आज कुछ लिखने का मन नहीं था केवल पढ़ ही रहा था | आजकल वैसे भी लिखने का मन नहीं करता है | कुछ पारिवारिक समस्याओं के कारण कुछ व्यस्तता के कारण लिखने का काम नहीं हो पा रहा है | वैसे भी हम कौन से कवी है या साहित्यकार है अगर होते भी तो कौन सा तीर मार लेते पड़े रहते किसी अखबार के दफ्तर के किसी कोने में ||
अब आप ये चित्र देखिये यह मैंने अभी एक मिनट पहले लिए है | मेरी दूकान में बैठे बैठे मुझे जो प्रकृति का नजारा दिखा वही मै आपको दिखा रहा हूँ | चित्र नोकिया २७३० क्लासिक २ मेगा पिक्सल से लिए गए है |चित्र को बड़ा देखने के लिए उस पर क्लीक करे |
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| चित्र नम्बर १ |
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| चित्र नंबर २ |
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| चित्र नंबर ३ |