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Saturday 22 August 2009

फायर फॉक्स के नए वर्ज़न में हिन्दी स्पेल चेकर(हिन्दी वर्तनी जाँचक) को सुसंगत करे

अभी कुछ दिन पहले मोजिल्ला ने फायर फॉक्स को अपडेट किया था उसमे नए वर्ज़न Mozilla/5.0 (Windows; U; Windows NT 5.1; en-US; rv:1.9.1.2) Gecko/20090729 Firefox/3.5.2 GTB5 में हिंदी के स्पेल चेकर (हिन्दी वर्तनी जांचक )को अपनाने से इनकार कर दिया | अब आप तो जानते ही है की मेरे जैसे अनाड़ी आदमी को जिसने कभी भी हिन्दी सही नहीं लिखी हो उसे कितनी परेशानी हो सकती है | यह स्पेल चेकर भी पुराने समय में रवि रतलामी जी ने सुझाया था रवि जी का ब्लोगिंग में हिन्दी को तकनीकी रूप से विकसित करने में बहुत बड़ा योगदान है | जैसे ही यह समस्या मेरे सामने आयी मैंने दोबारा उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया | मेरी गुहार सुनकर उन्होंने फिर नया फार्मूला बताया | और कहा की इस प्रकार की परेशानी दूसरों को नहीं आये सो आप इस विषय पर एक पोस्ट ही लिख दो | अंधे को को क्या चाहिए दो आंखे | हमें तो पोस्ट लिखने का कोई न कोई बहाना चाहिए |



चित्र को बड़ी साइज में देखने के लिए उस पर चटका लगाए |































सबसे
पहले आप फायर फॉक्स की नयी विंडो खोले URL की जगह लिखे about: config इसके बाद जो पेज खुले उसमे खाली जगह पर राइट क्लिक करे | new ->boolean -> boolean value ( इस खाने में लिखे extensions.checkCompatibility ) और ओके कर दे | इसके बाद आप लिस्ट में देखेंगे की extensions.checkCompatibility वाली लाइन में उसकी value जो true उसे आप fals में बदल दे इस पद्धति से आपके सभी एड ओन सुसंगत बन जायेंगे । जब भी एड ओन्स नए वर्ज़न के साथ काम नहीं करे तो आप इस फार्मूले को आज़माए यह सो प्रतिशत आज़माया हुआ है | अंग्रेजी में आप इस के बारे में यहाँ से पढ़ सकते है | अगर समझ मे नही आ रहा हो तो आप टिप्पणी/मेल् द्वारा भी पूछ सकते है - -

Wednesday 19 August 2009

दरद दिसावर भाग -4(अंतिम ) ( dard disawar part 4 (last) wrote by Shri Bhagirath Singh Bhagya

नीचे लिखे हुये दोहे राजस्थानी भाषा मे हैँ नीचे अंत मे कुछ कठिन शब्दों के
हिन्दी अर्थ भी दिये है फिर भी किसी पाठक को
समझ मे नही आये तो वो
टिप्पणी के रूप मे या मेल द्वारा पूछ सकते है


सूका सूका खेतडा पण नैणा मै बाढ ।

घर मँ कोनी बाजरी ऊपर सूँ दो साढ ॥


जद सूँ पाकी बाजरी काचर मोठ समेत ।

दिन भर नापै चाव सूँ पटवारी जी खेत ॥


फिर फिर आवै बादळी घिर घिर आवै मेह ।

सर सर करती पून मँ थर थर कांपै देह ॥


होगी सोळा साल री बेटी करै बणाव ।

कद निपजैली टीबडी कद मांडूला ब्याव ॥


टूटी फूटी झूँपडी बरसै गरजै गाज ।

इण चौमासै रामजी दोराँ रहसी लाज ॥


टाबर टीकर मोकळाँ करजै री भरमार ।

राम रूखाळी राखजै थाँ सरणै घरबार ॥


निरधनियाँ नै धन मिल्यो रोजणख्याँ नै राग ।

राम बता कद जागसी परदेसी रा भाग ॥


उगतो पिणघट ऊपराँ सुणतो मिठी बात ।

गळी गुवाडी घूमतो चान्दो सारी रात ॥


ना पिणघट ना बावडी ना कोयल ना छाँव ।

तो भी चोखो सहर सूँ म्हारो आधो गांव ॥


सांझ ढळ्याँ नित जांवता देखै सारो गांव ।

पिरमा थारी लाडली पटवारी रै ठांव ॥


पैली उठती गौरडी पाछै उठती भोर ।

झांझर कै ही नीरती सगळा डांगर ढोर ॥


छैल सहर सूँ बावडै खरचै धोबा धोब ।

पडै गांव मै रात दिन पटवारी सा रोब ॥


जद मन तरस्यो गांव नै जद जद हुयो अधीर ।

दूहा रै मिस मांडदी परदेसी री पीर ॥


प्रीत आपरी अचपळी घणी करै कुचमाद ।

सुपना मै सामी रवै जाग्या आवै याद ॥


पाती लिख रियो गांव नै अपरंच ओ समचार ।

दुख पावुँ परदेस मँ जीवूँ हूँ मन मार ॥



राग रंग नी आवडै कींकर उपजै तान ।

घर मै कोनी बाजरी अर टूट्योडी छान ॥


घर दे घर रूजगार दे घर घर री दे साख ।

ना देवै तो सांवरा जीवण पाछो राख ॥


बिन हरियाळी रूंखडा घरघूल्या सा ठांव ।

’राही’ दीखै दूर सूँ थारो आधो गांव ॥


लेग्या तो हा गांव सूँ कंचन देही राज ।

पाछी ल्याया सहर सूँ खांसी कब्जी खाज ॥


गाय चराती छोरडयाँ जोबन सूँ अणजाण ।

देख ओपरा जा लूकै कर जांटी री आण ।।


जोध जुवानी बेलड्याँ मिलसी करयाँ बणाव ।

आखडजै मत पावणा पगडंड्या रै गांव ॥


के तडपासी बादळी के कोयल री कूक ।

पैली ही सूँ काळजो हुयो पड्यो दो टूक ॥


अजब पीर परदेस री म मर जीवै जीव ।

घर मै तरसै गोरडी परदेसाँ मै पीव ।।


ना आंचळ ना घूंघटो ना हीवडै मै लाज ।

घिरसत पाळै गोरडी रोटी पोवै राज ॥


घाटै रो घर दे दिये दुख दीजै अणचींत ।

मतना दीजे सांवरा परदेसी री प्रीत ॥


धान महाजन रै घराँ ढोर बिक्या बे दाम ।

करज पुराणो बाप रो कीयाँ चुकै राम ॥


बेटो तो परदेस मै घर बूढा मा बाप ।

दोनो पीढी दो जघाँ दुख भोगै चुपचाप ॥


ठाला बिन रूजगार कै ताना देता लोग ।

भरी न अब तक गांव सूँ मनस्या बळण जोग ॥


जद जासी परदेस तूँ हुसी जद बरबाद ।

दरद दिसावर ई कडया रोज करैलो याद ॥


कितरा ही दुहा लिखूँ अकथ रहीज्या भाव ।

परदेसी रो दरद तो है गूंगै रो भाव ॥

कठिन राजस्थानी शब्दो के हिन्दी अर्थ :-


जठै - जहां

पर पूठ = पीछे से

रूंखडा = पेड़

खळा = खलिहान

धोरा = टीला

बां खातर = उसके लिये

तज =त्याग

बिरथा = व्यर्थ

जूण = योनी

चौपड़= चौसर ( एक प्रकार का खेल )

ठीडै = जगह

ठुकरेश = राजपूती हेकडी

ठोड अर ठांयचै = जगह ठिकाना

हिरण्यां और कीरत्यां = एक प्रकार के तारे जो रात्री में समय देखने के काम आते है

पाण्डियो =पंडित

जजमान = यजमान

* बेलिया -साथी

* बध बध - आगे आकर

* ओळमा - उलाहना

*बाँथ- आलिंगन

*पैली - एक

*सायना -हम उमर

*सेज़ाँ - शयन करने की जगह

*गौरडी - गणगौर जैसी नायिका

* गेल -पिछला

*परणेत - पत्नी

*बेली- साथी

*लोगडा - आम आदमी

*घूमन - फिरना

*बेलिया- साथिया

*पीसां - पैसे

*सगळा -सभी

*कग्यो - कह गया

*मांड्या - लिखना

*कंवळै - दीवार पर

*मैडी - ऊंचा स्थान

*दोरा सोरा - जैसे तैसे किसी कार्य को करना

*गैला - पागल

*लाजां - लज्जा

*चीरडा - चिथड़े

* रात्यूं - रात भर

*फाग - एक प्रकार की ओढ़नी जो फाल्गुन में राजस्थानी औरते पहनती है

*सून्पी- सौंप दिया

* र्रैँतां थका - होने के बावजूद

*सूगली - गंदी

*डूंगरी - पहाडी

*कैडो - कैसा
*जिण रो - जिस का

पण - परंतु
कोनी- नही
सूँ- से
साढ- आषाढ (महिना)
मेह- बारिश
पून- हवा
सोळा- सोलह
निपजैली- पैदा होगी
टीबडी - छोटा खेत जिसमे एक छोटा टीला भी हो
मांडूला - शादी तय करूंगा
मोकळा - प्रयाप्त
करजै - कर्ज
रूखाळी - रखवाली
चान्दो - चन्द्र्मा ( नायक को दी गयी उपमा )
पिणघट - पनघट
ठांव - अड्डा
पिरमा- प्रेमा नाम का अपभ्रंश रूप
पीव - प्रेमी
घिरसत - गृहस्थी
घाटै - गरीबी
बिक्या- बिकना (विक्रय)
हुसी- होगा
जद- जब
अकथ- जो कहा न जा सके
सगळा - सब
नीरती - पशुधन को भोजन देना
डांगर ढोर - पशुधन
बावडै - वापिस आना
मिस- बहाना करना
मांडदी - लिख दी
अचपळी - नटखट
घणी - ज्यादा
कुचमाद - बदमाशी
रवै - रहना
जाग्या - जागना
आवै - आना
आवडै - पसन्द आना
कींकर - कैसे
छान - फूस की छत
घरघूल्या - घरौन्दे
पाछी - वापस
लेग्या- लेकर जाना
ओपरा - पराया
लूकै - छिपना
जांटी - खेजडी ( राजस्थानी वृक्ष )
आण - ओट मे , सोगन्ध
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Sunday 16 August 2009

भुवन तो आया मगर लगान जैसा मजा नही आया

हम सभी के लिये बहुत खुशी की बात है कि हमारे देश द्वारा निर्मित बहुत प्रतीक्षित सॉफ्टवेयर भुवन अब जारी हो गया है इसके बारे मे कहा गया था कि यह गूगल अर्थ से भी एक कदम आगे होगा । क्यो की इसमे जो फोटोग्राफ्स काम में लिए गए है वो नए है | गूगल एक ऐसी कम्पनी है जिसे टक्कर देना काफी चुनौती पूर्ण काम है । भुवन के लाँच होने के बाद हम लोग अपने देश व अपने लोगों पर गर्व कर सकते है । इसको बनाने का सारा श्रेय इसरो( भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र ) को है इसका सॉफ्टवेयर एक विदेशी कम्पनी ने बनाया है ।






















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भुवन की एक विशेषता यह भी बताई गयी है कि यह गूगल अर्थ से भी ज्यादा साफ व स्पष्ट तस्वीरे दिखायेगा । यह बात बीटा वर्ज़न मे सही नही है ।






मैं ने इसे चला कर देखा है । इसका एक प्लग इन डाउन लोड करना पड़ता है जिसे आप इसकी साइट से रजिस्टर होने के बाद फ्री मे प्राप्त कर सकते है । आप स्क्रीन शॉट देख कर खुद ही समझ जायेंगे । हा एक बात और बता दू यह मोजिला फायर फॉक्स मे काम नही करता है इसे इंटर नेट एक्सप्लोरर मे ही चलाना पड़ता है । बीटा वर्ज़न मे है इस लिये यह बहुत धीमे चलता है । अभी इसमे डाटा बेस छोटा होने की वजह से प्लेस मारकिंग भी बहुत कम है । तस्वीरे स्पष्ट नही है केवल कोई पहाड़ी वगैरह ही ज्यादा स्पष्ट दिखायी देती है । अभी शैशव अवस्था मे है इस लिये यह गूगल अर्थ से पीछे है लेकिन आने वाले समय मे हो सकता है इसमे सुधार हो और यह गूगल अर्थ से भी आगे निकल जाये |