँ ऐसी अँऋतदायी खीपी उत्पन्न कर दी -- हमने तो पहली बार ये नाम सुना - अब पता नहीँ खायँगे कब ? आपकी रेसिपी बढिया लगी - आभार !
    - लावण्या

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  8. रोचक और दिलचस्प जानकारी.

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  9. जो फोगले का रायता एक बार खा ले उसे कोई दूसरा रायता भाएगा ही नहीं। बाजरी की गर्मा गरम रोटी और फोगले का रायता।

    वाह क्‍या बात है


    कल ही बनवाकर खाउंगा। आज तो बासोड़ा है।

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  10. खिपोली -पहली बार जाना !

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  11. अच्छी जानकारी.. राजस्थान से जुड़ा होने के बावजूद इसका स्वाद याद नहीं कर पा रहा हूं.. आभार इतनी अच्छी जानकारी देने के लिए

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  12. जानकारी तो आपने अच्‍छी दी ... पर यह राजस्‍थान से बाहर बाजारों में भी मिलती है क्‍या ?

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  13. इस सब्जी का कोई और नाम भी बताइए तो बाजार में पता करें

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  14. रोचक और दिलचस्प जानकारी

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  15. मैं भी राजस्थान से हूँ पर मैने भी कभी इस सब्जी को नहीं खाई और ना ही नाम सुना। फोगले का भी नही!
    अगली बार कभी जोधपुर तरफ आना हुआ तो जरूर इस सब्जी को खाना पड़ेगा।

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  16. भाई सागर नाहर जी ,ये वनस्पति खाड़ी देशो में भी होती है | वंहा भी रेगिस्तान है |वंहा इसका नाम क्या है ये मुझे भी नहीं पता |

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