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Thursday, June 10, 2010

बीवी की या टीवी की दे दना दन


मुझे किसी की भी बुराई करने में बड़ी मुश्किल होती है | लेकिन जब दिल में ज्यादा हलचल मचती है तो आपके साथ शेयर करने को मन करता है और अंगुली अपने आप खिट पिट करने लग जाती है | हुआ यूं की अभी अभी मैने अपने पी सी में टीवी को ओन किया क्यों की अभी इंटरनेट का कनेक्शन ठीक से काम नहीं कर रहा था | सोचा चलो थोड़ा देश दुनिया का हाल चाल ही जान लू | टी वी पर खबरों की जगह औरतों का महाभारत आ रहा था | एक औरत कभी अपनी नवी नवेली सौत को तो कभी अपने पती को पीट रही है | दूसरे एक दृश्य में एक मोहतरमा अपने पती को गैर औरत के साथ रंगरलिया मनाते रंगे हाथ पकड़ने पर कैमरे के सामने अपने पति परमेश्वर और उनकी महबूबा की जूतियों से पिटाई कर रही है | किसी दृश्य में लव गुरू प्रो.बटुकनाथ का मुंह काला किया जा रहा है | ऐंकर महोदय उछल उछल मजे से कमेंटरी कर रहे थे | उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे दर्शकों से ज्यादा उन्हें मजा आ रहा हो | जब मै छोटा बच्चा था तब रोड पर मजमा लगाने वाले जादूगर के पास एक नेवला रहता था और वो बार बार सांप और नेवले की लडाई दिखलाने का वायदा कर के भीड़ जुटाता रहता था वो बेचारा पेट पालने के लिए वातावरण में सन सनी पैदा करता था लेकिन मीडिया जगत जो देश की पीढी को दिशा देने का महत्वपूर्ण काम करता है वो इस प्रकार औरतों की लडाई कमेंटरी के साथ दिखाए तो कैसा लगता है |आज सभी टीवी चैनल टी आर पी की की दोड़ में आगे आना चाहते है | इसके लिए उन्हें भले ही कितनी भी सन सनी क्यों ना फैलानी पड़े | समाज को गलत दिशा मिले तो भी उन्हें क्या फर्क पड़ता है | उन्हें तो अपनी जेब भरने से मतलब है | आज के दौर में एक मदारी और टीवी चैनल में क्या फर्क रह गया है | टिप्पणी के रूप में अपनी आपत्ति जरूर दर्ज करवाए |
किन्ही अपरिहार्य कारण से ये पोस्ट भारतीय परम्परा का पालन करते हुए २४ घंटे लेट है जिसके लिए खेद है |

शब्दों का सफर :प्रकांड, गैंडा और सरकंडा
ज्ञान दर्पण : चनाव प्रबंध , झगड़े और दलित उत्पीडन
राजपुत वर्ल्ड : राष्ट्रगौरव महाराणा प्रतापसिंह जयंती का प्रकट निमंत्रण



7 comments:

  1. ये टी वी चेनल भी तो नए ज़माने के मदारी ही तो है |
    मैं तो इन्हें इससे ज्यादा कुछ समझता ही नहीं |

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  2. बहुत बढ़िया रचना

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  3. wah ji yeh to ham miss kar diye the, aaj to maja hee a gaya, kya kahein, ha ha

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  4. जय माता जी की नरेश जी
    आप की रचना बहुत अच्छी है
    पर आज कल टी व़ी चेनल जो कुछ दिखा रहे है वो सब हर एक इन्सान के जीवन में किसिनाकिसी रूप में घटित जरुर होता है

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  5. भारतीय समाज का जितना बँटाधार इन चैनलों नें किया है, उतना तो शायद आधुनिक शिक्षा, फिल्मोद्योग और पश्चिमबुद्धि लोग मिलकर भी न कर पाए हों......

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  6. ye TV chenal wale khbro se jyda fhuhad pan dikhate hai or sirial to fir kya kahna orto ki cakalalas or gha todne ke pathsala hai.

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