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Thursday, January 12, 2017

पानी गर्म करने का साधन(जुगाड़) यानी की गाँव का गीजर ( invention of villager's geyser )

      सर्दियों में स्नान करना सबसे कठिन कार्य लगता है और अगर आप बिजली बचाने वाले विचारशील व्यक्ति है तो आप गीजर जैसे आधुनिकतम विधुत यंत्र का उपयोग मन मार कर ही कर पायेंगे | अगर आप गाँव में रहते है तो, मै आज आपको पानी गर्म करने वाले जुगाडी गीजर के बारे में बताउंगा |

      ये गीजर किसने बनाया था और कंहा बनाया था इसके बारे में ठीक ठाक किसी को नहीं मालुम लेकिन शेखावाटी में तो ये एक पोपुलर साधन है| कुछ लोग कहते है की ये पंजाब में बनाया गया था वंहा सुल्ताना गाँव जो की झुंझुनू जिले में है वंहा के लुहार ने देखा और उसने शेखावाटी में बनाकर इसे प्रसिद्ध कर दिया| इसको जरूरत के हिसाब से ऑर्डर देकर बनवाया जा सकता है| वैसे ये बाजार में 20 लीटर से लेकर 40 लीटर की क्षमता में उपलब्ध है| जो की 5 सदस्यों वाले परिवार के लिए पर्याप्त है | अगर इससे बड़ा परिवार है तो आप बड़ी साईज का भी बनवा सकते है |
   
     इस को बनाने में गैल्व्नाईज लोहे की चद्दर काम में ली जाती है इसमें ईंधन का सम्पूर्ण उपयोग होता है | तथा सभी प्रकार का ईंधन इसमें काम में लिया जा सकता है गीली लकड़ी ,कंडे छाने ,थेपडी, कागज़,गत्ते ,प्लास्टिक सूखे पत्ते इत्यादि | आपके घर का सभी प्रकार का वेस्टेज इसमें डाला जा सकता है | ये 10 से 15 मिनट में पानी गरम कर देता है| इसमें राख निचे जाली वाले स्टेंड से होकर नीचे गिरती रहती है| जब आग जलाते है तो हवा नीचे जाली से होकर ऊपर चिमनी की और बहती है जिससे ईंधन बिना रूकावट के लगातार जलता रहता है
     इसमें पानी चार पांच घंटे तक गर्म रहता है , कम ईंधन में ज्यादा ऊर्जा पैदा होती है | इसे आप अपने घर के हिसाब से बाथरूम में फिटिंग भी करवा सकते है | नीचे के चित्रों से आप ज्यादा समझ सकते है अगर फिर भी आपको इसके बारे में कोइ जानकारी चाहिए या कोइ टिप्स चाहिए तो आप टिप्पणी द्वारा बताईए |


बिना चिमनी के 


सम्पूर्ण गीजर धुआ निकलने की चिमनी सहित 
 

गीजर का जाली वाला स्टेंड 

कार्यरत अवस्था में चिमनी हटाकर देखने पर 

Thursday, February 12, 2015

रॉकेट चूल्हा कैसे बनाये how to build rocket stove

      ईंधन हमारी दैनिक जरूरत है । कम होते प्राकृतिक संसाधनो में ऊर्जा के स्रोत भी सीमित है । चारो और ऊर्जा बचाओ का शोर मचा हुआ है इस अभियान में रॉकेट चूल्हे की अहम भूमिका है  ख़ास कर भारत जैसे देश में जहाँ 80 % आबादी गाँवों में निवास करती है ।
       गाँवों में जलाऊ लकड़ी आसानी से उपलब्ध होती है । इसलिए घरो में परम्परागत चूल्हे (tredishanal stove ) ही काम में लिए जाते है । उन्ही चूल्हों में सुधार कर रॉकेट चूल्हे का परिष्कृत रूप सामने आया है ।
आवश्यक सामग्री : 1 लोहे का खाली कंटेनर
                              4" पाईप (लोहे का)
                              4" एल्बो (लोहे का )
                           जाली का स्टैंड 2 नग ( बर्तन रखने के लिए और लकडियो के नीचे लगाने के लिए ।

    कंटेनर में चित्र अनुसार पाइप और एल्बो फिट करे । पाईप के और कंटेनर के बीच में टॉप रोधी सामग्री भर दे जैसे लकड़ी का बुरादा या मिट्टी और कागज की लुगदी । बस आपका रॉकेट चूल्हा तैयार है आपकी सेवा में ।
एक बात का धयान रखे की लकडियो के नीचे राख का ढेर ना होने दे अन्यथा इसकी कार्य कुशता पर असर पडेगा । मैंने इसे बना कर काम में लेकर देखा है वाकई बहुत कारगर और बढ़िया जुगाड़ है। धुँआ बिलकुल भी नहीं देता है।

अगर आपको किसी प्रकार की समस्या आती है तो आप टिप्पणी करके पूछ सकते है ।
रोकेट चुल्हा





रोकेट चूल्हे की कार्यप्रणाली







जुगाड़ ऊपर से देखने पर एसा दिखाई देगा