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Thursday, June 24, 2010

बहुत काम की है ये रेगिस्तानी छिपकली -गोह

रेगिस्तान में विभिन्न तरह के जीव जंतु पाए जाते है | जिसमें छिपकली वर्ग में एक बड़ी छिपकली जो जहरीली भी होती है इसे गोह कहा जाता है पायी जाती है | इसको स्थानीय भाषा में कई नामों से पुकारा जाता है , जैसे घेरा ,घ्योरा ,गोह ,गोयरो आदि |

यह ज्यादातर ठंडी जगह में पाया जाता है | जैसे खेजडी  के पेड़ में या नम भूमी में बिल बना कर | सांप अपना बिल नहीं बनाता है लेकिन इसके पंजे होते है जिनसे यह अपना बिल बना भी लेता है | यह कीट मकोड़े को खाकर पेट भरता है |
यह चित्र गूगल से लिया गया है किसी को  कोइ आपत्ति हो तो बताये हटा दिया जाएगा 
इसकी दो ख़ासियत है जो मै आपको बताता हूँ पहली है इसकी मजबूत पकड | यह अगर अपने पंजे से किसी चीज को पकड ले तो एक साथ दो आदमी भी मिलकर छुडाना चाहे तो नहीं छुडा सकते है | इस की इसी ख़ासियत की वजह से इसे पुराने समय में युद्ध के समय दुश्मन के किले पर ऊँची दीवार पर चढ़ने में इसे काम में लेते थे  | इसकी कमर पर एक मजबूत रस्सी बांध दी जाती थी | फिर इसे दीवार पर छोड़ दिया जाता था | जब यह दीवार के शीर्ष पर पहुच जाता था तब उसी रस्सी के सहारे सैनिक  चढ़ जाते थे |  इस प्रकार का एक दृश्य वीर शिवाजी फिल्म में भी दिखाया गया है |

दूसरी ख़ासियत है इसकी मजबूत शारीरिक संरचना इससे यह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी ज़िंदा रह  सकता है | इसकी चमड़ी भी बहुत मजबूत होती है | जिससे राजस्थान  की घुमंतू  जाती (कालबेलिया,बिन्जारा , भील ,बावरिया ) के लोग इसकी चमड़ी से जुतिया बनवाते है | जो बहुत ही टिकाऊ होती है | एक मिथक भी है की बरसात  के दिनों में इसके ऊपर  बिजली गिरने का खतरा अधिक रहता है |  लोग इसे जूती बनाने के   लिए नहीं मारे, इसलिए शायद कहा गया होगा | इसमें कितनी सच्चाई है यह तो विशेषज्ञ ही बता सकते है |


काली पहाड़ी ग्राम में जमुवाय माता के मन्दिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
वो बूढी जाटणी दादी
प्रिय दोस्त लक्ष्मी कंहा हो तुम ?

Monday, June 21, 2010

ये अनुनाद सिंह कौन है ?

ये अनुनाद सिंह कौन है ? हिन्दी के ब्लॉग जगत में ये प्रश्न कभी सामने आया है ? शायद नहीं ना ,क्यों ? इसका जवाब सीधा सा है या तो आप जानना नहीं चाहते या आप जानते है | लेकिन कुछ ऐसे भी लोग है जो इन दोनों ही जवाब से अलग राय रखते है | मेरी तरह यानी की जानते भी है ओर अधिक जानना भी चाहते है |
जब हिन्दी ब्लॉग जगत अपनी तकनीकी परेशानियों से जूझ रहा था तब कुछ ब्लोगरो ने इसके उद्धार हेतु बड़ा परिश्रम किया | तब तरह तरह की परेशानिया थी | ब्लॉग एग्रीगेटर ,ब्लॉग फॉण्ट , ब्लॉग टेम्पलेट की कमी ,यूनीकोड फॉण्ट की कमी ,हिन्दी साहित्य के प्रचार प्रसार का न होना आदि परेशानिया थी | जिन ब्लोगरो ने उस समय हिन्दी को कंप्यूटर पर व्यवस्थित रूप से लाने का कार्य किया उनमे एक नाम अनुनाद सिंह जी का भी है |
यह बात जुदा है की इसकी  चर्चा बहुत ही कम जगह की गयी है जिसके दो कारण है पहला अनुनाद सिंह जी का प्रचार प्रसार व अन्य सामाजिक सर्किल से दूर रहना | दूसरा इस प्रकार के कार्य करने वाले ब्लोगरो को यहां बहुत जल्दी भुला दिया जाना भी है | अगर ये ब्लोगर नहीं होते तो क्या हिंदी  ब्लॉग जगत आज इतना सुदृढ़  रूप में खड़ा होता  शायद नहीं | आज  हिन्दी के ब्लोगरो की संख्या  बढ़ती जा रही है उसी अनुपात में पाठको की संख्या भी बढ़ रही है | यह सब सम्भव हुआ है उन ब्लोगरो की बदौलत जिन्होंने हिन्दी को इंटरनेट ओर कम्प्यूटर के प्रारूप में ढाला ओर निरंतर आज भी बिना किसी  प्रचार  के नींव के पत्थर की तरह योगदान दिए जा रहे है |
मेरी कोशिश रहेगी की मै अगली पोस्ट में उन सभी लोगो को आपके सामने लाऊ जिन्होंने हिन्दी भाषा को इंटरनेट पर प्रचारित करने में योगदान दिया हो | आप इस बारे में मेरी मदद करे टिप्पणी के तौर पर या सीधे मेल करे ताकी मै किसी का नाम लिखने से वंचित ना रहू |
अनुनाद सिंह जी के ब्लॉग
प्रतिभास
अनागत विधाता
भारत का वैज्ञानिक चिन्तन
भारत का इतिहास
नवाचार दर्पण
हिन्दी विश्वकोश प्रतिविम्ब

अगर आप इन ब्लोगों पर एक बार घूम कर आयेंगे तो आपको पता चलेगा की ये पोस्ट मैने क्यों लिखी है |

शायद आप इन्हें भी पढ़ना पसंद करे
राजस्थान के लोक देवता कल्ला जी राठौड़
वो बूढी जाटणी दादी
प्रिय दोस्त लक्ष्मी कंहा हो तुम ?

Thursday, June 10, 2010

बीवी की या टीवी की दे दना दन


मुझे किसी की भी बुराई करने में बड़ी मुश्किल होती है | लेकिन जब दिल में ज्यादा हलचल मचती है तो आपके साथ शेयर करने को मन करता है और अंगुली अपने आप खिट पिट करने लग जाती है | हुआ यूं की अभी अभी मैने अपने पी सी में टीवी को ओन किया क्यों की अभी इंटरनेट का कनेक्शन ठीक से काम नहीं कर रहा था | सोचा चलो थोड़ा देश दुनिया का हाल चाल ही जान लू | टी वी पर खबरों की जगह औरतों का महाभारत आ रहा था | एक औरत कभी अपनी नवी नवेली सौत को तो कभी अपने पती को पीट रही है | दूसरे एक दृश्य में एक मोहतरमा अपने पती को गैर औरत के साथ रंगरलिया मनाते रंगे हाथ पकड़ने पर कैमरे के सामने अपने पति परमेश्वर और उनकी महबूबा की जूतियों से पिटाई कर रही है | किसी दृश्य में लव गुरू प्रो.बटुकनाथ का मुंह काला किया जा रहा है | ऐंकर महोदय उछल उछल मजे से कमेंटरी कर रहे थे | उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे दर्शकों से ज्यादा उन्हें मजा आ रहा हो | जब मै छोटा बच्चा था तब रोड पर मजमा लगाने वाले जादूगर के पास एक नेवला रहता था और वो बार बार सांप और नेवले की लडाई दिखलाने का वायदा कर के भीड़ जुटाता रहता था वो बेचारा पेट पालने के लिए वातावरण में सन सनी पैदा करता था लेकिन मीडिया जगत जो देश की पीढी को दिशा देने का महत्वपूर्ण काम करता है वो इस प्रकार औरतों की लडाई कमेंटरी के साथ दिखाए तो कैसा लगता है |आज सभी टीवी चैनल टी आर पी की की दोड़ में आगे आना चाहते है | इसके लिए उन्हें भले ही कितनी भी सन सनी क्यों ना फैलानी पड़े | समाज को गलत दिशा मिले तो भी उन्हें क्या फर्क पड़ता है | उन्हें तो अपनी जेब भरने से मतलब है | आज के दौर में एक मदारी और टीवी चैनल में क्या फर्क रह गया है | टिप्पणी के रूप में अपनी आपत्ति जरूर दर्ज करवाए |
किन्ही अपरिहार्य कारण से ये पोस्ट भारतीय परम्परा का पालन करते हुए २४ घंटे लेट है जिसके लिए खेद है |

शब्दों का सफर :प्रकांड, गैंडा और सरकंडा
ज्ञान दर्पण : चनाव प्रबंध , झगड़े और दलित उत्पीडन
राजपुत वर्ल्ड : राष्ट्रगौरव महाराणा प्रतापसिंह जयंती का प्रकट निमंत्रण