बलोग जगत के सितारे ताऊ राम पुरिया जी ने एक इस प्रकार की पोस्ट लिखी की मुझे भी इस श्रृखंला को आगे बढ़ाने की चाहत पैदा हो गयी | रही सही कसर श्री रतन सिंह जी ने पूरी कर दी उन्होंने भी यह गीत सुनने की इच्छा जाहिर की | मेरे पास यह गीत उपलब्ध तो नही था लेकिन थोड़ा इधर उधर खंगालने पर आख़िर यू ट्यूब पर यह गीत मिल ही गया | तो आप भी इस गीत का आनन्द ले |,और इसके अपलोडर को धन्यवाद दे |
भाई आपने यह बहुत बढिया काम किया है. आपको वहां पर अगर इसकी सीडी मिल जाये तो मुझे अवश्य भिजवाईयेगा. हमारे गांव के पास एक नाथों की ढणी थी, वहां से अर्जन नाथ और बोदूनाथ नामके दो भाई हमारे गांव मे अपना इकतारा लेकर आया करते थे. एक भाई का इस पर नाचना और दुसरे का गाना..बस ये समझ लिजिये कि इससे बडा कोई संगीत नही सुना. अब वहां जाना नही होता..तो कोशीश किजियेगा की आपके गांव के आसपास ही कोई मिल जाये तो आप इसे रिकाड अव्श्य कर लिजियेगा.
ReplyDeleteरामराम.
यह संगीत ढूंढने व प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद ! दरअसल मुझे पता था यह गीत नेट पर नहीं भी होता तो बगड़ या चिडावा में केसेट की दुकान पर इसकी सी डी आपको अवस्य मिल जाती | गांवों में घुमने वाले भोपा भोपी भी इस गीत को बहुत बढ़िया गाते है कभी मौका लगे तो रिकोर्ड कर लेना | मैंने तो यह गीत http://convert.playtube.com/ वेब साईट की मदद से एम् पी थ्री फोर्मेट में डाउनलोड कर लिया है | भगीरथ जी के दोहे जब भी पढो हर बार नया मजा आता है |
ReplyDeletebahut sundr geet hai ,prastut krne ke liye dhnyavaad.
ReplyDeleteइस गीत को mp3 फोर्मेट में डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर जाएँ
ReplyDeletehttp://www.quickfilepost.com/download.do?get=13ca172ea3c03baa2bd2c55245a37bd5
राठोर साहब बहुत अच्छा लगा कुछ कुछ समझ मै आता है, लेकिन भाषा अपनी सी लगती है.
ReplyDeleteधन्यवाद
behad sunder geet
ReplyDeleteहाँ जी वाक़ै यह बढ़िया रहा
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गुलाबी कोंपलें · चाँद, बादल और शाम
बहुत खूब.. बचपन से यह गीत कानों में पड़ता रहा, लेकिन भागमभाग की जिंदगी में जैसे कहीं खो गया.. आपने एक बार फिर इसे जीवंत कर पेश किया.. आभार
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