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Sunday, December 5, 2010

रचना बी के तुलसीदास (चर्चा रचना बी की भाग २ )....................नरेश सिंह राठौड़

     पिछली पोस्ट में मैंने आपसे वायदा किया था की रचना बी के और भी किस्से मै आपको समय समय पर सुनाता रहूँगा | अब पाठक मित्रों के आग्रह पर उनका ये दूसरा किस्सा सुनिए |

     हुआ यू की हमारे मोहल्ले में रहने वाले पंडित हीरानंद जी शास्त्री रामायण के बहुत बड़े भक्त और विद्वान है | आस पास में रामायण का पाठ करने जब तब जाते रहते है | एक दिन वो भी चढ़ गए रचना बी के चक्कर में और वो ही क्या जो भी अपने आप को बड़ा ताऊ समझता है वे सभी रचना बी के साथ पंगे ले चुके है | पूरा गाँव भर जानता है की रचना बी के साथ पंगा लेने का अंजाम क्या है | उनसे पहले वो खाज जाटिया जिसकी कपडे की दूकान है और वो मालीत शर्मा जो पत्रकार है ,और भी ना जाने कितने सक्सेना,शर्मा,खत्री,पत्री,जोसेफ,थोमस आदि को पंगा लेना भारी पड गया था | खैर लम्बी लिस्ट है लेकिन आज चक्कर में चढ़े हीरानन्द शास्त्री जी |

     शास्त्री जी और रचना जी दोनों बहस करते हुए मेरी दूकान पर आये| रचना कह रही थी की तुलसी नारी विरोधी है जबकी शास्त्री जी कह रहे थे की तुलसी जी नारी को पूजनीय मानते है और पूरा सम्मान देते है | रचना ने अपनी बात के पक्ष में रामायण की एक चौपाई कही की
ढोल गंवार शुद्र पशु नारी,ये सब ताडन के अधिकारी || (जिसका अर्थ रचना बी ने बताया की ढोल(बाजा ),गंवार मनुष्य, निम्न जाती का मनुष्य, पशु और नारी ये सब जर्मन मेड लठ के लायक है )
जब की पंडितजी अपनी बात को मजबूत करने हेतु दूसरी चौपाई कही  "धीरज धरम मित्र अरू नारी आपति काल परखिये चारी || (जिसका अर्थ पंडितजी ने बताया की धैर्य ,धर्म ,मित्र और नारी ये सब विपत्ति के समय काम आने वाले सिद्ध होते है |
दोनों के तर्क देख का एक बरगी हम जैसे अज्ञानियों का भी सर चकराया लेकिन क्या करते बच कर निकने का कोइ रास्ता भी तो नहीं था |

     हमने कहा ये बात पूरा गाँव जानता है रचना बी आपने हमेशा ही अर्थ का अनर्थ किया है | आप अपनी बातों से पानी में आग लगा सकती है | ये बेचारे सीधे साधे पंडितजी तुम्हारे चक्कर में चढ़ गए है लेकिन बात तुलसी दास जी की है सो गलत कभी नहीं हो सकती है | आपने अपनी चौपाई में एक छोटे से कोमा को हटा कर पूरा अर्थ ही बदल दिया है | यहां तुलसी दास जी ने पशु और नारी दोनों को अलग नहीं किया है उनका आशय पशु समान नारी से है | जो नारी पशु समान व्यवहार करेगी जर्मन मेड लठ खायेगी ही उसे ना आप बचा सकती है और न ही तुलसी दास जी |

     आप घर जाओ कुछ ज्ञान ध्यान की और बाते पढ़ो तब पता चलेगा| रचना बी की हालत घायल नाग जैसी हो गयी अब फिर कभी ना कभी नया हमला करने की तैयारी में है | आल इज वैल ...आल इज वैल...

(नोट -उपरोक्त व्यंग का सम्बन्ध किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से नहीं है ,फिर भी अगर कोइ अपना सम्बन्ध इससे जोड़ना चाहे तो ये उसकी मर्जी है| )


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Friday, November 26, 2010

चर्चा रचना बी की ---भाग १ .............................नरेश सिंह राठौड

     रचना बी जैसा की आप सभी जानते है यह नाम नया है | लेकिन मेरे शहर में यह नाम पुराना  है रचना बी की उम्र लगभग ३० - ३२ के आस पास है | आज सुबह सुबह दूकान पर चढ़ गई राशन पानी लेकर (मतलब आटा चावल लेने ) |

     वैसे मेरा कभी उससे ज्यादा वास्ता नहीं पड़ा था, लेकिन मोहल्ले भर के लोग कहते थे रचना बी पढ़ी लिखी बेवकूफ है | एक तो पढ़ी लिखी ऊपर से बेवकूफ यानी करेला और नीम पर चढा हुआ | मै इस प्रकार के लोगो से हमेशा बचा करता हूँ | मेरे पिताजी हमेशा कहा करते थे बेवकूफ को टका दे दो लेकिन अकल मत दो | मैने भी रचना बी को ज्यादातर ना नुकर से टरकाया है | लेकिन आज तो हालात कुछ अलग थे दाल कुछ ज्यादा ही जला कर आयी थी | सो आते ही बोली आप अकेले ही काम कर कर रहे है दूकान पर | मै ने कहा क्या करू , नौकर जितना काम ही नहीं है | क्यों आप अपनी घरवाली को क्यों नहीं रखते है ? आजकल घरवाली को परदे में रखना गैर कानूनी है| उन्हें समानता का अधिकार देना चाहिए | मै आप की महिला आयोग में शिकायत करूंगी रचना बी ने धुवा उड़ाते हुए कहा | रचना बी जब भी गुस्से में होती है , तो उनके कान में से धुवा निकलता रहता है | क्या कहते, हमें भी नियम कानून का कंहा पता है जो रचना बी से पंगा ले सकते | क़ानून की जानकारी तो दिवेदी जी को है|

      वैसे भी ताऊ ने कह रखा है बच्चे,ब्रह्मण ,गाय,जल,अग्नि ओर नारी से पंगा नहीं लेना, वरना इज्जत का फ़ालूदा बनते देर नहीं लगेगी | हमने भी रचना बी की बात मानते हुए अपनी अनपढ़ घरवाली को दूकान में रखने लग गए | वो भी साथ साथ काम करके सहयोग करने लगी |

    कुछ दिन बाद फिर अचानक रचना बी के दर्शन हुए , घरवाली को देखते ही कहा अरे ! आप घरवाली से काम करवाते है | आपको शर्म नहीं आती | औरतों पर अत्याचार करते हुए, घर का काम भी करे और आपकी दूकान का भी, यह तो नारी जाती पर अन्याय है आपकी शिकायत कोइ जागरूक महिला बलोगर से करनी पड़ेगी मै आपको ब्लॉग जगत में बदनाम करके रहूंगी | सूना है आपने भी ब्लॉग जैसा रोग पाल के रखा है | आपके इस दूकान में कम्प्यूटर भी नजर आ रहा है | आप जानते नहीं है मेरे सम्बन्ध बहुत ऊपर तक है | पूरा मोहल्ला मेरे नाम (आतंक ) से सलाम करता है | मेरे पसीने छूटने लगे आमिरखान  का आल इज वैल भी कुछ काम नहीं आया | मैने कहा रचना बी आप अभी तो घर जाइए आपकी दाल जल जायेगी जो आप चूल्हे पर चढ़ा कर आयी थी और टीवी पर आपके पसंदीदा कोमेडीयन अलबेला खत्री का प्रोग्राम  भी निकल जाएगा |
जैसे तैसे मैंने रचना बी से पीछा छुड़ाया लेकिन अब लगता है संगीता जी के ज्योतिष का सहारा लेकर देखना पडेगा की ये साढ़े साती है या ढया है|  जन्म कुण्डली के कोनसे भाव में क्या बैठा है पता ही नहीं चल रहा है | या सुबह सुबह कही शीशे में अपना ही चेहरा तो नहीं देख लिया ? क्या पता भगवान जाने क्या होने वाला है | आल इज वैल...... आल इज वैल.... आल इज वैल.....|
(नोट :-उपरोक्त पोस्ट का किसी भी जीवीत या मृत आदमी से कोइ सम्बन्ध नहीं है फिर भी अगर कोइ सम्बन्ध जोड़ना चाहे तो ये उसकी मर्जी है  )

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