जैसा की आप सब लोगो को मालुम ही है की मै दुकानदारी करता हूँ | जनरल स्टोर है जिसमे बिस्कुट टॉफी स्टेशनरी वगैरा रखता हूँ | छोटे छोटे बच्चे आते रहते है समय अच्छा व्यतीत हो जाता है |
कल की ही बात है तीन बच्चे जो मुस्लिम समुदाय के है | जिनका पढाई लिखाई से दूर दूर का कोइ लेना देना नहीं है मेरी दूकान पे आये थे | वे लोग दिन भर कूडा कचरा बीन कर रूपये इकट्टे करते है और खाने पीने में खर्च कर देते है अगर बचत हो तो घर वालो को ले जा कर देते होंगे ,नहीं तो जय राम जी की घर वालो से तो पॉकेट मनी मिलने वाली नहीं है |
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वो तीन बच्चे |
कल जब वो बच्चे मेरे पास आये तो उन्होंने दस का नोट दिया और पांच पांच रूपये के दो बिस्कुट लिए और लेकर जाने लगे लेकिन जो सबसे छोटा लड़का जो की महज ५-६ साल का था वो जिद पर अड़ गया की बचे हुए रूपये वापस दो मैंने उसे समझाया की बेटा १० रूपये पूरे हो गए कोइ रूपया नहीं बचा लेकिन वो था की मान ही नहीं रहा था मैंने उसे टालने के लिहाज से कह दिया की कल आ जाना बाकी रूपये ले जाना | आप यकीं ही नहीं करेंगे उस बच्चे ने क्या कहा होगा ...............| उसने तपाक से पूछा "किते बजे आऊं".... मै तो हैरान रह गया उसके आई क्यू को देख कर | मेरा दिमाग तो चक्कर खाने लग गया इस आज की पीढी को देख कर |
नई पीढ़ी स्मार्ट फोन की तरह स्मार्ट है.
ReplyDeleteनव वर्ष की शुभकामनाएं.