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Wednesday, November 9, 2011

पहली हवाई यात्रा,शारजहा ,दुबई ,अफगानिस्तान part-3

      २६ दिन एजेंट के पास बिताने के बाद वो घड़ी भी आगयी जब हमें कम्पनी के कैम्प में जाने का मौका मिल गया था | वो जगह आबू धाबी में थी जो की शारजहा से २०० किमी के लगभग होगी | रास्ते में बुर्ज खलीफा की लाइटों के दर्शन भी कर लिए थे |  अँधेरे में दूर से और क्या दिखाई देता | खैर कम्पनी के कैम्प में सारी व्यवस्था अच्छी थी किसी प्रकार की कोइ शिकायत नहीं है रहने खाने की अच्छी व्यवस्था थी | शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भारतीय भोजन मिल रहा था | ६ दिन वंहा बिताने के बाद हमारी फ्लाईट  अफगानिस्तान के लिए हो गयी  दुबई हवाई अड्डे पर कोइ परेशानी नहीं आई | सारा काम कंपनी का होने की वजह से हम लोगो को कुछ भी नहीं पूछा गया , बाद में पता चला की ये फ्लाईट सीधी अमेरिका की फोज का बेस कैम्प है ,वंहा जाती है सो हम लोगो को पूछना तो दूर की बात है| वीसा की भी कोइ जरूरत नहीं है | बस टिकट ही देखी जाती है |
    
     तीन घंटे के लगभग सफ़र रहा था दुबई से अफगानिस्तान का | इस फ्लाईट की कंपनी अच्छी थी ,एयर अरबिया की तरह कडकी कम्पनी नहीं थी | इसमें खाने पीने का पूरा इंतजाम था | सफ़र पूरा होने के बाद यंहा फोज के सारे सुरक्षा मानक पूरे करने पड़े जिसमे बहुत सी प्रक्रिया होती है | 

     बाद में कंपनी के ट्रांजिट कैम्प में ले जाया गया तब वंहा पता लगा की हमारा ये सफ़र तो अभी आधा ही हुआ है अभी तो सफ़र बाकी है | जंहा काम करना था वो जगह ये नहीं है यंहा तो केवल कैम्प बना रखा है  तीन दिन बाद में इस कैम्प से भी हमें रवाना किया ज रहा था | कहा गया की आपकी फलाईट रात ११.3० पर इस लिए रात को सोने का तो सवाल ही नाही था | बाद में खबर मिली की ११.३० पर नहीं है रात ३.३० पर है | सो रतजगा करते रहे है | एक बस में बैठा कर हवाई अड्डे पर लाया गया वंहा सामान का और हमारा भी वजन किया गया | हमारा वजन १८ किलो बढ़ गया था | चौकिये मत एसा कोइ हम ने ज्याद नहीं खा लिया था | की वजन बढ़ जाए ये तो हम लोगो को जो ड्रेस दिया गया था उसकी वजह से था | बुलेटप्रूफ जैकेट और एक टोपा दिया गया जो सैनिक  पहनते है जिसका वजन १८ किलो था | सब प्रक्रिया होने में सुबह के ५ बज गए थे | वंहा नित्यक्रम का कंही जुगाड़ हमें दिखा ही नहीं | एक छोटा चार्टर्ड प्लेन जिसमे कुल बीस सवारी थी | जिनम हम चार पांच हिन्दुस्तानी थे बाकी सब विदेशी थे | उन लोगो की भाषा अपनी समझ के बाहर थी हालांकि वो लोग अंगरेजी ही बोल रहे थे | लेकिन आपको तो पता ही है की मेरा अंग्रेजी तो दूर की बात है हिन्दी में भी हाथ कमजोर ही है |
     कोइ घंटे भर की यात्रा के बाद हम लोगो को उतारा गया वंहा अलग अलग जगह के लिए फिर नयी यात्रा की जानी थी | जिनमे मेरे साथ आये हुए मेरी कंपनी के लोग भी अलग जगह के लिए रवाना हो गए हम दो आदमी जिनमे मेरे अलावा एक भाई ग्वालियर का आमोद चौहान भी मेरे साथ था | हम दोनों को चार पांच लोगो के साथ रवाना किया गया| अब की बार एक जीप में बैठाया गया उसमे ठूंस ठांस कर सामान भी लाद दिया गया  | मेरे पास सामान भी काफी हो गया था ,जिनमे एक बड़ा थैला ( चाय का चालीस किलो वाला आता आपने भी देखा होगा ) उसके जैसा बैग थाजिसमे कंपनी द्वारा दिया गया सामान था जैसे सर्दी का कपड़ा जैकेट ,स्लीपिंग बैग आदि जैसे सामान थे | हेलमेट बुलेट प्रूफ जैकेट ,और मेरा घर से लाये हुए कपडे का मेरा निजी बैग  | जीप कोइ दस मिनट चलने के बाद रूक  गयी | रास्ते भर हमें कोइ चिड़िया भी नजर नहीं आयी लगा जैसे जंगल में सडक बना रखी हो | जंहा जीप रुकी वंहा हेलीपेड था | एक हेलीकाप्टर पहले से ही हमारा इन्तजार कर रहा था | उसमे हम ५-६ आदमी को बैठा दिया गया पीछे के हिस्से में सामान रखा गया |  और हमें बुलेटप्रूफ जैकेट और टोपा पहनने के आदेश दिए गए ,हम लोगो ने पहन लिए | पहने के बाद अपने आपको काफी असहज मह्शूश कर रहा था | क्यों की उस जैकेट की बनावट बंद गले के स्वेटर जैसी थी | और रहा सहा उसका वजन १८ किलो अपने सीने पर महशूस कर रहा था |
चित्र गूगल के सोजन्य से
थोड़ी देर तक तो मै सहन करता रहा कोइ घंटे भर की यात्रा मैंने पहलू बदलते हुए जैसे तैसे पूरी की ,लेकिन अब मुझे मेरा दम घुटता सा महसूस होने लगा ,मैंने काफी कोशिस की नीचे की तरफ आते जाते बस्ती पेड़ पहाड़ आदि में मन लगाने की लेकिन जब बल्ड प्रेसर हाई हो जाता है तब किसी चीज में मन नहीं लगता है | सुबह जब चले थे तब बहुत ठण्ड थी इस लिए जैकेट पहन रखी थी | उसको निकाले बगैर हेल्कोप्टर में बैठते समय मैंने उसके ऊपर ही बुलेटप्रूफ जैकेट पहन ली थी | रात भर का जगा हुआ था ,सुबह से कुछ खाया नहीं ऊपर से ये सीने पर वजन और ऊपर थोड़ा हवा का दबाव भी कम हो जाता है  साथ में हेल्कोप्टर का शोर ये सब कारण मिलकर मेरे हालत खराब कर रहे थे | मैंने अपने आपको सहज रखने की कोशिस की लेकिन दो घंटे बाद  एका एक  मुझे चक्कर आया और मै दो तीन मिनट के लिए बेहोश हो गया | पायलट का साथी मुझे देख कर घबरा गया ,उसने जल्दी से मेरी जैकेट निकाली ,हेलमेट हटाया ,पानी के छीटे दीये  तब मुझे होश आया और मै अपने आपको सीट पर लेटा हुआ पाया | होश आने पर दिमाग ने थोड़ा काम किया ,मन ही मन में सोचा की अगर मै आँख खुली रखूंगा तो ये सहायक पायलट मुझे दुबारा इस १८ किलो के जैकेट को पहनने के लिए कहेगा सो मैंने दुबारा सोते रहने का नाटक किया ये नाटक मुझे कोइ आधा घंटा भर करना पडा तब कंही जाकर हमारा गंतव्य स्थान आया |  हमने उन  पायलटो को बाय बाय किया | हमें लेने के लिये कैम्प का मैनेजर वंहा पहले से ही इन्तजार कर रहा था | उसको मैंने बता दिया की मेरी तबियत खराब है उसने मुझे कई घंटे सोने की सलाह दी | और मुझे मेरे कमरे में बिस्तर पर पहुचा दिया गया | उसके बाद उस दिन मैंने   हेल्कोप्टर में यात्रा ना करने की कसम खाई | लेकिन मुशीबत ये है की यंहा हवाई अड्डा नहीं है इस लिए मुझे वापिसी की यात्रा भी हेल्कोप्टर में ही करनी पड़ेगी | लगता है फिर नाटक करना पडेगा |



Saturday, November 5, 2011

पहली हवाई यात्रा,शारजहा ,दुबई ,अफगानिस्तान part-2

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ लिया की भारत से जाने वाले लोगो को कैसी कैसी समस्याए झेलनी पड़ती है | अब आते है शोषण की बात पर यंहा शारजाह में जिस एजेंट के पास हमें भेजा गया था वो इसाई धर्म का था | शारजाह में जो चर्च है वो हमारे रहने के स्थान से लगभग तीन चार किमी था | वंहा उसने कह रखा था की आप सबको प्रत्येक मंगलवार को चर्च में जाना है | चर्च काफी बड़ा है उसमे अलग अलग भाषा के लोगो के लिए अलग अलग वातनुकुलित हाल  बने हुए है | हम लोग हिन्दी भाषा के हाल में बैठते थे | वंहा एक महाशय अच्छा मुजिक बजाते थे | हम लोग उनके सुर में सुर मिलते थे | जो वो बोलने के लिए कहते हम उनकी आज्ञा  का पालन शिष्य की तरह करते थे | मुझे किसी भी धर्म से कोइ शिकायत नहीं है और ना ही किसी धर्म को मै छोटा बड़ा मानता हूँ |
लेकिन धार्मिक आस्था सब का मौलिक अधिकार है और किसी भी धर्म में आस्था रखना उसका निजी स्वतंत्रता का मामला है ना की किसी दबाव का ,वंहा वे सभी को इसाई धर्म के अनुयायी बनने पर जोर देते थे हम भी बिना इच्छा के जो वे बोलने के लिए कहते थे वही बोलते थे | वे कहते थे की कोइ भी ईशु से बड़ा नहीं है आप हमेशा ईशु को याद करो | जो वंहा नहीं जाता था उसको एजेंट महाशय लताड़ पिलाते थे | वापस इंडिया भेजने की बात करते थे |

अब एक रोचक वाकया बताता हूँ वैसे बताने को बहुत कुछ है लेकिन अगर नेट पर समय ज्यादा मिला तो विस्तार से बताऊंगा | नहीं तो फिर कभी देखेंगे | शारजहा में रूपये ख़तम हो गए थे दाल चावल खा खा कर उकता अगये थे | एक दिन शुक्रवार के दिन देखा की कुछ लोग सामान बाँट रहे है | जैसे दाल चावल चीनी चाय ,रेडी फ़ूड के पैकेट जैसे चिकन ,टूना मछली  | भारत और बंगलादेशी लोग लाइन में खड़े थे लेने के लिए | हमने भी उस लाइन में लगने का निर्णय किया ,एक बार तो दिल ने कहा की आज तक जब इस प्रकार भिखारी की तरह लाइन में नहीं लगे तो आज क्यों ? और रहा सहा ब्लोगरो वाला स्वाभिमान आड़े आ  रहा था | लेकिन फिर दिमाग पर जोर दिया थोड़े व्यवहारिक हुए और लाइन में लग गए खड़े खड़े सोचने लगे की इस ट्रस्ट को,जो इसकी व्यवस्था कर रहा है उसे बाद में पैसे भिजवा देंगे ज्यादा से ज्यादा इनका सामान दो सो चार सो रूपये का होगा सो कभी भी इनको सहायता राशी भेजी जा सकती है |  मेरा नंबर आया तब मैंने सामान ले लिया आप तो जानते ही है की मै शाकाहारी हूँ लेकिन जो मिला था वो सब मांसाहारी था सो बाद में शाकाहारी भोजन प्राप्त  कर चुके भाई की खोज कर एक्सचेंज कर लिया और मजे से उस भोज का स्वाद लिया | लेकिन बाद में उन लोग को मैंने नाम पता पूछा तो उन लोगो ने बताने से इनकार कर दिया कहा की उन लोगो को इससे समस्या हो सकती है | हम लोग पोपुलरटी  नहीं चाहते है इस लिए नाम पता नहीं बताएँगे | खैर कोइ बात नहीं है उनको तो हम ढूंढ ही लेंगे  |

मेरे आगे की यात्रा के बारे आप अगली पोस्ट में पढ़ पायंगे की मैंने कैसे हेलिकोप्टर वाले को बेवकूफ बनाया साथ बने रहीये |

Sunday, October 23, 2011

पहली हवाई यात्रा,शारजहा ,दुबई ,अफगानिस्तान

पाठक मित्रो पिछली पोस्ट में लिखा था वो एक सूचना मात्र थी अब मै आपको विस्तार से बताने के लिए हाजिर हूँ , मेरी यात्रा का प्रोग्राम काफी दिन पहले ही बनने लग गया था लेकिन मेरे लायक कोइ जॉब का अवसर नहीं मिल रहा था इस लिए थोडा समय लग रहा था मेरे एजेंट ने जो की हमारे शेखावाटी क्षेत्र का ही है उसने मुझे सूचना दी की आपका जाने के लिए वीसा और टिकट का इंतजाम हो गया है आप पैसे का इंतजाम कर के आ जाओ | जी हां बिना रूपये दिए आप का विदेश में नौकरी लगना काफी टेढ़ी खीर है | कैसे है वो भी मै आपको बताऊंगा |-
यात्रा की सारी तैयारी पूरी की जैसे की नया बढ़िया बैग नए अच्छे कपडे  ,जी हां एजेंट ने बताया की अगर आपके कपडे बढ़िया नहीं हुए और बैग काम चलाऊ दिखा तो आपको एयरपोर्ट से वापस भेजा जा सकता है | अब भला बताइये मेरे पास वैध ट्यूरिस्ट वीसा हो और टिकट हो तो मुझे वापस क्यों भेजा जाएगा लेकिन ये भी एक कटु सच है बहुत से लोग को एयरपोर्ट से वापस भेजा गया है | बहुत से सवाल जवाब किये जाते है दुबई क्यों जा रहे हो वंहा क्या कम है तुम्हारा कोइ रिश्तेदार है क्या वंहा पर किस कंपनी में रहता है फोन नम्बर क्या है ? वगैरा वगैरा  उनसे भी अगर अगर उनको संतोष नहीं हुआ तो कहेंगे अरे हमें पता है तुम कोइ पर्यटक नहीं हो भाग जाओ इधर से | 
खैर मेरे साथ  एसी  कोई बात नहीं हुई पहली हवाई यात्रा थी सो सोच रहा था की भाटिया जी जैसा कोइ नेक बन्दा मिल जाए तो सफ़र में आसानी रहे लेकिन एसा बन्दा मिलना मुश्किल है सोच रहा था की दुबई में अंगरेजी ही बोलनी पड़ेगी और हमारा विदेशी भाषा में तो क्या अपनी देशी भाषा में भी बारह बजा हुआ है | खैर जैसे तैसे पहुच गए हवाई जहाज में लेकिन जब सीट बेल्ट बंधने लगे तो मुश्किल हो गयी देखा तो दोनों सीरे एक ही जैसे है काफी दिमाग लगाया लेकिन जब समझ नहीं पाए तो बाजू वाले से पूछा जो शायद हिन्दी समझता ही था | उसने मुझे बताया की आप ने बेल्ट का  एक सीरा उसका ले रखा है  | इस लिए आप दोनों सीरो को ढूंढिए  | मतलब ये की आप के बारे कंही न कही से पता चल जाता है की आप की ये पहली हवाई यात्रा है | उसके बाद तो तीन घंटे की यात्रा कब पूरी हुई पता ही नहीं चला | हां ये भी बता दू की टिकट एजेंट ने बनवाई थी सो सस्ते के चक्कर में एयर अरबिया की थी जिसमे यात्री को पानी के लिए भी नहीं पूछा जाता है खाना पीना तो दूर की बात है | 
शारजहा  में हवाई अड्डे पर आई स्केनिंग के समय बहुत मुश्किल हुई यंहा वो बन्दा मुझसे बार कह रहा है की आँख को और खोलो और खोलो अब समझ नहीं पा रहा था की आँख को ज्यादा कैसे खोला जाए | जैसे तैसे वो भी किया |
बाहर निकला तो सोचा की कोइ मुझे लेने आयेगा लेकिन यंहा मुझ जैसे आने वालो को कोइ लेने नहीं आता है | एजेंट को फोन कैसे किया जाए ये समझ  में नहीं आ रहा था | फोन का कार्ड खरीदा लेकिन उसे काम में लेना ना आने की वजह से वो भी बेकार साबित हुआ फिर एक नेक बन्दे ने मिस काल लगाने के लिए दे दिया और एजेंट से बात हुआ तो उसने पता बताया और कहा की आप इस जगह पर चले जाओ | जैसे तैसे बस पकड़ कर वंहा पहूचा तब तक मै अंगरेजी की ही टांग तोड़ रहा था | 
कमरे पर पहुँचा तो वंहा हालत और भी खराब थी | एक कमरे में १० आदमी रह रहे थी १२ बाई १४ के कमरे में ठीक से पैर भी सीधे नहीं किये जा पा रहे थे | रोजाना रोटी सब्जी खने वाले व्यक्ति को केवल दाल चावल खाने को मिल रहा था | ये खाना रहना सब एजेंट के खर्चे पर था लेकिन मै इसे खाने पीने का आदि नहीं होने की वजह से अपने खर्चे पर ही खाना खा रहा था | एक समय का ठीक ठाक खाना खाने में १०० रूपये खर्च हो रहे थे | काम कब होगा इसका भी कोइ ठिकाना नही था | वीसा एक महीने का ही था पीसीसी (पुलिस कलियेरेंस सर्टिफिकेट ) भी तीन महीने का ही लिया जाता है | कुछ लोगो का वो भी एक्पायर हो जाता है मेरा तो कोइ झंझंट नहीं था क्यों की मैंने ताजा ही बनवाया था | हां जब जयपुर पी सी सी बनवाने  गया तब अपने तकनीक के महारथी आशीष भाई से भी मुलाक़ात कर ही ली   | 
खैर जैसे तैसे २६ दिन शारजहा में गुजारे उसके बाद सूचना आई की मेडिकल के लिए जाना है | मेडिकल के लिये कम्पनी ने एक हस्पताल का पता दे रखा है जिसमे खर्चा एम्पलोई को देना होता है शायद तीस हजार के आस पास लगता है लेकिन हमने तो पहले ही एजेंट को दे रखा था | सो वंहा खर्चा भे उसने ही  दिया  |  दुबई के एजंट के पास यंहा भारत के बहुत से एजेंट अपने आदमी भेजते है | दुबई वाले एजेंट लोग इस मामले में आदमी लोगो का शोषण बहुत करते है | अच्छा खाना नाही मिलता  अच्छा मकान नहीं मिलता | बहुत सारी समस्या होती है |मेरे एजेंट ने भी हमारा धार्मिक शोषण किया वो मै अगली पोस्ट में लिखूंगा |







Thursday, September 22, 2011

शारजहा और काम की खोज (माइक्रो पोस्ट )

काफी दिनों से कोइ पोस्ट नहीं लिख पाया | अभी थोड़ा समय निकाला है ब्लोगिंग के लिए तो आप को सूचना दे दू की मै अपने वर्तमान ठिकाने पर नहीं हूँ | काम काज की तलाश में शारजाह आया हुआ हूँ | मेरी फ्लाईट जयपुर से १ सिप्तम्बर को थी | तब से अभी तक यंहा टिका हुआ हूँ | आगे कंहा जाऊंगा कह नहीं सकता | लेकिन जंहा भी जाऊंगा और समय मिल पाया तो सारी बाते विस्तार से लिखूंगा | अभी पिछले काफी दिनों से मै मित्र ब्लोगों पर टिप्पणी नहीं दे पा रहा हूँ | जिसके लिए मेरे मित्र बलोगर मुझे माफ़ कर देंगे | किसी जगह पर नेट नहीं मिल पा रहा है किसी जगह पर हिन्दी की सुविधा नहीं मिल पा रही है | अगर दोनों मिल जाए तो समय नहीं मिल पा रहा है |

Tuesday, July 19, 2011

बंजारे का मोबाईल और संगीत (shedule post)

रोजाना कि भागदौड में कभी कभी आपको दूसरों कि जिंदगी में टाक झाँक का  भी अवसर मिल जाता है | कुछ लोग उन बातो को दूसरों के साथ साझा कर लेते है कुछ लोग अपने मन में ही रख लेते है | एक दिन एक बंजारा मेरी दूकान पर आया और अपने फोन को चार्जिंग में लगाने की मिन्नत की मैंने भी उसका सहयोग किया जो कि मेरा हमेशा ही नियम रहा है दूकान पर कोइ भी आये सभी की सहायता करता हूँ | वो भाई थोड़ी देर में आने का कह कर निकल गया और मै लग गया उसके मोबाईल से डाटा चोरी करने में अब चोरी की है तो माल आपको भी दिखा दू  उसके मोबाईल में क्या था ,वैसे तो कुछ खास नहीं था लेकिन आपके और मेरे काम का तो संगीत ही है वो आप भी सुन लीजिए |

एक हिन्दी भाषी ब्लॉगर का दर्द

        ये पोस्ट हमारे हिन्दी ब्लॉगर मित्र हरि राम जी ,जो शेखावाटी से है के द्वारा भेजी गयी मेल पर आधारित है | उनको काफी दिनो बाद पोस्ट लिखने पर मैंने उलाहना दिया था तो जवाब में उन्होंने जो मेल मुझे भेजी वो मै आपको ज्यो कि त्यों पढ़वाता हूँ | एक बात और मै आपको बता दू कि हरिराम जी हिन्दी के उन गिनेचुने ब्लौगरो में से है जिन्हें ब्लॉग जगत में नीव की ईंट कहा जाता है | और इनका ब्लॉग जगत में हिन्दी के प्रचार प्रसार में बहुत योगदान रहा है |
        "भाई नरेश जी , पिछले ढाई वर्ष से मेरा स्थानान्तरण भुवनेश्वर से 150 कि.मी. दूर स्थित कारखाने में हो गया है। कुछ राजनैतिक शक्ति वाले दुष्ट अधिकारियों के कोप से। रोज सुबह छह बजे निकलना और रात 11 बजे वापस पहुँचना। शनिवार 25 जून को रात 11.30 बजे घर लौटा, भोजन करके सबके सो जाने के बाद रात करीब साढ़े बारह बजे अर्थात 26.06.2011 को 00.30 बजे यह ब्लॉग पोस्ट कर पाया।

लेपटाप साथ लेकर घूमता हूँ, पर इण्टरनेट कनेक्शन नदारद मिलता है।
BSNL 3G Data card लिया है, पर यह तो एक धोखा है जनता के साथ। भुवनेश्वर तथा कुछ महानगरों के कुछेक मोबाईल टावर के पास तो 10kbps की स्पीड मिल पाती है, किन्तु नगर से 10 किलोमीटर दूर निकलते ही इण्टरनेट कनेक्ट ही नहीं हो पाता है, यदि कनेक्ट हो भी गया तो 0-kbps की स्पीड दर्शाता है।

अखबारों में पढ़ने को मिलता है सभी रेलवे लाइनों के किनारे फाईबर ऑप्टिक केबल बिछाए गए हैं, बहुमुखी संचार के लिए। किन्तु प्रैक्टिकल में मोबाईल सिग्नल भी चलती रेलगाड़ी में नदारद मिलता है। विशेषकर इस क्षेत्र में।

2G स्पैम में भारत सरकार का 1 लाख करोड़ का राजस्व लूटा गया, अब 3G स्पैम में तो शायद 1 अरब करोड़ रुपये खुले आम लूटे जाएँगे आम जनता से।

लेपटॉप खरीदकर सोचा था कि ट्रेन या बस में आते-जाते कुछ समय का सदुपयोग कर हिन्दी के तकनीकी विकास में सहयोग करूँगा।
लेकिन बसों में तो भीड़ में खडे़ होने की भी जगह मुश्किल से मिल पाती है। यदि सीट मिल गई तो ऊबड़ खाबड़ रास्तों में जर्किंग में लेपटाप पर अंगुली कहीं की कहीं लग जाती है और कोई फाइल डिलिट हो जाती है या कुछ गड़ बड़ी हो जाती है। ट्रेन में यदि सीट मिल गई तो कुछ काम पाता हूँ, चलते चलते।

रात को 11 बजे घर लौटने पर थके हारे कुछ करना तो संभव ही नहीं होता। सुबह 4 बजे उठकर तैयार 6 बजे घर से भागने के बीच चाय-नाश्ता तक नसीब नहीं हो पाता। भूखे ही भागना पड़ता है। तुलसी का पत्ता तक मुँह में डालने को अक्सर समय नहीं मिल पाता।

फैक्टरी में तो मोबाईल भी allowed नहीं होता। laptop तो दूर की बात है।

मेरी जगह भुवनेश्वर में जिस वरिष्ठ अधिकारी को बैठाया गया है, उनके साले साहब सांसद(कम्प्यूनिस्ट के) हो गए हैं। वे वरिष्ठ हिन्दी अधिकारी महोदय हैं पर हिन्दी में एक पेज में 50 से कम गलतियाँ नहीं करते, फिर भी किसी की मजाल कि कोई उनसे कुछ कह पाएँ। यदि हम उनकी भलाई के लिए भी कुछ सुधार की बात कह देते हैं तो हमें जान से मारने की धमकी देते हैं।

भैया कैसा जमाना है? सही काम करनेवालों को लिए या अच्छे लोगों के लिए यह दुनिया नहीं है। सीधे कहते हैं-- यदि अच्छे आदमी हो तो स्वर्ग में जाओ, इस नरक में क्यों पड़े हो, सुसाईड कर लो।

यह रावण राज्य है, जहाँ ऋषि-मुनियों को भी अपना खून निकाल-निकाल कर घड़े भर कर टैक्स रूप में देना पड़ता है। 

(Blood Bank के घोटालों का पता चला था, लोगों से रक्तदान लिया जाता है, विभिन्न अवसरों पर धर्म या देशभक्ति का भुलावा देकर। किन्तु खून की खेप विभिन्न विदेशी दवा कम्पनियों को बेच दी जाती है, जो उससे कई प्रकार टानिक आदि बनाकर करोड़ों में बेचती है।)

कब्रों से कंकाल व खोपड़ियाँ चुराकर भी बेच दी जाती हैं।

खैर, जिन्दा हैं इस आशा पर कि शायद कभी रात बीतेगी, हमारा दिन आएगा!

आपकी प्रेरक टिप्पणी के लिए बहुत धन्यवाद। कृपया अपनी सद्भावानाएँ प्रेषित करते रहें।

-- हरिराम   (प्रगत भारत ) http://hariraama.blogspot.com

Friday, June 3, 2011

टू व्हीलर वालो के लिए तो ये जुगाड वरदान है .........................नरेश सिंह राठौड़

        अगर आप टू व्हीलर चलाते है ,तो आपका वास्ता उसके पंक्चर होने की स्थति से भी पड़ा होगा | शहरी क्षेत्र में तो इस स्थिति में कोइ ज्यादा परेशानी नहीं होती है क्यों कि थोड़ी थोड़ी दूरी पर पंक्चर बनाने वाली दूकान मिल जाती है | परिस्थिति गंभीर तब बन जाती है जब आप ग्रामीण क्षेत्र से होकर जा रहे हो, वंहा दूर दूर तक किसी दूकान का नाम निशान नहीं हो़ता है |

        इस समस्या से मुझे भी अक्सर दो चार होना पड़ा तब मुझे किसी परिचित ने इस जुगाड से परिचय करवाया | इसका नाम क्या है ये मै भी नहीं जानता हूँ | आप कुछ भी नाम रख लीजिए इससे कोइ फर्क नहीं पड़ता है | इसकी बनावट पलम्बरिंग में काम में आने वाली एक डिवाइस जिसे रेडुसर (reducer) कहते है को देख कर की गयी है | जो की मोटी पाईप को पतली पाईप से जोड़ने के काम आता है| इस जुगाड़ के द्वारा आप साईकिल में हवा भरने वाले पम्प से अपने टू व्हीलर या फॉर व्हीलर के टायर में हवा भर सकते है | एक बार हवा भर जाने से आप नजदीक के 10 -15 किमी में किसी भी पंक्चर बनाने वाली दूकान तक आराम से पहुच सकते है , और साईकिल का पम्प आसानी से हर जगह पर मिल ही जाता है | अरे !कीमत बताना तो भूल ही गया मात्र दो रूपये .......!

      अब आप इसकी बनावट को सचित्र देखिये |





 

Wednesday, June 1, 2011

80 वर्षीय ताऊजी .......गौशाला ..........दिल्ली की नौकरी ......स्वास्थ्य

       आज मै आपका परिचय अपने ताऊ जी से करवा रहा हूँ | ये हमारे बलोग जगत वाले ताऊ नहीं है इन्हें तो यह भी नहीं मालूम की ब्लॉग क्या होता है | लेकिन उनकी बहुत सी विशेषताओं पर मै प्रकाश डालूँगा | शायद आपके कुछ काम आ सके |

      हमारे दादा जी की सात सन्तान थी जिनमे पिताजी और ताऊ जी के रूप में दो लडके बाकी हमारी पांच बुआ जी | ताऊ जी दुसरे नंबर के है | इनका जन्म 1932 में हुआ था | उन्होंने हाई स्कूल गाँव के स्कूल से किया था | उस वक्त हाई स्कूल पास व्यक्ति कि बहुत कद्र की जाती थी | 1950 में वे भारतीय सेना में भर्ती हो गए | वंहा उन्होंने पांच साल काम किया उसके बाद परिवार वालो के दबाव में उन्होंने सेना की नौकरी छोड दिल्ली के संसद सचिवालय में नौकरी शुरू कि जिसमे बाबू की पोस्ट पर कार्य किया | वंहा पर विभिन्न विभागों में कार्य किया रिटायरमेंट के समय वे कपड़ा मंत्रालय में कार्य कर रहे थे | दिल्ली में नेताजी नगर के  बी ब्लॉक में रहते थे |

       आज उनकी उम्र अस्सी वर्ष के लगभग है लेकिन स्वास्थ्य उनका टकाटक है |घर से खेत की दूरी तीन किमी है वो भी बलुई मिट्टी वाला कच्चा रास्ता जिसपर चलने से आपकी दुगुनी ऊर्जा खर्च होती है | वे रोजाना दोनों समय खेत में जाते है वंहा अपना खेती बाडी का कार्य करते है| घर के समस्त कार्य स्वयं करते है | पानी भरना ,आटा  पिसवाना बाजार जाना ,इस प्रकार के समस्त कार्य हेतु वे किसी दुसरे पर निर्भर नहीं रहते है |

      उनकी दिनचर्या सुबह साढ़े चार बजे शुरू होती है | शौचादि के लिए भी वे दो किमी दूर खेत की तरफ जाते है जिससे उनकी सुबह की सैर भी हो जाती है |  सूर्य उदय के समय वे सूर्य नमस्कार व् अन्य योगा करते है | उसके बाद स्नान आदि करते है | एक घंटा भगवतगीता का पाठ करते है | उसके बाद भोजन करते है | भोजन भी ज्यादतर वे खुद बनाते है | या अपनी देख रेख में बनवाते है | आटा हमेसा मोटा पिसवाते है | उसे छलनी से छानने के बाद उसका निरक्षण किया जाता निरक्षण के बाद उस चोकर को वापस आटे  में डाल कर रोटी बनाई जाती है | भोजन भी बहुत सादा रहता है घी दूध दही आदी ही रहते है| दूध हमेशा गाय का ही लेते है भैस का दूध वे निकृष्ट समझते है  | सब्जी कम मसाले की होती है | दोपहर के आराम के बाद वे अपनी गौशाला की देख रेख करते है |

      उनकी गौशाला के बारे में हम हमेशा मजाक करते है | क्यों कि उन के पास जो भी गाय दूहने के लिए लाई जाती है वो ही थोड़े दिन बाद दूध देना बंद कर देती है | जिसका कारण उनका अपनी गायों के प्रती अगाध प्रेम है | उसे ज्यादा खिलाते पिलाते है और वो भी उतने  ही नखरे करती है | इस प्रकार उनके पास हमेशा ही चार पांच गाय रहती है | उनकी देख रेख वे स्वयम ही करते है |


ताऊ जी की गाये
आप चित्र में उनकी गायों को देख सकते है |

   





Sunday, May 15, 2011

महंगाई होने का कारण बकौल गट्टू हलवाई

            महंगाई पर हर जगह हर समय चर्चा रहती है | ये टोपिक ऐसा है कि आजकल गर्मी बहुत ज्यादा है कहने के बाद इसी का नंबर आता है | मै जब भी गट्टू के पास कुछ मिठाई वगैरा लेने जाता हूँ , तो वो हमेशा मिठाई के महंगे होने का कारण गिना देता है जो शायद  आप भी जानना चाहेंगे | 

           कुछ साल भर पहले की बात है गट्टू ने लड्डू के भाव 40 रूपये किलो से बढा कर 50 रूपये कर दिए | कारण पूछने पर बताया कि आजकल चीनी के भाव बहुत बढ़ गए है 45 रूपये किलो से भी ऊपर चल रहे है इसलिए मजबूर होकर भाव बढ़ाना पड़ा |

           चार एक महीने बाद बाजार में चीनी के दाम कम हो गए चीनी 45 रूपये की जगह 30 रूपये किलो हो गयी | मैंने सोचा कि गट्टू ने अब लड्डू सस्ते किये होंगे | उससे भाव पूछा तो बताया कि आजकल दाल के भाव आसमान छु रहे है | बेसन का भाव 35 रूपये से बढ़ कर 45 रूपये हो गया है इस लिए लड्डू के भाव 60 रूपये किलो हो गए  है |

           मान सून की मेहरबानी  से दाल के भाव कम हो गए बेसन भी 30 रूपये किलो हो गया चीनी भी सस्ती हो गयी लेकिन गट्टू के लड्डू 70 रूपये किलो हो गए पूछने पर बताया कि वेजिटेबल घी 45 रूपये किलो से बढ़ कर 70 रूपये किलो हो गया है |
 
           अब सुनने में आया है कि पेट्रोल के बाद गैस में आग लगनेवाली है | सिलेंडर के दाम बढ़ने वाले है तो गट्टू की नयी रेट में लड्डू 100 रूपये किलो होने वाला है | लेकिन गट्टू  हमारी एक बात का जवाब ठीक से नहीं दे पाया कि जलेबी बनती है 15 रूपये किलो वाली मैदा से और लड्डू उस्से दुगने भाव वाले बेसन से फिर भी दोनों के भाव बराबर कैसे है ?

              क्या आपके समझ में आता है  ये अर्थशास्त्र ! शायद गट्टू कि इस जलेबी की ही तरह टेढा है !


अपने काम में मगन गट्टू 

Tuesday, May 10, 2011

शेखावाटी का जन स्वास्थ्य और बकरी का धीणा

           आप सोच रहे होंगे कि जिस शब्द का मतलब हिन्दी भाषी लोग नहीं जानते उस शब्द का प्रयोग मैंने क्यों किया इसका कारण ये है कि ये शब्द यंहा शेखावाटी में बोलचाल में बहुत प्रयोग किया जाता है | धीणा शब्द का अर्थ है दुधारू पशुधन | बचपन में जब मै इधर उधर रिश्तेदारी में जाता था तब वंहा मुझसे कुछ कोमन से प्रश्न किये जाते थे जिनका क्रम इस प्रकार से रहता था | पहला सवाल बुजुर्गो के स्वास्थ का हालचाल से सम्बन्धित होता था दूसरा रोजी रोटी से सम्बंधित जैसे कि आपके पापाजी क्या करते है , आपके भाई साहब क्या काम धंधा करते है वगैरा वगैरा तीसरा सवाल उनका ये धीणा से सम्बंधित होता था कि दूध का सोर्स क्या है ? बच्चो की पढाई लिखाई के प्रश्नों का नम्बर बाद में आता था | आजकल वस्तु स्थिति में बदलाव आ गया है | पढाई लिखाई के सवाल पहले किये जाते है कौनसा बच्चा किस कक्षा में पढता है ये पहले जानना चाहते है |

             शेखावाटी में दूध हेतु गाय ,भैस ,बकरी का पालन किया जाता है | इनमे सबसे ज्यादा बकरी पालन किया जाता है | यंहा के गाँवों में बकरीयो की संख्या बहुत है | झुंझुनू ,नवलगढ ,मंडावा विधानसभा क्षेत्रो में बकरी पालन ज्यादा किया जाता है | अगर स्वास्थ्य की बात की जाए तो सबसे ज्यादा निरोगी व्यक्ति भी इन्ही क्षेत्रो के है | मै ने इन क्षेत्रो के स्वास्थ्य के अच्छे होने के कारण के बारे में काफी खोज बीन की तो पाया कि ये सब बकरी पालन की वजह से है | ग्राम  स्वरूप सिंह की तोगडा(त.नवल गढ़ )  में मेरी रिश्तेदारी है वंहा मेरा आना जाना रहता है |वंहा  के बारे में मैंने विश्लेषण किया तो पाया कि वंहा हर घर में बुजुर्गो कि आयु 80 साल से ऊपर है  | किसी को भी रक्तचाप ,मधुमेह ,ह्र्दय रोग संबंधी कोइ बीमारी नहीं है | उस गाँव का अभी तक का रिकार्ड है कि वंहा कोइ भी अकालमौत(जवान मौत ) किसी रोग कि वजह से नहीं हुई है समय से पहले यानी कि अकाल मौत एक दो अगर हुई है तो वो सुसाईड ,या एक्सीडेंट की वजह से ही हुई है | वंहा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी नहीं है एक बार एक कम्पाउन्डर साहब आये थे अपना धंधा जमाने के लिए लेकिन मरीजो के अभाव में वो भी थोड़े ही दिनों में चलते बने |  इस सब के पीछे कारण केवल बकरी का दूध पीना है | वंहा पूरे गाँव में भैस और गाय की संख्या नगण्य है | जबकि प्रत्येक घर में 8-10 बकरिया  है | कमोबेस बकरी पालन की यही स्थिति इस क्षेत्र के सभी गाँवो की है |


ये है हमारी बकरी और उसकेस्तनपान करते बच्चे 







नटखट बच्चे 

          
           बकरी का दूध बहुत गुणकारी होता है इस बात को दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने भी माना है | पिछले दिनों भास्कर में एक खबर आयी थी कि दिल्ली में डेंगू का जब प्रकोप हुआ तो वंहा बकरी का दूध चार सौ रूपये किलो में भी नहीं मिल पाया | मरीजो की रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए बकरी का दूध बहुत सहायक सिद्ध हुआ है जिसका कारण बकरी का जंगली वनस्पति का खान पान  होना और इसके दूध का सुपाच्य होना भी है | गांधी जी भी बकरी के दूध के सेवन पर जोर देते थे | बकरी का दूध केलोस्ट्रोल को कम करता है और ह्रदय को मजबूत बनाता है | स्मरण शक्ति को भी बढाता है 
अब मै आपको यह भी बता दू कि मै खुद भी बहुत बर्षो से बकरी का पालन कर रहा हूँ और इसके दूध का उपयोग कर रहा हूँ इस लिए मेरा स्वास्थ्य भी उपर वाले की मेहरवानी से अच्छा है |


Tuesday, May 3, 2011

अपने नाम को सार्थक करता एक बलोग ---जुगाड

अंतर्जाल पर भ्रमण करते करते ,जुगाडो की खोज करते करते इस जुगाड नामक ब्लॉग पर पहुचा | जैसा की नाम से जाहिर है ये कोइ विद्वान बलॉगर का तो बनाया हुआ हो ही नहीं सकता है | ये ब्लॉग बिना किसी तड़क भडक के है यानी की कोइ विजेट इस पर नहीं है | इस ब्लॉग में सारा मसाला दुसरे ब्लॉगों से उडाया हुआ है जो की ब्लॉग के शुरुआत में मोटे अक्षरों में लिखा हुआ भी है कि माल चोरी का है |

      खैर हमें चोरी और साहूकारी से क्या लेना देना मैने तो इसकी पोस्ट को देख कर आप लोगो से इसे साझा करने की सोची है | हिन्दी ब्लॉग बनाने वाले शुरुआती लोगो के बहुत से प्रश्न होते है उन सभी प्रशनो का यंहा समाधान शायद हो जाएगा | क्यों कि इसमें ब्लॉग की शुरुआत कैसे करते है पोस्ट कैसे लिखते है इस प्रकार की समस्त जानकारी जो ब्लॉग प्रवेशिका के नाम से संजीव भाई ने लिखी थी वो सभी पोस्ट यंहा है | अन्य हिन्दी के तकनीकी ब्लॉगों की सभी महत्वपूर्ण पोस्ट के लिंक यंहा दिए गए है | जैसे हिन्दी ब्लॉग टिप्स (आशीष भाई ) ,प्रतिभास (अनुनाद सिंह जी ),रचनाकार (रवी रतलामी जी )आरम्भ (संजीव तिवारी ) आदी | अगर आप भी किसी ब्लॉगर की सहायता करना चाहते है तो उसे इस ब्लॉग का लिंक पकड़ा कर चैन की बंसी बजा सकते है वो इसकी गलियों में ज्ञानार्जन करता रहेगा | क्यों कि जिस हिन्दी ब्लॉग के तकनीकी ज्ञान कि आवश्यकता उसे है वो सभी यंहा मिल जाएगा |

     अंत में आप यदि ये जाना चाहते है कि ये ब्लॉग किसका है तो वो मुझे भी पता नहीं है | क्यों कि एस प्रकार कि सूचना इस पर कही भी नहीं दी गयी है |

Thursday, April 28, 2011

आइये फ्री में कॉल करे (खाड़ी देशो में भी )

जी हां ये सच है,अब आप किसी भी देश में फ्री कॉल कर सकते है| यंहा तक की खाड़ी देशो में भी जंहा हमारे बहुत से भारतीय भाई बंधू रहते है | कनाडा और अमरीका में फ्री बात करना तो मैंने पहले भी बताया है | लेकिन ये वेब साईट हमें सभी देशो में कॉल करने की सुविधा देती है | ये सुविधा केवल एक मिनट रहती है लेकिन आप अपने काम की बाते तो एक मिनट में भी कर सकते है ,नहीं तो दुबारा नंबर मिलाए |चाहे जितनी बार कॉल करे क्यों की इसमें बात करना एक दम बच्चो का खेल है कोइ पजीकरण भी नहीं करना पडता है |
Add caption
इसमें दिए गए बोक्स में अपने नंबर भरे और दुसरे बोक्स में जिस देश में कॉल करनी है उसका नाम चुन कर वंहा का नम्बर भर दीजिए और सबमिट के टेब पर क्लीक कीजिए | इसके बाद आपको तुरंत नीचे वाले बोक्स में एक लोकल नम्बर शो होगा उस नंबर पर आप अपने मोबाईल से मिस्ड कॉल करे तब तुरंत आपके पास जवाब में उसी नंबर से इनकमिंग कॉल आयेगी और आपका सम्बन्ध आपके दोस्त के फोन से हो जायेगा |
इसके फायदे
  • सबसे बड़ा फायदा ये है की आपको किसी भी हेडफोन और माइक की जरूरत नहीं पडती है बात आपके मोबाईल से होती है इसलिए आवाज की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है |
  • आप एक दिन में चाहे जितनी कॉल कर सकते है | 
  • आपके फोन नंबर भी छुपे हुए रहते है | आपके साथी के फोन की कॉलर आई डी में मशीन द्वारा दीये गए नम्बर दिखाई देते है यानी आप गुप्त कॉल कर सकते है |
  • सबसे बड़ी बात की ये फ्री है |
इसकी कमिया
  • कमि केवल एक है इसमें समय अभी एक मिनट का ही मिल रहा है ,(फ़ोकट में मिल रहा है इसलिए इसे नजरअंदाज किया जा सकता है | ) 

Sunday, April 24, 2011

चर्चा दो ब्लॉगों की

     आज मै आपको दो स्थानीय ब्लॉगों के बारे में बताने जा रहा हूँ | जिसमे से पहला ब्लॉग है माऊ -बाबो और दूसरा है  आवाज अपनी |

     दोनों ब्लॉगों में जो समानता है वो ये है की ये दोनों ही नयी पीढ़ी के ब्लॉगर है जो अभी अध्ययन कर रहे है | दोनों ही राजस्थान के है | दोनों ही कुंवारे है और दोनों में ही कुछ खासियत है जो मै आपके सामने ला रहा हूँ | मै नहीं चाहता की ये ब्लॉग प्रोत्साहन के अभाव में गुम हो जाए |

     माऊ बाबो ब्लॉग के ब्लॉगर है अंगद बारुपाल जी ,ये हनुमान गढ़ के गाँव रोंरावाली के रहने वाले है | अभी कोलेज में पढते है | मै यूही विचरण करते हुए इनके ब्लॉग पर पहुचा | इनके ब्लॉग पर चार पोस्ट अब तक लिखी गयी है | जिसमे इनकी सृजनशीलता की झलक मिलती है | राजस्थानी भाषा में लिखी गयी लघु पोस्ट और चित्रों का सुंदर उपयोग इनके लेखन को बहुत प्रभावशाली बनाता है | जो भी लिखा है उसमे लीक से हट कर लिखा है | मै तो इस ब्लॉग से बहुत प्रभावित हुआ हूँ | अगर आप भी राजस्थानी भाषा की थोड़ी बहुत समझ रखते है तो इस ब्लॉग से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते है |

     दूसरा ब्लॉग है आवाज अपनी जिसके ब्लॉगर है तरुण भारतीय | इन से मै आमने सामने भी मिल चुका हूँ ये हमारे गृह जिला झुंझुनू के गाँव गोविन्द पुरा के रहने वाले है | अभी इस वर्ष बी एड कर रहे है | समय समय पर इनकी वार्ता चुरू और जयपुर आकाशवाणी केन्द्र से प्रसारित होती है | इतनी कम उमर में लेखन के प्रती इन का  जज्बा काबिले तारीफ़ है | ये पतंजली योगपीठ की झुंझुनू इकाई में पदाधिकारी भी है | लोगो को योग सिखाते है |

    दोनों ब्लॉगर ऊर्जा से भरे हुए है मै इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ |

Monday, April 18, 2011

बाजरे की खीचड़ी .... मिक्सर ग्राइंडर

      आज भाटिया जी की ये पोस्ट पढ़कर मुझे अहसास हुआ की हमारे भाई जो विदेशो में रहते है उन्हें देशी खाने के लिए कितना परेशान होना पड़ता है | विदेश में रहने वालो की तो छोडिये आजकल जो शहरो में रह रहे है उन्हें भी बहुत परेशान होना पड़ता है | मजे है तो गाँव वालो के जो की आराम से देशी खाना खा सकते है |

      देशी खाने में हमारे राजस्थान के बाजरे के बने खाने का जवाब कही नहीं है | बाजरे की राबडी ,बाजरे की रोटी और बाजरे की खीचड़ी इनका कोइ मुकाबला नहीं है | जिसने भी इन्हें खाया है वो ही इसका स्वाद बता सकता है | बाजरे की खीचड़ी बनाने में एक सबसे बड़ी समस्या आती है बाजरे को कूटने की ये कुटाई का जो तरीका है वो थोड़ा अलग प्रकार का होता है इस प्रक्रिया में बाजरे के ऊपर का छिलका उतार लिया जाता है |  इस कुटाई हेतु साधन काम में लिए जाते है एक ओंखली या इमाम दस्ता(लोहे की खरल )| ये दोनों साधन प्राय शहरी लोगो के पास नहीं होते है और विदेश में रहने वालो के पास तो बिलकुल ही नहीं हो सकते है |

     लेकिन इस समस्या का हल मुझे जो सूझा वो मै आपको बताता हूँ | हो सकता है आपका भी कभी मन करे तो आप भी मिक्सर की सहायता से बना सकते है जो की वर्तमान समय में हर रसोई की आवश्यक वस्तु बन गया है | आपको मिक्सर में ब्लेड वो लगाना है जो आप लस्सी बनाने या फेटने के लिए काम में लेते है | उसमे फायदा ये है की बाजरे के टूकडे नहीं होंगे केवल उसके ऊपर का छिलका ही निकलेगा | और आपको यही करना है | आप बाजरे में थोड़ा पानी डाले और मिक्सर को एक बार कम गती से तथा बाद में तेज गती से घुमाए  | पानी की मात्रा अगर आपने सही डाली है तो मानिए की आपका काम बन गया है अब आप बाजरे में से उसके छिलके जो की अब डस्ट बन गए है ,को अलग करना है  | ये डस्ट अलग करना औरतो को अच्छी तरह से आता है इस कार्य में प्राय मर्द लोग फ़ैल हो जाते है |

      उसके बाद इस साफ़ किये गए बाजरे को जिसमे की लगभग ८० प्रतिशत आटा बन जाता है बाकी २० प्रतिशत दाने के रूप में रहता है | इस मिश्रण में ३० प्रतिशत के हिसाब से मूंग की छिलके वाली दाल डाल देंगे | बाद में इस में आप आवश्यकता अनुसार नमक और पानी मिलायेंगे जिस प्रकार आप दलिया बनाते है उसी प्रकार इसे भी बना लेंगे | आपको दलिया बनाने का तरीका समझाने की जरूरत शायद नहीं होगी | यदि आपको दलिया बनाना भी नहीं आता है तो आप इससे बनाने की चेष्टा नहीं करे | इसे आप देशी खांड और घी डाल कर खा सकते है |
अब एक चित्र जो खिचडी बनते समय मैंने अपनी रसोई में मोबाईल द्वारा लिया था |
खिचड़ी का लाइव चित्र 

  

Thursday, April 14, 2011

रामचंद्र पाकिस्तानी ...... डीडी भारती चैनल ......17 अप्रैल शाम 8 बजे

राम चन्द्र पाकिस्तानी नामक फिल्म २०१० में बनी थी | इसकी निर्देशक नंदिता दास है | यह फिल्म पाकिस्तान से भूलवश सीमा पार आने वाले बाप बेटे की कहानी है |  इस फिल्म का संगीत बहुत कर्ण प्रिय और दिल को सुकून देने वाला है |

डीडी भारती चैनल पर इसका प्रसारण १७ अप्रेल शाम आठ बजे होगा | आप अगर इस फिल्म को देखने से पहले इस फिल्म के बारे में जानना चाहते है तो आप इस फिल्म की वेबसाइट पर जा कर देख सकते है |
इस फिल्म के गाने भी मधुरता लिए है अगर आप इस फिल्म के गाने सुनना चाहते है तो इस लिंक पर जाकर ऑनलाइन भी सुन सकते है |
Download Ram Chand Pakistani Mp3 Songs  

Saturday, April 9, 2011

अपनी मेल में स्पैम से छुटकारा ..........जीमेल चैट विंडो में फोन का ऑप्सन

मेरी पिछली दो पोस्ट को पढ़ने के बाद मेरे पास काफी लोगो के फोन और मेल आये सभी अपनी शंका का समाधान जानना चाहते है |
        पहला प्रश्न ये की जी मेल खाते को स्पैम मुक्त कैसे करे ?
     आइये पहले ये जान ले की स्पैम क्या है | आपके मेल खाते में जो स्पैम होते है वो एक प्रकार का निर्देशित कमांड होता है ये आपके कंप्यूटर में किसी प्रकार की गडबड नहीं करता है लेकिन आपके जितने भी जान पहचान वाले जिनकी इमेल आई डी होते है उन्हें आपकी जानकारी के बिना ही अपनी विज्ञापन वाली मेल भेजता है जिनमे कुछ अश्लीलता भी हो सकती है | इस प्रकार की मेल आपको शर्मिंदा भी कर सकती है | कुछ मेल तो इस प्रकार की भी भेजी जाती है जिनका कोइ अर्थ ही नहीं निकलता है | और आजकल तो हिन्दी में भी आने लग गयी है पहले तो इस प्रकार की मेल विदेशी कंपनी के द्वारा  अंग्रेजी भाषा में हीआती थी किन्तु अब ये मेल हिन्दी में भी आने लग गयी है |
        इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए? ...................    सबसे पहले आप के पास अपने दोस्तों के जितने भी मेल पते है | उन्हें अपनी हार्डडिस्क में एक्पोर्ट कर सेव कर ले | जो फाईल बनेगी वो माईक्रोसोफ्ट एक्सल में खुलने योग्य बनेगी |दूसरा काम फिर ये करे की आप के दोस्तों के ई मेल पते अपने कोंटेक्ट लिस्ट में से डिलीट कर दे | जब भी आपको अपने दोस्तों को मेल भेजना हो तो उनका मेल पता आपको अपनी हार्ड डिस्क में सेव की गयी फाईल में से लेकर काम में लेवे | आपने कोंटेक्ट लिस्ट की समय समय पर जांच करके उसको डिलीट करते रहे | जब आपके ई मेल खाते में कोंटेक्ट लिस्ट ही नहीं बनेगी तो उनके यंहा आपके खाते से स्पैम मेल जाने की संभावना भी खतम हो जायेगी  |

       अब बात करते है जी मेल के चैट विंडो में फोन ऑप्सन के चालू करने की काफी लोग इस बारे में जानना चाहते थे | उसके लिए आपको ज्यादा तकनीक लगाने की जरूरत नहीं है | आपको एक सोफ्टवेयर डाऊनलोड करना है जिसका नाम ultra surf  है ये सोफ्टवेयर पोर्टेबल है मतलब की इंस्टाल करने का झंझट नहीं है | केवल रन करना पड़ता है | आप इस लिंक पर जाकर इसे डाउनलोड कर सकते है | जब आप इसे रन करते है तो आपके मोनिटर स्क्रीन के दाहिनी तरफ नीचे घड़ी के पास में एक ताले का आईकन बन जाता है | यह ताला आपके छुपे होने का संकेत है | और यह अमेरिका के सर्वर को काम में ले रहा है | अब आप अपने जी मेल को खोलिए और अपने चैट विंडो में अपने स्टेट्स को देखिये वंहा आपका फोन ऑप्सन चालू दिखेगा |

Thursday, April 7, 2011

गणगौर की विदाई (सचित्र झांकी )

हमारे कस्बे में सैकड़ो साल पुरानी परम्परा को कायम रखते हुए इस बार भी राठौड़ और शेखावत दोनों समाज ने अपनी अपनी गणगौर की सवारी निकाली | यह सवारी उनकी कोटड़ी (मोहल्ला) से शुरू होकर मुख्य मार्ग से होकर तालाब तक गयी वंहा औरतो ने अपनी पूजा अर्चना की तालाब पर पानी पिलाया गया और वापस कोटड़ी में लाकर रख दिया गया |
गणगौर माता पर जानकारी भरी पिछली पोस्ट में आपको कोइ चित्र नहीं दिखा पाया अब आप मेरे मोलिक चित्र इस पोस्ट में देख सकते है | चित्रों को बड़ा देखने हेतु उन पर डबल क्लिक करे |

ईसर जी और गणगौर माता की सवारी मेडतिया कोटड़ी से निकलते हुए


तालाब पर गणगौर माता के साथ महिलाए परिक्रमा करते हुए 

मेले में सजी धजी खिलौनों की दूकान

मेले का दृश्य

मेले में चाट वाले

तालाब पर ईसर जी और गौरा माता, विश्राम स्थल 

मेडतिया सरदार फोटोग्राफी करवाते हुए

Tuesday, April 5, 2011

वातावरण में गूंज रहे है गणगौर माता के गीत

इस पोस्ट से पहले भी मैंने इस पर्व पर एक पोस्ट लिखी थी | आजकल हमारे यंहा गाँव गली में गणगौर माता का पूजन पर्व चल रहा है | मैंने भी विचार किया की आपको इस पर्व के बारे में और ज्यादा जानकारी दे दू |
      गणगौर का यह त्योहार चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। होली के दूसरे दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) से जो नवविवाहिताएँ प्रतिदिन गणगौर पूजती हैं, वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं और दूसरे दिन सायंकाल के समय उनका विसर्जन कर देती हैं। यह व्रत विवाहिता लड़कियों के लिए पति का अनुराग उत्पन्न कराने वाला और कुमारियों को उत्तम पति देने वाला है। इससे सुहागिनों का सुहाग अखंड रहता है।
       नवरात्र के तीसरे दिन यानि कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तीज को गणगौर माता (माँ पार्वती) की पूजा की जाती है। पार्वती के अवतार के रूप में गणगौर माता व भगवान शंकर के अवतार के रूप में ईशर जी की पूजा की जाती है। प्राचीन समय में पार्वती ने शंकर भगवान को पति (वर) रूप में पाने के लिए व्रत और तपस्या की। शंकर भगवान तपस्या से प्रसन्न हो गए और वरदान माँगने के लिए कहा। पार्वती ने उन्हें ही वर के रूप में पाने की अभिलाषा की। पार्वती की मनोकामना पूरी हुई और पार्वती जी की शिव जी से शादी हो गयी। तभी से कुंवारी लड़कियां इच्छित वर पाने के लिए ईशर और गणगौर की पूजा करती है। सुहागिन स्त्री पति की लम्बी आयु के लिए यह पूजा करती है। गणगौर पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से आरम्भ की जाती है। सोलह दिन तक सुबह जल्दी उठ कर बगीचे में जाती हैं, दूब व फूल चुन कर लाती है। दूब लेकर घर आती है उस दूब से दूध के छींटे मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देती है। थाली में दही पानी सुपारी और चांदी का छल्ला आदि सामग्री से गणगौर माता की पूजा की जाती है।
      आठवें दिन ईशर जी पत्नी (गणगौर ) के साथ अपनी ससुराल आते हैं। उस दिन सभी लड़कियां कुम्हार के यहाँ जाती हैं और वहाँ से मिट्टी के बरतन और गणगौर की मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी लेकर आती है। उस मिट्टी से ईशर जी, गणगौर माता, मालिन आदि की छोटी छोटी मूर्तियाँ बनाती हैं। जहाँ पूजा की जाती है उस स्थान को गणगौर का पीहर और जहाँ विसर्जन किया जाता है वह स्थान ससुराल माना जाता है।
       राजस्थान का तो यह अत्यंत विशिष्ट त्योहार है। इस दिन भगवान शिव ने पार्वती को तथा पार्वती ने समस्त स्त्री समाज को सौभाग्य का वरदान दिया था। गणगौर माता की पूरे राजस्थान में पूजा की जाती है। राजस्थान से लगे ब्रज के सीमावर्ती स्थानों पर भी यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। चैत्र मास की तीज को गणगौर माता को चूरमे का भोग लगाया जाता है। दोपहर बाद गणगौर माता को ससुराल विदा किया जाता है, यानि कि विसर्जित किया जाता है। विसर्जन का स्थान गाँव का कुँआ या तालाब होता है। कुछ स्त्रियाँ जो विवाहित होती हैं वो यदि इस व्रत की पालना करने से निवृति चाहती हैं वो इसका अजूणा करती है (उद्यापन करती हैं) जिसमें सोलह सुहागन स्त्रियों को समस्त सोलह श्रृंगार की वस्तुएं देकर भोजन करवाती हैं |
इस दिन भगवान शिव ने पार्वती जी को तथा पार्वती जी ने समस्त स्त्री समाज को सौभाग्य का वरदान दिया था। सुहागिनें व्रत धारण से पहले रेणुका (मिट्टी) की गौरी की स्थापना करती है एवं उनका पूजन किया जाता है। इसके पश्चात गौरी जी की कथा कही जाती है। कथा के बाद गौरी जी पर चढ़ाए हुए सिंदूर से स्त्रियाँ अपनी माँग भरती हैं। इसके पश्चात केवल एक बार भोजन करके व्रत का पारण किया जाता है। गणगौर का प्रसाद पुरुषों के लिए वर्जित है।
     गनगौर पर विशेष रूप से मैदा के गुने बनाए जाते हैं। लड़की की शादी के बाद लड़की पहली बार गनगौर अपने मायके में मनाती है और इन गुनों तथा सास के कपड़ो का बायना निकालकर ससुराल में भेजती है। यह विवाह के प्रथम वर्ष में ही होता है, बाद में प्रतिवर्ष गनगौर लड़की अपनी ससुराल में ही मनाती है। ससुराल में ही वह गणगौर का उद्यापन करती है और अपनी सास को बायना, कपड़े तथा सुहाग का सारा सामान देती है। साथ ही सोलह सुहागिन स्त्रियों को भोजन कराकर प्रत्येक को सम्पूर्ण श्रृंगार की वस्तुएं और दक्षिण दी जाती है।
गणगौर  माता की कथा
भगवान शंकर तथा पार्वती जी नारद जी के साथ भ्रमण को निकले। चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन एक गाँव में पहुँच गए। उनके आगमन का समाचार सुनकर गाँव की श्रेष्ठ कुलीन स्त्रियाँ उनके स्वागत के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाने लगीं। भोजन बनाते-बनाते उन्हें काफ़ी विलंब हो गया किंतु साधारण कुल की स्त्रियाँ श्रेष्ठ कुल की स्त्रियों से पहले ही थालियों में हल्दी तथा अक्षत लेकर पूजन हेतु पहुँच गईं। पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को स्वीकार करके सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया।
वे अटल सुहाग प्राप्ति का वरदान पाकर लौटीं। बाद में उच्च कुल की स्त्रियाँ भांति भांति के पकवान लेकर गौरी जी और शंकर जी की पूजा करने पहुँचीं। उन्हें देखकर भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा, 'तुमने सारा सुहाग रस तो साधारण कुल की स्त्रियों को ही दे दिया। अब उन्हें क्या दोगी?'
पार्वत जी ने उत्तर दिया, 'प्राणनाथ, आप इसकी चिंता मत कीजिए। उन स्त्रियों को मैंने केवल ऊपरी पदार्थों से बना रस दिया है। परंतु मैं इन उच्च कुल की स्त्रियों को अपनी उँगली चीरकर अपने रक्त का सुहागरस दूँगी। यह सुहागरस जिसके भाग्य में पड़ेगा, वह तन-मन से मुझ जैसी सौभाग्यशालिनी हो जाएगी।'
जब स्त्रियों ने पूजन समाप्त कर दिया, तब पार्वती जी ने अपनी उँगली चीरकर उन पर छिड़क दिया, जिस जिस पर जैसा छींटा पड़ा, उसने वैसा ही सुहाग पा लिया। अखंड सौभाग्य के लिए प्राचीनकाल से ही स्त्रियाँ इस व्रत को करती आ रही हैं।
इसके बाद भगवान शिव की आज्ञा से पार्वती जी ने नदी तट पर स्नान किया और बालू के महादेव बनाकर उनका पूजन करने लगीं। पूजन के बाद बालू के ही पकवान बनाकर शिवजी को भोग लगाया। इसके बाद प्रदक्षिणा करके, नदी तट की मिट्टी के माथे पर टीका लगाकर, बालू के दो कणों का प्रसाद पाया और शिव जी के पास वापस लौट आईं।
इस सब पूजन आदि में पार्वती जी को नदी किनारे बहुत देर हो गई थी। अत: महादेव जी ने उनसे देरी से आने का कारण पूछा। इस पर पार्वती जी ने कहा- 'वहाँ मेरे भाई-भावज आदि मायके वाले मिल गए थे, उन्हीं से बातें करने में देरी हो गई।'
परन्तु भगवान तो आख़िर भगवान थे। वे शायद कुछ और ही लीला रचना चाहते थे। अत: उन्होंने पूछा- 'तुमने पूजन करके किस चीज का भोग लगाया और क्या प्रसाद पाया?'
पार्वती जी ने उत्तर दिया- 'मेरी भावज ने मुझे दूध-भात खिलाया। उसे ही खाकर मैं सीधी यहाँ चली आ रही हूँ।' यह सुनकर शिव जी भी दूध-भात खाने के लालच में नदी-तट की ओर चल पड़े। पार्वती जी दुविधा में पड़ गईं। उन्होंने सोचा कि अब सारी पोल खुल जाएगी। अत: उन्होंने मौन-भाव से शिव जी का ध्यान करके प्रार्थना की, 'हे प्रभु! यदि मैं आपकी अनन्य दासी हूँ तो आप ही इस समय मेरी लाज रखिए।'
इस प्रकार प्रार्थना करते हुए पार्वती जी भी शंकर जी के पीछे-पीछे चलने लगीं। अभी वे कुछ ही दूर चले थे कि उन्हें नदी के तट पर एक सुंदर माया महल दिखाई दिया। जब वे उस महल के भीतर पहुँचे तो वहाँ देखते हैं कि शिव जी के साले और सलहज आदि सपरिवार मौजूद हैं। उन्होंने शंकर-पार्वती का बड़े प्रेम से स्वागत किया।
वे दो दिन तक वहाँ रहे और उनकी खूब मेहमानदारी होती रही। तीसरे दिन जब पार्वती जी ने शंकर जी से चलने के लिए कहा तो वे तैयार न हुए। वे अभी और रूकना चाहते थे। पार्वती जी रूठकर अकेली ही चल दीं। तब मजबूर होकर शंकर जी को पार्वती के साथ चलना पड़ा। नारद जी भी साथ में चल दिए। तीनों चलते-चलते बहुत दूर निकल गए। सायंकाल होने के कारण भगवान भास्कर अपने धाम को पधार रहे थे। तब शिव जी अचानक पार्वती से बोले- 'मैं तुम्हारे मायके में अपनी माला भूल आया हूँ।'
पार्वती जी बोलीं -'ठीक है, मैं ले आती हूँ।' किंतु शिव जी ने उन्हें जाने की आज्ञा नहीं दी। इस कार्य के लिए उन्होंने ब्रह्मापुत्र नारद जी को वहाँ भेज दिया। नारद जी ने वहाँ जाकर देखा तो उन्हें महल का नामोनिशान तक न दिखा। वहाँ तो दूर-दूर तक घोर जंगल ही जंगल था।
इस अंधकारपूर्ण डरावने वातावरण को देख नारद जी बहुत ही आश्चर्यचकित हुए। नारद जी वहाँ भटकने लगे और सोचने लगे कि कहीं वह किसी ग़लत स्थान पर तो नहीं आ गए? सहसा बिजली चमकी और नारद जी को माला एक पेड़ पर टंगी हुई दिखाई दी। नारद जी ने माला उतार ली और उसे लेकर भयतुर अवस्था में शीघ्र ही शिव जी के पास आए और शिव जी को अपनी विपत्ति का विवरण कह सुनाया।
इस प्रसंग को सुनकर शिव जी ने हंसते हुए कहा- 'हे मुनि! आपने जो कुछ दृश्य देखा वह पार्वती की अनोखी माया है। वे अपने पार्थिव पूजन की बात को आपसे गुप्त रखना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने झूठ बोला था। फिर उस को सत्य सिद्ध करने के लिए उन्होंने अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से माया महल की रचना की। अत: सचाई को उभारने के लिए ही मैंने भी माला लाने के लिए तुम्हें दुबारा उस स्थान पर भेजा था।'
इस पर पार्वतीजी बोलीं- 'मैं किस योग्य हूँ।'
तब नारद जी ने सिर झुकाकर कहा- 'माता! आप पतिव्रताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं। आप सौभाग्यवती आदिशक्ति हैं। यह सब आपके पतिव्रत धर्म का ही प्रभाव है। संसार की स्त्रियाँ आपके नाम का स्मरण करने मात्र से ही अटल सौभाग्य प्राप्त कर सकती हैं और समस्त सिद्धियों को बना तथा मिटा सकती हैं। तब आपके लिए यह कर्म कौन-सी बड़ी बात है?
हे माता! गोपनीय पूजन अधिक शक्तिशाली तथा सार्थक होता है। जहाँ तक इनके पतिव्रत प्रभाव से उत्पन्न घटना को छिपाने का सवाल है। वह भी उचित ही जान पड़ती है क्योंकि पूजा छिपाकर ही करनी चाहिए। आपकी भावना तथा चमत्कारपूर्ण शक्ति को देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई है।
मेरा यह आशीर्वचन है- 'जो स्त्रियाँ इस तरह गुप्त रूप से पति का पूजन करके मंगल कामना करेंगी उन्हें महादेव जी की कृपा से दीर्घायु पति का संसर्ग मिलेगा तथा उसकी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होगी। फिर आज के दिन आपकी भक्तिभाव से पूजा-आराधना करने वाली स्त्रियों को अटल सौभाग्य प्राप्त होगा ही।'
यह कहकर नारद जी तो प्रणाम करके देवलोक चले गए और शिव जी-पार्वती जी कैलाश की ओर चल पड़े। चूंकि पार्वती जी ने इस व्रत को छिपाकर किया था, उसी परम्परा के अनुसार आज भी स्त्रियाँ इस व्रत को पुरूषों से छिपाकर करती हैं। यही कारण है कि अखण्ड सौभाग्य के लिए प्राचीन काल से ही स्त्रियाँ इस व्रत को करती आ रही हैं। (उपरोक्त लेख मेरी मौलिक रचना नहीं है | यह पहले भारत कोश में लिखा गया था | यंहा पर चित्र अभी नहीं लगाए गए है चित्र गणगौर विसर्जन के दिन लगाऊँगा उस दिन हमारे यंहा मेला भी लगता है | चित्र और वीडियो हेतु देखने हेतु आप दुबारा यंहा जरूर आइये  | )


Wednesday, March 30, 2011

बिना एक पैसा खर्चे अपनी कॉल रेट कम करे (ट्रिक )

सचमुच आप भी अपनी कॉल रेट कम कर सकते जैसा की मेरे कुछ दोस्तों ने किया है | कल हमारेब्लॉगर दोस्त सुरेन्द्र भाम्बू बैठे थे उनसे मोबाइल की कॉल दरों के बारे में विचार विमर्श चल रहा था | उन के साथ उन का भांजा भी था उसने मुझे एक ट्रिक बताई जिससे उसने बिना एक पैसा खर्च किये अपनी कॉल रेट कम करवा ली |
तरकीब  यह है की आपको अपने मोबाईल से PORT लिख कर 1900 नंबर पर एक एसएमएस करना है | फिर कुछ समय इन्तजार करना है | २४ घंटे के अंदर आपके पास आपके मोबाइल सर्विस प्रोवाईडर कंपनी के प्रतिनिधि का फोन आएगा उसमे आपसे आपके मौजूदा सर्विस  प्रोवाईडर को बदलने का कारण पूछा जाएगा तो आपको कारण में उन की कॉल रेट ज्यादा का हवाला दे सकते है | और आप उन्हें यह कह सकते  की फला कंपनी आपसे भी कम कॉल दर लेती है | वो आपसे कॉल दर कम करने पर सहमत हो जायंगे और आपकी सर्विस चालू रखना चाहेंगे |
अभी  मोबाईल कंपनियों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा चल रही है जिसका आपको फायदा मिल सकता है |
यह  ट्रिक यंहा राजस्थान में एयरटेल में आजमा कर देखी है काम कर जाती है | आप भी अपने क्षेत्र में आजमा सकते है |





Monday, March 28, 2011

ताऊ ताई का झगड़ा ....बचपन की फिसल पट्टी

     मेरा बचपन अपने छोटे से कस्बे(बगड ) में ही बीता है | बचपन से लेकर आजतक कस्बे में बहुत से बदलाव आ गए है | गांव के मध्य भाग में सूनापन बढ़ा है जबकि बाहरी हिस्से में लोग दूर दूर तक जंहा खेतीबाड़ी करते थे वंहा कोंक्रीट और सीमेंट के पेड़ लगा रहे है | पुराने मकान जिनमे सेठ साहूकार बूढ़े बुजुर्ग रहते थे आजकल उनके बच्चे उनमे रहना पसंद नहीं करते है | इसलिए वो या तो किरायेदारों के हवाले है या उनपर किसी भू माफिया ने कब्जा कर लिया या वो सुनसान पड़े अपना दर्द बयाँ कर रहे है | उन हवेलियों का सूना आँगन आज भी अपने मालिक की राह तक रहा है |
     मेरी स्कूल के रास्ते में ऐसा ही एक घर आता है जिसे देख मै अपने बचपन की रोचक घटनाओं को याद कर लेता हूँ | उस घर में बुजुर्ग दंपति रहते थे | सेठ जी का नाम शायद मालीराम खटोड था | मै जब भी उनके घर के पास से गुजरता था तो एक काम मै नित्य रूप से करता था उनके दरवाजे के पास की दिवार जो एक फिसल पट्टी के रूप में है उस पर बैठ कर फिसलने का आनंद लेता था| इसका चित्र आप नीचे देख रहे है | इस आनंद में मेरे बचपन के बहुत से दोस्त भी रहते थे |
ताऊ का घर

     उस आनंद को प्राप्त करने के बाद उसके प्रतिफल में माँ द्वारा प्रसाद भी मिलता था | वो रोजाना मेरी निकर देख कर समझ जाती थी की आज भी मैंने उस दीवार पर फिसलने का आनंद उठाया है और बदले मे वो हाथ उठाती थी | उस समय निकर ही पहनते थे पाचवीं कक्षा तक निकर का ही चलन था आजकल के बच्चे तो पैदाइशी जींस पेंट धारक होते है |
     कभी कभी वंहा पर बुजुर्ग ताऊ ताई का रूठना मनाना चलता था | रूठने का हक हमेशा ताई का ही रहता था | ताऊ बेचारा मनाता था मेरे स्कूल से लौटने के समय उनका दोपहर के भोजन का समय होता था ताई रूठ कर बाहर सीढीयों पर बैठ जाती थी | ताऊ खाना खाने के लिए उसकी मिन्नते करता था | ताऊ के कहे हुए शब्द आज भी मेरे मस्तिष्क पटल पर अंकित है | अरे भागवान खाना खा लो झगड़ा मुझसे है खाने से थोड़े ही है | तुम्हारी पसंद के गुलगुले(गुड और आटे द्वारा बनाए जाते है ) बनाए है |  ये संवाद आज  मेरी  वैवाहिक जिंदगी में भी कभी कभी बढ़िया काम करते है |

Tuesday, March 22, 2011

स्पाइस ने अपना प्रोजेक्टर फोन लोंच किया

ये एक खुशखबरी है की ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी अब अपने ड्राईंग रूम को इस फोन की मदद से एक बढ़िया थियेटर में बदल पायेंगे | इस फोन को लॉच किया है स्पाइस ने जिसका मोडल नंबर है M 9000 पॉपकॉर्न  इससे पहले भी बहुत सी कंपनियों ने इस प्रकार के फोन लॉन्च किये थे लेकिन ये फोन उन सब फोन से सस्ता है इसकी कीमत अभी 6999 रूपये है | इसमें इनबिल्ट अनोलोग टीवी की सुविधा भी है जिसे आप बड़े परदे पर भी देख सकते है |
इसकी विशेषताये -

  • 17.3 मिमी मोटाई और वजन 123ग्राम है 
  • 2.3 inch QVGA डिस्प्ले 
  • 320 x 240 पिक्सल रिजोल्यूशन 
  • GPRS/EDGE
  • Bluetooth 2.1
  • 3.2 मेगापिक्सल कैमरा 
  • वीडियो रिकार्डिंग 
  • ऑडियो वीडियो प्लेयर 
  • स्टीरियो एफएम रेडियो विथ रिकार्डिंग
  • वेबकेम
  • डोक्युमेंट विवर
  • 16 GB तक की एक्सपेंडेबल  मेमोरी
  • 87 MB की इंटरनल मेमोरी 
  • up to 3.5 घंटे का टाक टाईम 
  • up to 300 घंटे का स्टेंड बाई टाइम 
  • 1200 mAh बैटरी  
इस फोन की नकारात्मक बात ये है की इसका वजन और मोटाई सामान्य फोन से ज्यादा है लेकिन इसका ग्रामीण क्षेत्र के लोगो पर कम प्रभाव पडेगा उन्हें तो घर पर ही बड़े परदे पर सिनेमा का मजा लेना है |

Tuesday, March 15, 2011

गूगल वोईस अब भारत के लिए भी

पिछले दिनों मेरी इमेल आई डी में स्पैम की वजह से कुछ समस्याए आ आरही थी जिसके चलते मैंने उसमे सफाई अभियान चलाया था . कैसे किया ये मै अगली पोस्ट में लिखूंगा | लेकिन आप के लिए खुशखबरी है की अब गूगल वोईस भारत में भी अपनी सेवाए दे ने जा रहा है | कल थोड़ी देर उसकी सेवा मेरे खाते में चालू थी उसके बाद बंद हो  गयी | आज लगातार जारी है इसका मतलब ये है की गूगल अपनी सेवाए जो अमेरीका और कनाडा में दे रहा है वो ही सेवा अब भारत में भी देने जा रहा है |


इसका मतलब है की अब आप भी अपने अमरीका वाले या कनाडा वाले मित्रों से रिश्तेदारों से फ्री में उन के मोबाईल पर या लैंडलाइन पर अपने जीमेल खाते से फोन कर पायेंगे | |
अगर आपके खाते में दिखाए गए चित्र के जैसा नहीं दीखता है तो आप मुझे मेल करे या टिप्पणी दे | उसके लिए एक जुगाड जो पहले से ही उपलब्ध  है ,वो बता दूंगा |

Thursday, March 10, 2011

मेरी ई मेल आई डी हैक की गयी है

सभी मित्रों को सूचित करता हूँ की मेरे मेल खाते से कोइ भी मेल मिले तो उसे ना खोले अगर आप खोलते है और  आपका कोइ नुकशान होता है तो मुझे जिम्मेदार ना ठहराए . मै आपसे फोन द्वारा ही सम्पर्क कर लूंगा .
मुझे काफी बलोगर मित्रों द्वारा सूचना मिली थी की उन्हें विज्ञापन वाले लिंक जिनमें कुछ अश्लील भी है की मेल मेरे खाते द्वारा मिली है | मैंने अपने खाते की जांच की और पाया की किसी पाकिस्तानी आई पी द्वारा मेरे मेल खाते में सेंध लगाई गयी है | शायद किसी स्पैम के द्वारा |  जब तक ये सुरक्षा का अच्छा बन्दों बस्त  ना हो जाए तब तक मेहरबानी कर के मेरे द्वारा भेजी जा रही किसी भी मेल को ना ही खोले |

Monday, March 7, 2011

फागुन के रंग राजस्थानी धमाल के संग

पाठक मित्रों इस बार बेमौसम की बरसात ने फाल्गुन का मजा कुछ कम कर दिया है | अब कुछ कुछ रंग शेखावाटी में दिखाई दे रहा है | तो आपका मन भी राजस्थानी धमाल सुनने को मचलने लगा होगा  | तो आइये धमाल का मजा ले |

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कुछ ओर भी है






Sunday, March 6, 2011

ई मेल द्वारा अचार मिला है

जी हा आज सुबह सुबह मेल चेक कर रहा था | तो ये अचार वाली मेल मिली है | इस अचार का स्वाद आप भी पराठें के साथ खा कर बताये कैसा है ? आजकल मार्केट में बहुत चल रहा है ओर मांग दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है | ताऊ का प्रतिष्ठान भी इस अचार को बेचने की जुगाड़ में है |

Sunday, February 20, 2011

जब मै भीख मांगता था

     शीर्षक देख कर चौकिये मत | ऐसा भी समय था जब मै भीख मांगता था | इस बात को बताते हुए मुझे पहले संकोच हुआ लेकिन आज बलोग जगत में सब अपने है किसी से बताते हुए क्या हिचकिचाना |

मांगन मरण सामान है मत मांगो भीख |
मांगन से मरना भला ये सदगुरू कि सीख ||
   
      ये सद्गुरुजी का आधा उपदेश है क्यों कि भीख मांगना हमेशा ही बुरी बात नहीं होती है कभी कभी भीख मांगना अच्छा कार्य भी माना जाता है |बात काफी पुरानी है शायद 1980 के आस पास की है | मै प्राथमिक स्कूल में पढता था | उस समय बच्चो के पास समय बिताने का तरीका या आमोद प्रमोद का तरीका भी थोड़ा अलग था | हम बच्चे, मोहल्ले भर के जानवरों पर विशेष कृपा दृष्टी रखते थे ,विशेषकर कुत्तों पर | मोहल्ले के कुत्तों को दुसरे मोहल्ले के कुत्तों से लड़वाने में भी मजा आता था खूब हूटिंग करते थे |

      इसी सिलसिले में जब कोइ कुतिया का प्रसव होता था तब मोहल्ले के बच्चे इकट्ठे होकर उस की सेवा करते थे |  उसके रहने खाने की व्यवस्था की जाती थी | सर्दी से बचाने का इंतजाम किया जाता था | इन सब कार्य हेतु जो सामग्री लगती थी उसके लिए हम भीख मांगते थे |

      ये भीख माँगना भी अलग तरह से होता था | एक कड़ाही का इंतजाम किया जाता उस कड़ाही को दो बच्चे दोनों तरफ से पकड़ते और साथ में पूरा दलबल रहता था हर घर पर जाकर पूरी लय और राग के साथ एक पध बोला जाता था| जो बोला जाता था वो मै भूल गया हूँ इसका सार ये था कि गृह मालिक को ये बताना कि मोहल्ले में कुतिया के प्रसव हेतु सामग्री जुटा रहे है | पध को सुनकर गृह मालिक अपनी क्षमतानुसार हमें भीख देता था | जिसमें आटा,तेल,गुड़,पुराना कपड़ा आदि होता था अगर कोइ दरियादिल होता तो नगद भी मिल जाता था|ये क्रम 10-15 रोज तक चलता था |

      आजकल पशुओं के प्रति प्रेम जन साधारण में कम हो गया है | बच्चों का बचपन उनके कैरियर कि चिंता में घुल गया है | आवारा कुत्ते भगवान भरोसे रह रहे है | काले कुत्तों की ख़ातिर तवज्जो फिर भी शनिवार को हो जाती है | बाकी बेचारे भगवान भरोसे है |

Wednesday, February 16, 2011

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण (व्यंग्य)

(ये पोस्ट हमारे अजीज बाबू के.जी.महेश्वरी जी ने ईमेल के द्वारा भेजी है)

1.
सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गया, सो मर गया' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.
. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.


3.
नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.


4.
अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.

5.
हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का 'लाफिंग बुद्धा' था.


6.
नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.


7.
भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.


8.
सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में 'कौन बनेगा करोड़पति' ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.


9.
महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और वीरू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी.