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Saturday, August 21, 2010

राजस्थानी भाषा में कुछ शब्द वाक्य जिन्हें बोलना त्याज्य है

यह पोस्ट राजस्थानी भाषा के ब्लॉग आपणी भाषा आपणी बात पर राजस्थानी में लिखी गयी पोस्ट का हिन्दी रूपांतर है | राजस्थानी भाषा में कुछ इस प्रकार के शब्द है जो दैनिक कार्यो से और जीवन यापन से जुड़े हुए है | उन शब्दों के सुसंस्कृत समानार्थक शब्द काम में लिए जाते है मूल शब्द को काम में नहीं लिया जाता है | मूल शब्द काम में लेने का मतलब है की हमारे अन्दर अच्छी सभ्यता और संस्कृति का अभाव है |
राजस्थानी भाषा में न से शुरू होने वाले नकार वाले भाव के शब्द काम में नहीं लिए जाते है | काटने ,मारने ,कम करने की क्रिया या  भाव वाले शब्दों से परहेज  किया जाता है |


हिन्दी  शब्द या वाक्य 

राजस्थानी में त्याज्य शब्द 

राजस्थानी में संस्कारित शब्द 
चुल्हा सुलगाना
आग बाळो

चूल्हों चेतन करो
दुकान बंद करना बंद करोदुकान बढ़ाना /मंगल करना
दीपक बुझाना  बुझावो  बडो करो 
पीटना  मारना  धोबा देवणो
नमक  लूण  मीठो 
पानी में विसर्जन  बुहावणो 
पधरावणो
जाना  जावणो पधारणो 
कंहा चले  कठै चाल्या  सिद्ध सारू 
१२ दिन का शोक  शौक बैठक
अस्थी संग्रह अस्थी चुगणो फूल चुगणो
सर्प दंश सांप काटणो  पान लागणो
सब्जी काटना काटणो  बन्दारणो /सुंवारणो
मृत्यु  उपरांत पगड़ी पगड़ी  पोतियो
शोक में बाल कटाना सुंवार करवाणो  भदर होवणो
दीर्घ शंका शौच जावणो  हाजत होणो
खाना खाना रोटी खाणो  जीमणो
जलपान नाश्ता  कलेवा
खाध सामग्री थाली में डालना  जीमावणो  पुरसणो



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22 comments:

  1. अरे वाह !!
    इन बातों पर तो कभी ध्यान ही नहिं गया।

    पानी पीजिए - पाणी पीओ - जल आरोगो

    शौच जाना - - जंगल जा न आऊं
    - लोटा ढोल'र आऊं(महिलाएं)

    और शौक सभा से विदा लेते को नहिं कहा जाता "आवजो"

    बडी सुन्दर जानकारी, आभार्।

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  2. बहुत अच्छी जानकारी प्रदान की है इसके लिए आपका आभार नरेश जी मगर मेरे को नमक को मीठा कहने वाली बात कुछ समझ में नहीं आई है।

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  3. बहुत उत्तम जानकारी का संग्रह छाप दिया आपने. हमें तो इन्हें प्रयोग मे लेते रहने की वजह से कभी ध्यान ही नही गया आज तक. बहुत आभार आपका.

    रामराम.

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  4. @Surendra Singh Bhamboo

    लूण ---> खारा
    नमक से नकारात्मक भाव जुड़ा हुआ है. जैसे जले पे नमक छिड़कना, नमक ढोल देना, खार खाना, खरी खरी सुनाना इत्यादि. इसीलिए इसे कहने से बचा जाता है.

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  5. आम बोल चाल की भाषा में त्याज्य शब्दों के बढ़िया पर्यायवाची शब्द सुझाएँ है आपने

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  6. जर आप री आ पोस्ट पढ़ी जर याद आयो कि इण टाइप रा तो घंणा वाक्य और भी होसी। अबार कित्ती देर सूं माथो खपाऊं हूं एक पण याद कोनी आ रह्या। जर याद आसी जण टिप्प्णी करवा आसूं।

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  7. बहुत सुन्दर जी. हमारे यहाँ "मै चलता हूँ या जा रहा हूँ नहीं कहा जाता. "तो फिर मै आता हूँ" कहा जाता हैं. सकारात्मकता अच्छी बात है. लेकिन कभी कभी परेशानी भी बन जाती है.बेलगाँव (कर्णाटक) जहाँ मराठी अधिक बोली जाती है, हमें बड़ी परेशानी हो गयी. होटल में खाना परोसने के बाद एक आदमी मीट मीट कहते हुए आया. हमने ध्यान नहीं दिया. बाद में हमें नमक की जरूरत पड़ी और माँगा भी.जवाब मिला की अभी अभी तो आदमी लेके आया था.

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  8. बहुत अच्‍छी जानकारी .. नकारात्‍मक बातों का प्रयोग गांववाले नहीं करना चाहते !!

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  9. मुजे तो यह पंजाबी के लगे जी, बहुत सुंदर बहुत सीधि साधी भाषा है बस बोलने मै ही फ़र्क है, पंजाबी मै ओर हरियाणवी मै भी कुछ ऎसे ही बोलते है. धन्यवाद

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    Replies
    1. punjabi aur haryanavi ke kafi sare shabd marwari se milte julte hai

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  10. सच है, कठोर से प्रतीत होने वाले शब्दों के प्रयोग से हम बच सकते हों, तो बचें। बड़ी ही सुसंस्कृत सभ्यता का उदाहरण।

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  11. इनमे से कुछ तो मेरे यहाँ भी हैं ..जैसे
    दुकान बढ़ाना,बडो करो(बडो),कलेवा,फूल चुगणो(फूल),पुरसणो(परोसना)
    साथ कुछ राजस्थानी शब्द जानकार बहुत अच्छा लगा |

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  12. बहुत अच्छी जानकारी दी है।

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  13. भाई नरेश सिंग जी, बात तो थ्हे चो्खी कही, पण राजस्थान माय भी बोली हजारां तरियां की बोली जावे। थारा झुंझणु की बोली और नारनौळ की बोली ज्यादा फ़रक कोणी। जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, जयपुर की बोलियां माय घणो ही फ़रक है।"लूण" नै तो मै पैली बर "मीठो" सुणयो है।
    म्हारे तो सीधी बोली ही बो्ली बोल्या करां। रोटी खा लई,कित जा सा, खाट खड़ी कर दिए,जितणा भी त्याज्य शबद लिख राख्या हैं अठे, म्हारे सारा ही ग्राह्य हैं। ईं नै ही चोखो समझै हैं। नही तो कह दियां करे"अरे यो तो बागड़ी सै"

    राम राम

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  14. बहुत अच्छी जानकारी दी इन शब्दों/वाक्यों के बारे में. आभार.

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  15. @भाई ललित जी ,
    कभी कभी हरियाणवी में जो कहा जाता है उस से उलटा राजस्थानी में कहा जाता है | जैसे उत् गया से को राजस्थानी में बिगड़े हुए व्यक्ति के बारे में कहा जाता है | उत् जाने का मतलब है कि उसका नैतिक पतन हो गया है |

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  16. नरेश जी और ललित जी....आप दोनों ही सही है. हरियाणा मे ये त्याज शब्द नही है बल्कि सुदसट्ट ही बोले जाते हैं..कोई लागलपेट नही रखी जाती. इसीलिये हरियाणवी अक्खड कहलाते हैं. यानि "कित गया"? का जवाब मिलेगा "ऊत गया".:)

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  17. सही जानकारी दी है आपने.

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  18. दिवाळी की राम राम

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  19. rajsthani sanskrti me bahut bate ha jiski jankari har aadmi ko nhi ha. es liye ye jankari sabhi kohoni jaruri ha.

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  20. अच्छी जानकारी है.

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  21. धन्यवाद के लिये राजस्थानी मे उपयुक्त शब्द बतायें..

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