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Saturday, February 21, 2015

राजस्थान के लोक देवता कल्ला जी राठौड़

कल्ला जी का जन्म विक्रमी संवत १६०१ को दुर्गाष्टमी को मेडता में हुआ . मेडता रियासत के राव जयमल के छोटे भाई आस सिंह के पुत्र थे | बचपन मेडता में& ही बीता | कल्ला जी अपनी कुल देवी नागणेचीजी के बड़े भक्त थे| उनकी आराधना करते हुए योगाभ्यास भी किया | इसी के साथ ओषधि विज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर वे कुशल चिकित्सक भी हो गए थे | उनके गुरू प्रसिद्ध योगी भैरव नाथ थे |



कल्ला जी राठौड़

उनकी मूर्ति के चार हाथ होते है | इसके बारे में कहा जाता है कि सन १५६८ में अकबर की सेना ने चितौड़ पर आक्रमण कर दिया था | किले की रसद ख़त्म हो गयी थी | सेनापति जयमल राठौड़ ने केसरिया बाना पहन कर शाके का व क्षत्राणियों ने जौहर का फैसला किया किले का दरवाजा खोल कर चितौड़ी सेना मुगलों पर टूट पडी |
सेनापति जयमल राठौड़ के पैरो में गोली लगने से वे घायल हो गए थे | उनकी युध्द करने की बड़ी तीव्र इच्छा थी | किन्तु उठा नहीं जा रहा था | कल्ला जी राठौड़ से उनकी ये हालत देखी नहीं गयी | उन्होंने जयमल को अपने कंधो पर बैठा लिया व उनके दोनों हाथों में तलवार दे दी और स्वयं भी दोनों हाथों में तलवार ले ली | और दुशमनो पर टूट पड़े | जिधर से भे वे गुजरते दुश्मनों की लाशो का ढेर लग जाता | हाथी पर चढ़े हुए अकबर ने यह नजारा देख तो चकरा गया | उसने भारत के देवी दवताओ के चमत्कारों के बारे में सुन रखा था या खुदा ये भी दो सिर और चार हाथो वाला कोइ देव है क्या उसने मन में सोचा |
काफी देर वीरता पूर्वक युध करने पर कल्लाजी व जयमल जी काफी थक गए मौक़ा देख कर कल्ला जी ने चाचाजी को नीचे जमीन पर उतारा और दवा दारू करने लग गए | तभी एक सैनिक ने पीछे से वार कर उनका मस्तक काट दिया | फिर भी बहुत देर तक मस्तक विहीन धड मुगलों से लड़ता रहा |
उनके इस पराक्रम के कारण वे राजस्थान के लोक जन में चार हाथ वाले देवता के रूप में प्रसिद्घ हो गए | आज पूरे मेवाड़ ,पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा उत्तरी गुजरात के गांवों में उनके मंदिर बने हुए है और मान्यता है | चितौड़ में जिस स्थान पर उनका बलिदान हुआ वंहा भैरो पोल पर एक छतरी बनी हुयी है | वहां हर साल आश्विन शुक्ला नवमी को एक विशाल मेले का आयोजन होता है |
कल्ला जी को शेषनाग के अवतार के रूप में पूजा जाता है |

6 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (22-02-2015) को "अधर में अटका " (चर्चा अंक-1897) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ज्ञानवर्धक पोस्ट के लिए धन्यवाद.

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  3. नयी जानकारी और लोकदेवता कल्ला जी राठौड़ जी बारे में जानने को मिला.... आपका धन्यवाद...
    मेरे ब्लॉग पर आप सभी लोगो का हार्दिक स्वागत है.

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  4. ज्ञानवर्धक पोस्ट

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  5. Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us.. Happy Independence Day 2015, Latest Government Jobs.
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