कुछ लोग नास्तीकतावादी होते है। वो भूत प्रेत,देवी-देवता व टोने टोटके को महज अन्धविश्वास मानते है। उनके पास इसके लिये अपने ही तर्क होते है। इसके विपरीत कुछ लोग इसको इतना बढावा देते है की विज्ञान व टेक्नोलोजीकी उपलब्धीयां बेमानी लगती है ।
इस पोस्ट को लिखने की वजह आपको इन चीजो के बारे में जानकारी देना है। भूत प्रेतों के बहुत से रूप होते है जैसे जिन्न,शहीद,कच्चा कळवा(छोटे बच्चे की आत्मा),चुडै.ल,साधु महात्माकी दुष्ट आत्मा इत्यादि । मनुष्य के मरने के बाद में उसकी आत्मा को मोक्ष मिल जाता है तो वह नया शरीर धारणकर लेती है जिनको मोक्ष प्राप्ती नहीं होती वे संसार मे विचरण करती है। विचरण करने वाली आत्मायें दो प्रकार की होती है,अच्छी व बूरी । जिनके कार्य कलाप परेशान करने वाले होते है वो बूरी आत्मायें होती है, और जिनकाकार्य सहायता करना,घर परिवार में सुख शान्ती लाना होता है वे अच्छी आत्मा यानी देवात्मा होती है। शेखावाटी में लोग इन्हे पितर(पित्रस्य) कहते है। पहले हम बुरी आत्माओ के बारे मे बात करते है। इनका विचरण स्थल ५०-१०० कि०मी० से कम ही होता है। और ये सुनशान मकान जो बस्ती के नजदीक होते है उनमें रहते हैं। वह मन्दिरभी इनकी शरणस्थली होती है जिनमें रोजाना पूजा नहीं होती या जिनमें मूर्ती स्थापना बिना पूजा पाठ या गलतमन्त्रोच्चार के साथ हुई हो । इन आत्माओं का आवागमन प्राय: किसी माध्यम के द्वारा होता है । मीठा भोजन इनकी कमजोरी होती है । आप यह सोच रहे होगें कि किस घर या मन्दिर पर बुरी आत्मा का साया है यह कैसेपता चलेगा इसके लिये हमे इनकी कार्यप्रणाली जाननी होगी । वैसे आत्माओं का कोइ भौतीक अस्तीत्व नहीं होताहै । यह हमारे विचार,मानसिक स्थिती,आर्थिक हालत व स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। यदि आपकी आर्थिक हालतकमजोर हो रही है व शरीर को कोई एसा रोग लग गया है जिसके लक्ष्ण डोक्टर को समझ में नहीं आ रहे है,या फ़िर आपकी आय तीव्र गती से बढने लग गई हो साथ ही परिवार की सुख शान्ती बिना किसी वजह के नष्ट हो रही हो तो यह पक्का मानीये की आपके घर में या जिस मन्दिर में जहां आप जाते है वहां बूरी आत्मा कासाया है । आम आदमी के लिये यह जानना कि कहां व किस पर बूरी आत्मा का साया है,थोडा कठीन जरूर हैमगर असभंव नहीं है । चार पैर वाले जानवर यथा कुत्ता,बिल्ली,गाय,बकरी,भैंस आदि इनके प्रती संवेदनशील पायेगये है। इनको बूरी आत्माओं के आवागमन का आभाष मनुष्यों से पहले ही हो जाता है। देवात्मा व पित्रस्य हमारेपरिवार की आत्मायें होती है । वे सदैव परिवार का भला करती है, हमें उनकी शक्ती को बढाने का प्रयास करना चाहिये ताकी वे बूरी आत्माओं पर विजय पा सके ।
नरेश सिंह जी इन आत्माओं के बारे में तो में कुछ भी कहने की स्तिथि में नही हूँ हाँ पहले गावों में ये किस्से ज्यादा ही होते थे और ज्यदातर औरोतों में, लेकिन आजकल ये सुनने में कम ही मिलता है मेरा इन चीजों से एक ही बार वास्ता पड़ा है एक मित्र की बीबी में आत्मा आती थी मुझे भी उनके साथ कई जगह जाना पड़ा शुरू में लगा कि ये सब सही है लेकिन बाद में सिर्फ़ ड्रामा ही निकला इस ड्रामे में मेरे मित्र कम से कम ६ महीने परेशान रहे होंगे | फ़िर भी इन चीजों को एकदम से झुटलाया भी नही जा सकता |
ReplyDeleteभाई राठोड जी बहुत अच्छा लगा आपसे परिचय हुवा !
ReplyDeleteऔर मैंने अपने गाँव का नाम भी नक्शे पर देखा ! अभी
गाँव कम आना होता है पर अबकी बार जब भी आया आपके
और आपके गुरुजी के जरुर दर्शन करूंगा ! वैसे शायद आपके बगड़ के
एक मास्टरजी हमें हाईस्कूल में पढाया करते थे , ये करीब १९६८
की बात होगी ! नाम याद आयेगा तो आपको जरुर बताउंगा !
बहुत बढिया जानकारी आपने दी है ! धन्यवाद!
सुंदर जानकारी ! धन्यवाद ! और भी जानकारी दे तो अच्छा लगेगा !
ReplyDeleteएक बात जरूर बतायें की अगर सिस्टम में वायरस है। तो इस की मदद से ड्राइवर दुबारा डालने पर क्या वापस वायरस भी इन्सटाल हो जायेगा
ReplyDeleteनरेश जी यदि कंप्यूटर में वायरस है तो ड्राईवर डालने से पहले जिस फोल्डर में आपने ड्राईवर का बेकअप ले रखा है पहले उसे एंटी वायरस से स्कैन करा ले ताकि वायरस आने की सम्भावनाये ख़त्म हो जाए |
दीवाली की शुभकामनाये |
नरेश भाई, आपने मेरे ब्लॉग 'तस्लीम' पर 'तकनीक और ब्लॉग की दुनिया' पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा था कि मैं इस पोस्ट का लिंक अपने ब्लॉग पर देना चाहता हूं।
ReplyDeleteयह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको यह पोस्ट पसंद आई। आप इस पोस्ट का उल्लेख अपने ब्लॉग पर सहर्ष कर सकते हैं। यदि उसमें उक्त पोस्ट का हाइपर लिंक भी लगा देंगे, तो अच्छा रहेगा।
हौसलाअफजाई के लिए शुक्रिया।
नरेश भाई यहाँ मैं आप से सहमत नहीं हूँ। मैं भूत प्रेत देवी देवताओं में विश्वास नहीं करता। विश्वास करता हूँ तो सिर्फ ईश्वर में जो सभी का एक है और उसके अनेक रूप कदापि नहीं हो सकते। इसलिए अगर ईश्वर में आस्था है तो भला कौन सा भूत हमारा क्या बिग़ाड़ लेगा? प्रणाम।
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