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Sunday 23 October 2011

पहली हवाई यात्रा,शारजहा ,दुबई ,अफगानिस्तान

पाठक मित्रो पिछली पोस्ट में लिखा था वो एक सूचना मात्र थी अब मै आपको विस्तार से बताने के लिए हाजिर हूँ , मेरी यात्रा का प्रोग्राम काफी दिन पहले ही बनने लग गया था लेकिन मेरे लायक कोइ जॉब का अवसर नहीं मिल रहा था इस लिए थोडा समय लग रहा था मेरे एजेंट ने जो की हमारे शेखावाटी क्षेत्र का ही है उसने मुझे सूचना दी की आपका जाने के लिए वीसा और टिकट का इंतजाम हो गया है आप पैसे का इंतजाम कर के आ जाओ | जी हां बिना रूपये दिए आप का विदेश में नौकरी लगना काफी टेढ़ी खीर है | कैसे है वो भी मै आपको बताऊंगा |-
यात्रा की सारी तैयारी पूरी की जैसे की नया बढ़िया बैग नए अच्छे कपडे  ,जी हां एजेंट ने बताया की अगर आपके कपडे बढ़िया नहीं हुए और बैग काम चलाऊ दिखा तो आपको एयरपोर्ट से वापस भेजा जा सकता है | अब भला बताइये मेरे पास वैध ट्यूरिस्ट वीसा हो और टिकट हो तो मुझे वापस क्यों भेजा जाएगा लेकिन ये भी एक कटु सच है बहुत से लोग को एयरपोर्ट से वापस भेजा गया है | बहुत से सवाल जवाब किये जाते है दुबई क्यों जा रहे हो वंहा क्या कम है तुम्हारा कोइ रिश्तेदार है क्या वंहा पर किस कंपनी में रहता है फोन नम्बर क्या है ? वगैरा वगैरा  उनसे भी अगर अगर उनको संतोष नहीं हुआ तो कहेंगे अरे हमें पता है तुम कोइ पर्यटक नहीं हो भाग जाओ इधर से | 
खैर मेरे साथ  एसी  कोई बात नहीं हुई पहली हवाई यात्रा थी सो सोच रहा था की भाटिया जी जैसा कोइ नेक बन्दा मिल जाए तो सफ़र में आसानी रहे लेकिन एसा बन्दा मिलना मुश्किल है सोच रहा था की दुबई में अंगरेजी ही बोलनी पड़ेगी और हमारा विदेशी भाषा में तो क्या अपनी देशी भाषा में भी बारह बजा हुआ है | खैर जैसे तैसे पहुच गए हवाई जहाज में लेकिन जब सीट बेल्ट बंधने लगे तो मुश्किल हो गयी देखा तो दोनों सीरे एक ही जैसे है काफी दिमाग लगाया लेकिन जब समझ नहीं पाए तो बाजू वाले से पूछा जो शायद हिन्दी समझता ही था | उसने मुझे बताया की आप ने बेल्ट का  एक सीरा उसका ले रखा है  | इस लिए आप दोनों सीरो को ढूंढिए  | मतलब ये की आप के बारे कंही न कही से पता चल जाता है की आप की ये पहली हवाई यात्रा है | उसके बाद तो तीन घंटे की यात्रा कब पूरी हुई पता ही नहीं चला | हां ये भी बता दू की टिकट एजेंट ने बनवाई थी सो सस्ते के चक्कर में एयर अरबिया की थी जिसमे यात्री को पानी के लिए भी नहीं पूछा जाता है खाना पीना तो दूर की बात है | 
शारजहा  में हवाई अड्डे पर आई स्केनिंग के समय बहुत मुश्किल हुई यंहा वो बन्दा मुझसे बार कह रहा है की आँख को और खोलो और खोलो अब समझ नहीं पा रहा था की आँख को ज्यादा कैसे खोला जाए | जैसे तैसे वो भी किया |
बाहर निकला तो सोचा की कोइ मुझे लेने आयेगा लेकिन यंहा मुझ जैसे आने वालो को कोइ लेने नहीं आता है | एजेंट को फोन कैसे किया जाए ये समझ  में नहीं आ रहा था | फोन का कार्ड खरीदा लेकिन उसे काम में लेना ना आने की वजह से वो भी बेकार साबित हुआ फिर एक नेक बन्दे ने मिस काल लगाने के लिए दे दिया और एजेंट से बात हुआ तो उसने पता बताया और कहा की आप इस जगह पर चले जाओ | जैसे तैसे बस पकड़ कर वंहा पहूचा तब तक मै अंगरेजी की ही टांग तोड़ रहा था | 
कमरे पर पहुँचा तो वंहा हालत और भी खराब थी | एक कमरे में १० आदमी रह रहे थी १२ बाई १४ के कमरे में ठीक से पैर भी सीधे नहीं किये जा पा रहे थे | रोजाना रोटी सब्जी खने वाले व्यक्ति को केवल दाल चावल खाने को मिल रहा था | ये खाना रहना सब एजेंट के खर्चे पर था लेकिन मै इसे खाने पीने का आदि नहीं होने की वजह से अपने खर्चे पर ही खाना खा रहा था | एक समय का ठीक ठाक खाना खाने में १०० रूपये खर्च हो रहे थे | काम कब होगा इसका भी कोइ ठिकाना नही था | वीसा एक महीने का ही था पीसीसी (पुलिस कलियेरेंस सर्टिफिकेट ) भी तीन महीने का ही लिया जाता है | कुछ लोगो का वो भी एक्पायर हो जाता है मेरा तो कोइ झंझंट नहीं था क्यों की मैंने ताजा ही बनवाया था | हां जब जयपुर पी सी सी बनवाने  गया तब अपने तकनीक के महारथी आशीष भाई से भी मुलाक़ात कर ही ली   | 
खैर जैसे तैसे २६ दिन शारजहा में गुजारे उसके बाद सूचना आई की मेडिकल के लिए जाना है | मेडिकल के लिये कम्पनी ने एक हस्पताल का पता दे रखा है जिसमे खर्चा एम्पलोई को देना होता है शायद तीस हजार के आस पास लगता है लेकिन हमने तो पहले ही एजेंट को दे रखा था | सो वंहा खर्चा भे उसने ही  दिया  |  दुबई के एजंट के पास यंहा भारत के बहुत से एजेंट अपने आदमी भेजते है | दुबई वाले एजेंट लोग इस मामले में आदमी लोगो का शोषण बहुत करते है | अच्छा खाना नाही मिलता  अच्छा मकान नहीं मिलता | बहुत सारी समस्या होती है |मेरे एजेंट ने भी हमारा धार्मिक शोषण किया वो मै अगली पोस्ट में लिखूंगा |