गुजरात का नाम लेते ही आँखों में गांधी जी की तस्वीर और में नरेन्द्र मोदी की शख़्सियत घूमने लगती है| लेकिन यह जो जहरीली शराब काण्ड है, उससे गुजरात की एक अलग तस्वीर उभर कर सामने आयी है | जहा बहुत सालो से ड्राई ज़ोन घोषित कीया हुआ था वहा इतनी मात्रा में शराब पकड़े जाने से समूचा देश इस ख़बर से हैरत में है |
मै पहले कुछ समय गुजरात के सूरत शहर में रह चुका हूँ इस लिए वहा की स्थानीय सामाजिक स्थितियों से अच्छी तरह से वाकिफ हूँ | कहने को वहा शराब बंदी है लेकिन शाम के समय अगर आप मजदूरों की बस्ती में जाकर देखे
तो केवल दो तीन चीजों के अच्छे खासे व्यापारी मिल जायेंगे | जैसे शराब गोस्त आदि सड़क के दोनों किनारों पर २० लीटर की जरीकेन भरी हुई रखते है ,कुछ विक्रेता पाउच में भरी हुई बेचते है | यह सब चलता है प्रशासन की देखरेख में और प्रशासन की नाक के नीचे | पुरानी जगह जहा मै काम करता था वहा आफिस का एक साथी था । उससे थोड़ी घनिष्ठता हो गयी थी । उसने मुझे बताया कि वह भी अपने परिवार के साथ शराब के धन्धे मे काफी दिनों से लगा हुआ है । जब मै एक दिन उसके घर उससे मिलने गया तो वहा का वातावरण जैसा कि मैने ऊपर बताया हुआ है ठीक वैसा हे मैने पाया । उसके घर के बाहर मैने एक पोलिस के डंडे को खड़ा किया हुआ देखा जब उस दोस्त से इसका कारण पूछा तो उसने मुझे बताया कि इसे देख कर पुलिस वाले दूर से ही समझ जाते है कि यहाँ का हफ्ता पुलिस स्टेशन मे पहुच रहा है । इस लिये वो ज्यादा तंग नही करते है नये पुलिस वाले को जब पता नही रहता है तो वह केवल इतना कोड वर्ड मे पूछना है कि " आ डण्डो कैया साहेब नो छे " मतलब कि यह डण्डा किस साहब का है जवाब मे जिस साहब को हफ्ता दिया जाता है उसका नाम बता देने पर वह वहा से चला जाता है । यह है गुजरात की परिपाटी जो शराब माफिया द्वारा चलायी जाती है।
Friday 10 July 2009
गुजरात की पोटली रामायण
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6 टिप्पणियाँ:
ठीक कहा आपने ....हमने वहां जिंदगी के दस साल गुजारे है ओर कई बार गोलवाड़ की इन मिलावटी शराबो को चखा भी है
वाह आज मालूम पडा कि कानून से बडा साहिब का डंडा है.धन्यवाद आप का
आप सही कह रहे है हमारे भी कई मित्र सूरत और अहमदाबाद जाते रहते है वे भी वहां शराब मिलने की बात अक्सर करते है |
सूरत में राजस्थान बॉर्डर से भी ट्रक के ट्रक भर कर शराब गुजरात जाती है और ये सब तस्करी पुलिस को हफ्ता देकर बड़े मजे से चलती रहती है |
बहुत अच्छा लेख है
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श्री युक्तेश्वर गिरि के चार युग
मेरे विचार से किसी एक प्रदेश में शराबबन्दी के बजाय यदि सारे भारतवर्ष में एक साथ इसे लागू किया जाए तो ही समाज से इस बुराई को समाप्त किया जा सकता है। वर्ना कुछ होने वाला नहीं है। पुलिस और तस्करों की मिलीभगत से ये धन्धा यूँ ही चलता रहेगा।
विश्वमे जहा जहा दारुबंदी की नीति सरकारों ने अपनाई है वहा वहा वही हुआ है जो आज गुजरात मे हो रहा है । एक तरफ तो प्रोहीबीशन खत्म होना चाहिये वही Alcoholics Anonymous जैसी विश्वव्यापी संस्था की मदत ली जानी चाहिये। ए ए के सभासद अपने खुद के अनुभव बता कर उस व्यक्ति को मदत करते है जो शराब से दूर रहना चाहते है।
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