Followers

Showing posts with label परिचय. Show all posts
Showing posts with label परिचय. Show all posts

Wednesday, June 1, 2011

80 वर्षीय ताऊजी .......गौशाला ..........दिल्ली की नौकरी ......स्वास्थ्य

       आज मै आपका परिचय अपने ताऊ जी से करवा रहा हूँ | ये हमारे बलोग जगत वाले ताऊ नहीं है इन्हें तो यह भी नहीं मालूम की ब्लॉग क्या होता है | लेकिन उनकी बहुत सी विशेषताओं पर मै प्रकाश डालूँगा | शायद आपके कुछ काम आ सके |

      हमारे दादा जी की सात सन्तान थी जिनमे पिताजी और ताऊ जी के रूप में दो लडके बाकी हमारी पांच बुआ जी | ताऊ जी दुसरे नंबर के है | इनका जन्म 1932 में हुआ था | उन्होंने हाई स्कूल गाँव के स्कूल से किया था | उस वक्त हाई स्कूल पास व्यक्ति कि बहुत कद्र की जाती थी | 1950 में वे भारतीय सेना में भर्ती हो गए | वंहा उन्होंने पांच साल काम किया उसके बाद परिवार वालो के दबाव में उन्होंने सेना की नौकरी छोड दिल्ली के संसद सचिवालय में नौकरी शुरू कि जिसमे बाबू की पोस्ट पर कार्य किया | वंहा पर विभिन्न विभागों में कार्य किया रिटायरमेंट के समय वे कपड़ा मंत्रालय में कार्य कर रहे थे | दिल्ली में नेताजी नगर के  बी ब्लॉक में रहते थे |

       आज उनकी उम्र अस्सी वर्ष के लगभग है लेकिन स्वास्थ्य उनका टकाटक है |घर से खेत की दूरी तीन किमी है वो भी बलुई मिट्टी वाला कच्चा रास्ता जिसपर चलने से आपकी दुगुनी ऊर्जा खर्च होती है | वे रोजाना दोनों समय खेत में जाते है वंहा अपना खेती बाडी का कार्य करते है| घर के समस्त कार्य स्वयं करते है | पानी भरना ,आटा  पिसवाना बाजार जाना ,इस प्रकार के समस्त कार्य हेतु वे किसी दुसरे पर निर्भर नहीं रहते है |

      उनकी दिनचर्या सुबह साढ़े चार बजे शुरू होती है | शौचादि के लिए भी वे दो किमी दूर खेत की तरफ जाते है जिससे उनकी सुबह की सैर भी हो जाती है |  सूर्य उदय के समय वे सूर्य नमस्कार व् अन्य योगा करते है | उसके बाद स्नान आदि करते है | एक घंटा भगवतगीता का पाठ करते है | उसके बाद भोजन करते है | भोजन भी ज्यादतर वे खुद बनाते है | या अपनी देख रेख में बनवाते है | आटा हमेसा मोटा पिसवाते है | उसे छलनी से छानने के बाद उसका निरक्षण किया जाता निरक्षण के बाद उस चोकर को वापस आटे  में डाल कर रोटी बनाई जाती है | भोजन भी बहुत सादा रहता है घी दूध दही आदी ही रहते है| दूध हमेशा गाय का ही लेते है भैस का दूध वे निकृष्ट समझते है  | सब्जी कम मसाले की होती है | दोपहर के आराम के बाद वे अपनी गौशाला की देख रेख करते है |

      उनकी गौशाला के बारे में हम हमेशा मजाक करते है | क्यों कि उन के पास जो भी गाय दूहने के लिए लाई जाती है वो ही थोड़े दिन बाद दूध देना बंद कर देती है | जिसका कारण उनका अपनी गायों के प्रती अगाध प्रेम है | उसे ज्यादा खिलाते पिलाते है और वो भी उतने  ही नखरे करती है | इस प्रकार उनके पास हमेशा ही चार पांच गाय रहती है | उनकी देख रेख वे स्वयम ही करते है |


ताऊ जी की गाये
आप चित्र में उनकी गायों को देख सकते है |

   





Sunday, April 24, 2011

चर्चा दो ब्लॉगों की

     आज मै आपको दो स्थानीय ब्लॉगों के बारे में बताने जा रहा हूँ | जिसमे से पहला ब्लॉग है माऊ -बाबो और दूसरा है  आवाज अपनी |

     दोनों ब्लॉगों में जो समानता है वो ये है की ये दोनों ही नयी पीढ़ी के ब्लॉगर है जो अभी अध्ययन कर रहे है | दोनों ही राजस्थान के है | दोनों ही कुंवारे है और दोनों में ही कुछ खासियत है जो मै आपके सामने ला रहा हूँ | मै नहीं चाहता की ये ब्लॉग प्रोत्साहन के अभाव में गुम हो जाए |

     माऊ बाबो ब्लॉग के ब्लॉगर है अंगद बारुपाल जी ,ये हनुमान गढ़ के गाँव रोंरावाली के रहने वाले है | अभी कोलेज में पढते है | मै यूही विचरण करते हुए इनके ब्लॉग पर पहुचा | इनके ब्लॉग पर चार पोस्ट अब तक लिखी गयी है | जिसमे इनकी सृजनशीलता की झलक मिलती है | राजस्थानी भाषा में लिखी गयी लघु पोस्ट और चित्रों का सुंदर उपयोग इनके लेखन को बहुत प्रभावशाली बनाता है | जो भी लिखा है उसमे लीक से हट कर लिखा है | मै तो इस ब्लॉग से बहुत प्रभावित हुआ हूँ | अगर आप भी राजस्थानी भाषा की थोड़ी बहुत समझ रखते है तो इस ब्लॉग से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते है |

     दूसरा ब्लॉग है आवाज अपनी जिसके ब्लॉगर है तरुण भारतीय | इन से मै आमने सामने भी मिल चुका हूँ ये हमारे गृह जिला झुंझुनू के गाँव गोविन्द पुरा के रहने वाले है | अभी इस वर्ष बी एड कर रहे है | समय समय पर इनकी वार्ता चुरू और जयपुर आकाशवाणी केन्द्र से प्रसारित होती है | इतनी कम उमर में लेखन के प्रती इन का  जज्बा काबिले तारीफ़ है | ये पतंजली योगपीठ की झुंझुनू इकाई में पदाधिकारी भी है | लोगो को योग सिखाते है |

    दोनों ब्लॉगर ऊर्जा से भरे हुए है मै इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ |

Thursday, December 16, 2010

इन्हें पहचानिये ये कौन है

           आप नीचे दिए गए चित्र को देखिये और बताइये की ये कौन है | ये दिल्ली में रहते है | ब्लोगर है ,इन्हें आप देखते है | इन्हें आप सुनते थे ,इनका लिखा पढते थे | इनकी पहुच आपके घर तक है | इस पहेली का दूसरा हिंट शाम तक दिया जाएगा | अगर फिर भी नहीं पहचान पाए तो फ़िकर करने की जरूरत नहीं है कल की पोस्ट में आप इनके बारे में विस्तार से जानेगे जो आपने शायद कही नहीं पढ़ा होगा |
बंटी चोर जी आप भी कोशिश कर सकते है |






6:00 PM अपडेट -:  ये साहब रोजाना शाम को टीवी के एक न्यूज चैनल पर दिखाई  देते है | पत्रकार है ,समाचार वाचक है ,समाचार विश्लेषक है | देश की राजनीतिक आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति पर खुल कर बोलते है , राष्ट्रीय स्तर के एक दैनिक समाचार पत्र में इन्होने काफी लंबे समय तक पत्रकार के रूप में काम किया है |रेडियो पर समाचार वाचन और उद्घोषक के रूप में कार्य किया है | दूरदर्शन में समाचार वाचक के रूप में काम किया है |
अगर जवाब नहीं सूझ रहा है तो कोइ बात नहीं है तब तक आप इन्हें पढ़ सकते है |

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर,         मालीगांव

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2-    ज्ञान दर्पण 

श्री राजपूत करणी सेना के शीर्ष सस्‍थांपक व कांग्रेसी नेता लोकेन्‍द्र सिंह कालवी ने निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता-    राजपूत वर्ल्ड 

एक ब्लागर सम्मेलन इधर भी-    ताऊ नामा 

 

 

 

Wednesday, November 17, 2010

अपने काम के प्रति समर्पित एक व्यक्तित्व - झुंझुनूं जिला कलेक्टर श्री मति मुग्धा सिन्हा

     आप सब सोच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है सभी लोग तो अपने काम के प्रती समर्पित होते है |मगर इस बलोग के पुराने पाठक तो इस बात को जानते है कि यहां उसी व्यक्ति के बारे में बात की जाती है जो अपने काम में कुछ विशेष हो, हां ये अलग बात है कि मै इस बार इस पोस्ट में एक सरकारी अधिकारी को ले रहा हूँ |सरकारी अधिकारियों के बारे में हमारी राय कुछ नकारात्मक ही रहती है | उनकी छवी हमारे मानस पटल पर भ्रष्टाचार और कामचोरी में संलिप्त की रहती है इस लिये सरकारी अधिकारी कभी भी इस ब्लॉग या यूं कहे कि हिन्दी बलोग में जगह नहीं बना पाए है |

     श्री मति मुग्धा सिन्हा के यहाँ झुंझुनू में पद भार ग्रहण करने के बाद यहां जो परिवर्तन आये है वो यहाँ कि कोइ भी अनपढ़ महिला भी अपने शब्दों में आशीष वचनों के साथ बयाँ कर देगी | इससे ज्यादा उन की सफलता के बारे में क्या कहा जा सकता है | किसी भी सरकारी अधिकारी के कार्यों का सकारात्मक परिणाम आपके घर रसोई या गली कूचो में दिखाई दे तो उसे आप क्या कहना चाहेंगे |


     मै काफी समय से यही सोच रहा था कि ये पोस्ट लिखू या ना लिखू अगर ना लिखू तो अपने दायित्वों से मुँह मोडना हो जाता है ,अगर लिखता हूँ तो एक सरकारी अफसर का फेवर करने का आरोपी बनता हूँ | आखिर में इस मानसिक द्वन्द में जीत एक बलोगर के नैतिक दायित्व की ही हुई है | परिणाम स्वरूप ये पोस्ट आपके सामने है |

     झुंझुनू आते ही उनहोने पहला काम ,साफ़ सफाई का हाथ में लिया | ज्यादातर अधिकारियों को सफाई के सर्वे में साफ़ सुथरी मुख्य सड़के दिखाई जाती है ,लेकिन यह बात उन्हें पता थी इस लिये उन होने सर्व प्रथम उस जगह का दौरा किया जो शहर की सबसे गंदी जगह (शहीद चौक ,सब्जी मंडी के पास) का दौरा किया और स्थानीय परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों को कहा कि इससे गंदा शहर मेंने अपने कार्यकाल में नहीं देखा है |
 
     गैस एजेंसी की काला बाजारी रोकने के लिये इस प्रकार का आदेश जारी किया कि आज कुकिंग गैस सप्लाई वाला घर घर जाकर बिना बुकिंग किये ही डिलीवरी देता है| वरना हालात रोजाना चक्का जाम और सर फूटोव्वल के रहते थे |


     सडको पर इतना अतिक्रमण था कि एक साथ दो गाड़ी तो दूर की बात है एक गाड़ी को निकालने में भी परेशानी का अनुभव होता था | उनके आने के बाद में नाजायज खड़े रेहड़ी वालो को हटा दिया गया है | दुकानदारों को ताकीद की गयी है कि सामान दूकान के बाहर ना रखे ताकी वाहनों के आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी ना हो | जो सड़के आठ फुट चौड़ी दिखती थी वो आजकल बीस फुट चौड़ी नजर आने लग गयी है |

     यंहा के सरकारी विभागों में काफी दिनों से मीटिंग का कलेंडर नहीं बना हुआ था जिसे अब इन्होने लागू किया है| यानी कि सभी कर्मचारियों को पहले से पता रहता है कि मीटिंग कब होगी | जो भी मीटिंग देर तक चलने की संभावना रहती है उसे शनिवार और रविवार को रखा जाता है | ताकी जन  साधारण का कोइ भी काम नहीं रुके | उन के बारे में एक बात और भी मशहूर है कि उनका फोन व्यस्त होने पर अगर आपकी मिसक़ाल उन्हें मिलती है तो उनका फोन आपके पास जरूर आएगा  आपको दुबारा फोन नहीं करना पड़ता है |


श्री मति मुग्धा सिन्हा जी के पुराने कार्यकाल में हनुमान गढ़ जिले में भी बहुत उल्लेखनीय कार्य हुए है जिनकी जानकारी हमारे एक मित्र (श्री ओम पुरोहित 'कागद ')जो लेखक भी है और ब्लोगर भी है ,ने भिजवाई थी | जिसे मै संक्षेप में लिख रहा हूँ |उन्होंने बताया कि हनुमान गढ़ में पहली बार वरिष्ठ पेंशनरों को इन्होने सम्मानित किया |वंहा भी सफाई के अनेक कार्य योजनाबद्ध तरीके से किये गए | गरीबो एवं असहायो हेतु उन्होंने सारथी योजना  बनाई | इसमें शहर के धनी लोगो को  प्रेरित कर जरूरतमंद लोगों की सहायता करवाई गई | चित्र कला में इनकी विशेष रूची होने की वजह से इन्होंने इस कला के प्रोत्साहन हेतु  बहुत सराहनीय कार्य किया है | और स्वयं भी एक बहुत अच्छी चित्रकार हैं |
 
     मै जब इस पोस्ट में उनके कार्य शैली के बारे में लिखने हेतु उनसे जानकारी चाही तो मुझे साफ़ मना कर दिया गया | क्यों कि उनके बारे में सूचना मिली थी कि वो प्रचार प्रसार से हमेशा बचती रही है | फिर भी मुझे उनके बारे में जो जानकारी नेट कि दुनिया में मिली है वो इस प्रकार है |

नाम -श्रीमती मुग्धा सिन्हा

जनम तिथि -04/06/1974

शहर -आगरा

शिक्षा - बी. ए. (हिस्टरी ) एम. ए.(अन्तराष्ट्रीय समबन्ध )

एम. फिल.(अन्तराष्ट्रीय कूटनीति )

वर्तमान कार्य स्थल -जिला कलेक्टर झुंझुनूं (राज.)
 


S.N.POST HELD BY SMT.MUGHDHA SINHAFROMETO
1COLLECTOR &DISTRICT MAGISTRATE, JHUNJHUNU 06/09/2010--
2REGISTRAR, BOARD OF REVENUE, RAJASTHAN, AJMER 06/01/200903/09/2010
3COLLECTOR & DISTRICT MAGISTRATE, HANUMANGARH 30/4/200703/01/2009

4
COLLECTOR & DISTRICT MAGISTRATE, BUNDI 15/06/200528/04/2007
5DEPUTY SECRETARY TO CHIEF MINISTER, RAJASTHAN, JAIPUR 15/12/200315/06/2005
6ADD. COLLECTOR & ADD. DISTRICT MEGISTRATE, JAIPUR-I 30/05/200315/12/2003
7SUB-DIVISIONAL OFFICER, AJMER13/08/200129/05/2003
8UNDER IInd PHASE TRAINING AT LBSNAA, MUSSOORIE25/06/200104/08/2001
9ASSST. COLLECTOR & EXE. MAGISTRATE (UNDER TRAINING), UDAIPUR 20/07/2000----

अन्य पोस्ट
शेखावाटी की पहली महिला बलोग्गर 
शेखावाटी की पहली हिन्दी वेबसाइट 
शेखावाटी क्षेत्र के हिन्दी बल्लोग्गर ( परिचय )

Wednesday, November 10, 2010

शेखावाटी की पहली महिला ब्लोग्गर : डॉ.मोनिका शर्मा

पिछली पोस्ट में मैंने आपका परिचय शेखावाटी के हिन्दी बलोगरो से संक्षिप्त रूप में करवाया था | इस बार मै आपको डॉ. मोनिका शर्मा जी से मिलवाता हूँ |

मोनिका जी सीकर जिले के गाँव जानकीपुरा की रहने वाली है | हमारा गृह जिला झुंझुनू इनकी ससुराल है | लेकिन अब इनके पति महोदय की सेवा कनाडा में होने की वजह से आजकल कनाडा में रहती है| प्रारम्भिक शिक्षा पुश्तैनी गाँव जानकीपुरा में करने के बाद इनकी पढाई भोपाल म. प्र. में हुई । वहां से अर्थशास्त्र में एम. ए. करने के बाद इन होने पत्रकारिता और जनसंचार में भी मास्टर्स डिग्री ली। उसके बाद अपना शोधकार्य राजस्थान विश्वविद्यालय , जयपुर से पूरा किया। जिसका विषय ‘हिन्दी समाचार पत्रों में प्रकाशित सामाजिक चेतनामूलक विज्ञापन’ था। कुछ समय तक निजी महाविद्यालय में बतौर लेक्चरर और जयपुर दूरदर्शन के लिए समाचार वाचक का काम भी किया।अब तक इनके कई पत्र-पत्रिकाओं ( राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण, नई दुनिया, डेली न्यूज , दैनिक हरिभूमि , दैनिक नवज्योति, दिशा-दृष्टि, वुमन ऑन टॉप और अनौपचारिका आदि) में बतौर स्वतंत्र लेखक करीब 500 आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
इन के पिताजी कोमर्शियल पायलट के पद से कुछ समय पूर्व ही रिटायर हुए है | इनके भाई भी एक कोमर्शियल पायलट ही है | इनका परिवार उच्च पदों पर होने के बावजूद गाँव कि मिट्टी से ये लोग जुड़े हुए है | जिसकी झलक इनके ब्लॉग में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है |


ब्लोगिंग करने का कारण वे कुछ यूं बयाँ करती है "आज के दौर में अपने विचारों को साझा करने के लिए ब्लॉगिंग बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें एक तरफा संवाद नहीं होता । पाठकों की राय भी हाथों-हाथ मिल जाती है । इस तरह एक वैचारिक प्रवाह बना रहता है जो मुझे काफी सकारात्मक लगता है।"


उनके बलोग तीज तेवार के बारे में पूछने पर उंहोने बताया " तीज-तेवार राजस्थानी भाषा में है। इस ब्लॉग पर मैंने खासतौर पर राजस्थानी नेगचार, रीति-रिवाज और तीज-त्योंहारों से जुङी बातों को सहेजने की कोशिश की है। यह हमारे रीति-रिवाजों के बारे में जो चीजें मुझे पीहर-सासरे में देखने-सीखने को मिली उन्हें अंतरजाल पर सबके साथ बांटने का प्रयास है। इस ब्लॉग को बनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि आगे आने वाली पीढियां भी हमारे गीत-नात, नेगचार को जानें और इनके माध्यम से हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत से जुड़ाव रखे।"

अपनी सफलता का सारा श्रेय वे अपने माता पिता को देते हुए कहती है "मेरे माता पिता मेरे लिए शक्ति स्तंभ रहे हैं. माँ एक गृहणी हैं और ज़्यादातर समय गाँव में ही रही हैं पर उन्हों ने हमेशा चाहा की मैं अपनी पढाई जारी रखूं . इसी तरह पापा ने भी हमेशा उत्साहवर्धन किया और आगे बढ़ने की हिम्मत दी है |"

भविष्य के बारे में उनका नजरिया " मेरा मानना है- आने वाले समय में हम पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक उन्नति चाहते हैं तो बच्चों का सही तरह से पालन पोषण बहुत जरूरी है। इसके लिए उन्हें समय देना उन्हें समझना बेहद आवश्यक है।मेरा इस बात में पूरा विश्वास है कि माँ होने से बढकर जिम्मेदारी दूसरी कोई नहीं हो सकती। यही वजह है कि फिलहाल मैं अपना पूरा समय अपने बेटे चैतन्य की बेहतर परवरिश में लगाना चाहती हूं। जितना समय मिलता है उसमें अच्छा पढने लिखने की कोशिश जरूर करती हूं"

मोनिका जी के ब्लॉग :
परवाज ....शब्दों के पंख
तीज तेवार
चैतन्य का कोना

Saturday, October 16, 2010

शेखावाटी से जुड़े हुए हिन्दी ब्लोगर (परिचय )

शेखावाटी का सीधी भाषा में अर्थ है राजस्थान राज्य के तीन जिले झुंझुनू ,सीकर और चुरू | इन जिलों में अनेक हिन्दी ब्लोगर है | कुछ को मै ढूंढ पाया कुछ को शायद नहीं | कई बार कुछ लेखक ब्लॉग बनाकर छोड़ देते है उस पर कुछ लिखते ही नहीं है मैने उन्हें शामिल नहीं किया है | इस पोस्ट में उन लोगो को शामिल किया गया है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शेखावाटी क्षेत्र से जुड़े हुए है |

सबसे पहला नाम है संजय बेगानी जी का ,ये किसी परिचय के मोहताज नहीं है हिन्दी बलोग जगत में जाना पहचाना नाम है | लेकिन लोग इन्हें अहमदाबाद के निवासी के रूप में ही जानते है | इनका मूल गाँव बीदासर के पास में है | जो की चुरू जिले में आता है | लेकिन अब ये अहमदाबाद में रहते है और अपनी मीडिया कंपनी चलाते है | इनका वेब पेज जोग लिखी: संजय बेगानी का ब्लॉग है | और तरकस डोट कोम को तो आप सभी जानते ही है | इनके भाई भी हिन्दी ब्लॉग लेखक है |

दूसरा बड़ा नाम है ताऊ रामपुरिया का ये भी हमारे नजदीकी जिले सीकर के कस्बा पाटन के पास के ही रहने वाले है | ये बहुत ही ज्ञानी है इस लिए इन्होने अपना असली नाम गुप्त रख कर ताऊ ही रख लिया है | आजकल इन्होने अपनी कर्म स्थली इंदौर (म.प्र. ) को बना रखी है | इनके वेब पेज का नाम रामपुरिया का हरियाणवी ताऊ नामा है | वाकई हिन्दी बलोग जगत में ताऊ के जैसी इमेज भी है इनकी | इनकी भाषा शैली हरियाणवी मिश्रित है जो बहुत मजेदार लगती है |

तीसरा बड़ा नाम है रतन सिंह शेखावत का इनका गाँव है भगत पूरा जो की सीकर जिले में है | काम काज के सिल सिले में ये फरीदा बाद में रहते है | इनके ब्लॉग भगतपुरा गाँव के बारे ,ज्ञान दर्पण ,राजपूत वर्ल्ड ,तन सिंह जी (बाड़मेर ) आदि है | ये तकनीक के महारथी भी है अगर किसी को अपनी वेबसाईट बनवाना हो या डोमेन नेम लेना हो तो इनसे संपर्क किया जा सकता है |

चौथा एक बड़ा नाम है डॉ. मिहिर धाबाई का ,ये सीकर शहर में रहते है | यंहा इनका निजी क्लिनिक है | इनके ब्लॉग दो है एक है तत्वचर्चा दूसरा है स्वास्थ्य चर्चा ,इसमे त्वचा सम्बन्धी लेख लिखते है | तत्व चर्चा में ताजा सामाजिक घटनाओं पर चर्चा करते है |

पांचवा बड़ा नाम है, हरी राम जी का ये भी सीकर के रहने वाले है लेकिन आजकल दक्षिण भारत में रोजी रोटी के कारण रहते है | ये हिन्दी को कंप्यूटर पर बढ़ावा देने में बहुत ही अग्रणी रहे है | हिन्दी प्रेम इनके रग रग में बसा हुआ है पुराने स्थापित ब्लोगर इन्हें बखूबी पहचानते है | आजकल काम काज की व्यस्तता के चलते ये निष्क्रिय है | लेकिन जो इन्होने लिखा है वो हम जैसे नए बलोगरो का मार्ग दर्शन कर रहा है | इनका ब्लॉग है प्रगत भारत |

बाकी सब छोटे मोटे ब्लोगर है , मेरे जैसे जिनमे हमारे दोस्त सुरेन्द्रजी भाम्बू जिनको हमने बलोगिंग का ऐसा शौक लगाया की लगातार पोस्ट पेलते रहते है | इनका ब्लॉग इनके गाँव मालीगांव के नाम पर बनाया गया है | इनकी कर्म स्थली बगड़ यानी की हमारा कस्बा ही है | यहां पर इनकी कम्प्यूटर आर्टस एंड फोटोग्राफी की दूकान है |

झुंझुनू जिले के बिसाऊ कस्बे के रहने वाले बलोगर भाई मुकेश मीणा ने बहुत अच्छा ब्लॉग बना रखा है | इनका ब्लॉग जनताकी आवाज नाम से है | इनसे अभी ज्यादा परिचय नहीं हुआ है |

अब बात करते है एक एसे बलोगर की जो आजकल निष्क्रिय है | ये है राजेश चौधरी ये झुंझुनू जिले से है गाँव का पता नहीं चला है | इनका ब्लॉग है उदयमान भारत | जिसमें इन होने जीनोलोजी के बारे में लिखा है |

एक ब्लोगर है विनोद कुमार शिवरायण जिनका ब्लॉग उनके नाम पर शिवरायण कुमार विनोद ही है | लेकिन आजकल निष्क्रिय है |

एक और बलोगर है उम्मेद जी जिनका ब्लॉग अभिव्यक्ति के नाम से है | ये चुरू के रहने वाले है | पेशे से कोलेज लेक्चरार है | इनका ब्लॉग बहुत सुंदर चित्रों व जानकारियों से भरपूर है | ये सभी प्रकार की पोस्ट लिखते है जिनमे राजस्थानी कविताएं भी शामिल है |

अपडेट -बाद में कुछ साथी बलोगरो ने निम्न नाम और भी सुझाए है |
इनमे एक नाम है भास्कर भारद्वाज जी का ये जयपुर में रहते है | एक इंटरनेशनल इवेन्ट कंपनी में काम करते है |ये रामगढ़ (शेखावाटी )के रहने वाले है | इनका ब्लॉग है भास्कर टाईम्स जिसमे ये विभिन्न प्रकार के तकनीकी लेख लिखते है |

एक नाम है दूला राम जी सहारण का ये पेशे से वकील है | चुरू के रहने वाले है | इनका बलोग है इन दिनों ... इसमें ये आजकल के हालात पर लिखते है | दूसरे और भी बहुत से बलोग बना रखे है |

फ़तेह पुर शेखावाटी के रहने वाले श्री अंकित जी बूबना ने बहुत सुन्दर बलोग बना रखा है | इस ब्लॉग की सुन्दरता की जितनी तारीफ़ की जाए उतना कम है | इस बलोग का नाम है फतेहपुर शेखावाटी रो बलोग |

इसी कड़ी में बाद में अपडेट प्राप्त हुए है जिसमे एक ब्लॉग है बहती धारा इस ब्लॉग के लेखक है संदीप कुमार मील | ये दिल्ली विश्वविद्यालय से पढाई कर रहे है ये नवलगढ के पास के रहनेवाले है |

महिला ब्लोगर ,डॉ.मोनिका जी है जिनका ब्लॉग परवाज ....शब्दों के पंख है | अगली पोस्ट में मोनिका जी बारे में विस्तार से लिखूंगा

और अंत में हम अपने बारे में क्या कहे आप जब यंहा तक आ ही गए है तो हमारे बारे में भी जान ही जायेंगे |

अपडेट
-हमारे कुछ खास बलोग्गर भी इस लिस्ट में जुडने से रह गए थे | इनका नाम है डॉ.जीतेन्दर ( जीतू) बगडिया | ये अभी जयपुर से मेडीकल की पढाई कर रहे है | इनके ब्लॉग का नाम एक कदम दूसरों के लिये है |ये भी सीकर जिले के रहने वाले है |

श्री विश्वनाथ जी सैनी  नवलगढ़ के पास झाझड गांव के रहने वाले है | ये गाँव झुंझुनू जिले में आता है | सैनी जी राजस्थान पत्रिका के चुरू कार्यालय में कार्यरत है | इनके बलोग का नाम है खबरो का अड्डा   इस बलोग में स्थानीय खबरों का विस्तार से प्रकाशन किया जाता है |
(आप सब पाठक मित्रो से अनुरोध है अगर आप किसी भी अन्य ब्लोगर को जानते है जो राजस्थान के झुंझुनू सीकर और चुरू जिले से जुडा हुआ है तो हमें भूल सुधार हेतु जरूर बताये )

राजनैतिक दल एवं क्षत्रिय
पहेली से परेशान राजा और बुद्धिमान ताऊ
माली गाँव :मन मोहक नजारा गणेशोत्सव की झांकी का

Monday, September 20, 2010

कुछ यादे गांधीजी के समय की -बाबू के जी महेश्वरी Memory with Bapu -K.G.Maheshwari

बाबू के. जी. महेश्वरी 




जिस व्यक्ति ने जिन्दगी भर औरो पर फ्लैश चमकाई आज जब खुद पर विज्ञान भवन में फ्लैश चमक रही है तो उन्हें कैसा महसूस हो रहा है यह तो 88 वर्षीय बाबू के. जी. माहेश्वरी ही बता सकते है | हमेशा ही कुछ नया करने का जुनून उनमे ऊर्जा भरता रहा है | वे तीन अन्य फोटो जर्नलिस्ट के साथ थे | जिनमें प्रथम महिला फोटो जर्नलिस्ट होमी व्यरावाला ,बेनु सेन ,और एस पॉल भी थे | इन चारो को उप राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था | ( इस बारे में मैने पिछली पोस्ट में बताया भी था )

अम्बिका सोनी ,उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ,बाबू के जी महेश्वरी  




लेकिन जब पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया तब प्रचार से दूर रहने वाले बाबू के जी माहेश्वरी को अपने अतीत के कुछ पन्ने खोलने पड़े | वे अपने बीत हुए समय में झांकते हुए बताते है की " मुझे जिन्दगी भर कैमरे के पीछे से हमेशा ही कुछ नया दिखाई दिया है |1945 की एक शाम मै बापू के आश्रम में प्रार्थना के समय शामिल हुआ | उस प्रेरणादायक क्षण में ,मैंने महात्मा गांधी के मुस्कुराते हुए चेहरे का एक फोटोग्राफ लिया | उस समय मै 22 साल का था और मैंने फोटोग्राफी में डेवलपिंग का काम सीखा ही था | उसी शाम मैंने उस फोटो को तैयार किया | गांधीजी को दिखाने की उत्सुकता लिए दुसरे ही दिन उस चित्र को गांधीजी को दिखाया और उनसे उस चित्र पर हस्ताक्षर (ओटो ग्राफ ) करने हेतु क़हा | गांधीजी ने मुस्कुराते हुए मुझसे क़हा " मै बनिए का बेटा हूँ बगैर लिए कुछ देना मेरे लिए सही नहीं है इसलिए पहले तुम जाओ और हरिजनों की सेवा करो "


शायद आप यंहा भी जाना पसंद करेंगे
ज्ञान दर्पण 
राजपूत वर्ल्ड 
बगड टाईम्स ( यह अभी शैशव अवस्था में है )

Thursday, September 9, 2010

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुए बगङ शेखावाटी के वयोवृद्ध फोटोग्राफर बाबू के.जी.महेश्वरी

बाबू के.जी. महेश्वरी
श्री के. जी. महेश्वरी 2 नवम्बर 1922 को बगड़ (जिला -झुंझुनूं) में पैदा हुए थे | महेश्वरी जी को फोटोग्राफी का शौक अपने स्कूल के दिनों में शुरू हुआ | उनके पिता जी उन्हें संगीत की शिक्षा दिलवाना चाहते थे | लेकिन जो गुरू जी संगीत सिखाने के लिए आये उन होने स्वर परीक्षा के बाद मना कर दिया कहा की उनका गला संगीत के लायक नहीं है |








उन्होंने फोटोग्राफी की शुरुआत स्कूली दिनों में बॉक्स कैमरे से की थी | बाद में उन्होंने Rollie,  Leica M 3, Mamiaflex 330 भी ले लिए थे | 1938 में सेंट्रल कैमरा के, पी.जे. पटेल ने उनसे अपने फोटोग्राफ, Niharika Camera Pictorialists of Gujarat द्वारा आयोजित प्रतियोगिता के लिए भेजने हेतु कहा | महेश्वरी जी ने अपने फोटोग्राफ भेजे और उसमे उन्होंने इनाम जीता| यह उनका पहला इनाम था जिससे उन्हें अपने शौक के प्रती और भी ज्यादा लगाव हो गया |

फोटोग्राफी के क्षेत्र में उन्होंने किसी प्रकार की औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी | क्यों की इस प्रकार की शिक्षा की सुविधा उस वक्त हमारे यहां पर उपलब्ध भी नहीं थी | लेकिन सोभाग्य से उनका साथ उस वक्त के फोटो ग्राफी के दिग्गजों से रहा था | जिनमें से एक थे स्वर्गीय जहाँगीर जी उन वाला दूसरे थे स्वर्गीय बुरजोर जी फनिबुन्दा | महेश्वरी जी बताते है की पिक्टोरियल प्रिंट मेकिंग की असली विधा उनहोने इन दो महान हस्तियों से ही सीखी थी |

सन 1941 में उनकी शादी श्री मति शांति देवी से हो गयी | उनकी धर्म पत्नी ने भी उनका बहुत सहयोग किया और उनहोने देश और विदेश की अनेक प्रदर्शनियो में हिस्सा लिया | 1946 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें ब्रिटेन की रोयल फोटोग्राफिक सोसायटी के सदस्य होने का ख़िताब हासिल हुआ | वे इस सोसायटी में पहले भारतीय सदस्य थे | इसके बाद तो उन्होंने बहुत से स्वर्ण ,रजत ,कास्य और प्रशस्ति पत्र जीते है | जिनकी संख्या 400 से भी ज्यादा है | और हाल ही में उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने उन्हें 19अगस्त 2010 को फोटोग्राफी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु लाईफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया है 


उनके द्वारा अर्जित उपलब्धिया निम्न है -: ( माफ़ करे मै यह सब अंगरेजी भाषा में लिख रहा हूँ क्यों की इसमें हिन्दी के शब्द बहुत कम काम में आते है )
  • 1946 ---Enrolled as an Associate of the Royal Photographic Society of Great Britain - A.R.P.S.
  • 1975 ----Conferred by the Photographic Society of India - its highest honour -The Honorary Life Membership
  • 1985 Elected Honorary Fellow by India International Photographic Council
  • 1989 Photographic Society of Madhya Pradesh Honours among nine eminent camera artists of India.
  • 1990 Honorary Fellow of the Photographic Society of the University of Mississippi - F.P.S. (Univ).
  • 1992 Elected Associate of the Photographic Society of America - A.P.S.A.
  • 1992 Conferred Honorary Membership of India International Photographic Council for life time achievement and unparalleled service in the field of photography.
  • 1995 Conferred BIMB’s highest honour for excellence in photography “CHHAYARATNA”
  • 1996 The R. A. Acharya Memorial Photographic Club bestowed its Honarary Membership.
  • 1998 Awarded Gold Certificate for notable achievements as an exhibitor by India International     Photographic Council’s Grading Division.
  • 1998 The International Award presented for life time achievements in the national and international fields of photography by India International Photographic Council.
  • 2000 Conferred Hon. Fellowship by Image Colleague Society International Ltd., California, USA for outstanding contribution to photography.
  • 2000 Felicitated by the Photo Journalist Society promoting in Jodhpur, India, for his contribution in Indian Photography at their 20th FIP Convention, 2000.
  • 2002 Bestowed the Hon. Membership of National Pictorial Photographic Academy, Mumbai in recognition of singular and meritorious services for the cause of photography.
  • 2003 Conferred Hon. Life Membership by Photographic Association of Bengal, Kolkata.
  • 2003 Issued IIPC ‘Platinum’ Grade Certificate by India International Photographic Council.
  • 2004 Conferred 8th ‘Photographic Charchaa Samman’ for lifetime achievements.
  • 2005 Conferred Hon. Life Membership for contribution in the art and science of photography in the country by East Calcutta Photographic Association, Kolkata at the celebration of its golden jubilee in the year 2005.
  • 2007 Conferred Hon. Membership by the Photographic Society of Pune for life time achievement and unparallel services in and to the art of photography.
  • 2009 Enrolled Hon. F.I.P. by Federation of Indian Photography.

  • 2010 Photo Division, Ministry of Information & Broadcasting, G.O.I. conferred 1st National Photo Award  for Life Time Achievement for his Outstanding Contribution to the growth and development of Indian Photography. 
इसके अलावा उन्होंने बहुत सी देशी विदेशी चित्र प्रदर्शनियो के जज के रूप में भी भाग लिया है | वर्त्तमान में भारतीय फोटोग्राफिक सोसायटी और इंडिया इंटरनॅशनल फोटोग्राफिक काउन्सिल के सदस्य भी है | चार दशको से उनके चित्रों का प्रकाशन 'प्रिंट  और इम्प्रिंट ' नामक पुस्तक में  जिसका प्रकाशन बिड़ला आर्ट एंड कल्चर एकेडमी ,कोलकत्ता के द्वारा हो रहा है | आज भी वे बहुत सी वर्क शॉप का आयोजन कर रहे है | जिसमे इनडोर और आउट डोर दोनों तरह की फोटोग्राफी शामिल है | मोनो क्रोम फोटो ग्राफी की प्रदर्शनी में वे आज भी टोपर है

फिरोज शाकिर अपने गुरू महेश्वरी जी के साथ 


विशेष नोट - यह पोस्ट हमारे एक अजीज मी.फिरोज शाकिर (http://www.photographerno1.com)द्वारा भेजी गयी जानकारी पर आधारित है | यह जानकारी मूलत अंगरेजी में थी जिसे हमने टूटी फूटी हिन्दी भाषा में बदल दिया है जिसमे गलती हेतु हम आपसे क्षमा प्रार्थी है | श्री के. जी. महेश्वरी जी मूलतः हमारे कस्बे बगड (वर्तमान मुम्बई )के रहने वाले है इनके पिताजी श्री बी एल महेश्वरी जी ने बगड में उस समय (1926 में ) स्कूल बनवाया तब शिक्षा केवल राजे रजवाड़े की चीज थी जिसे उन्होंने आम आदमी को प्रदान किया | मुझे व मेरी शेखावाटी परिवार को आज इस सितारे से परिचय करवाते हुए गर्व है | जब यह बताता हूँ की मैने उन्ही के बनाए हुए स्कूल में शिक्षा ग्रहण की है तो अपने आपको और भी ज्यादा गौरवान्वित अनुभव करता हूँ

एक वीर जिसने दो बार वीर गति प्राप्त की
राजस्थान के लोक देवता