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Tuesday 28 December 2010

बहुत उपयोगी है सहजन का पेड़-various use of drumstick tree

     सहजन का पेड़ भारत वर्ष में बहुतायत से पाया जाता है | इसके लिए ज्यादा ठण्ड नुकसान दायक है गर्मी कितनी भी हो झेल लेता है | बहुत दिनों से सोच रहा था इस पेड़ के बारे में लिखने के लिए लेकिन किसी न किसी कारण से ये पोस्ट लिखने का कायक्रम आगे खिसकता रहा |
सहजन का पेड़ फूल और फली के साथ

     सहजन का अंग्रेजी नाम ड्रमस्टिक,संस्कृत नाम सोभांजना, आयुर्वेद में मोक्षकाद्व और वानस्पतिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा (moringa oleifera ) है | सहजन के बारे में काफी वैज्ञानिक खोजे हुई है | और बहुत से परिणाम भी निकाले गए है |
सहजन के बारे में कुछ निम्न तथ्य है :-

  • फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में भी सहजन की काफ़ी माँग है।
  • दक्षिण भारतीय लोग इसके फूल, पत्ती का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में साल भर करते हैं।
  • इस पौधे के सभी भागों का उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता है।
  • सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं।
  • इसमें दूध की तुलना में ४ गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।
  • सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।  
     ये तो थी तथ्यों की बात अब मै बताता हूँ इसका देशी स्टाइल में फायदा | मेरे घर में पांच छ साल से से इसका पेड़ है | इसका पेड़ लगाना बहुत ही आसान है | इसका पेड़ इतना आसानी से लग जाता है की आप को यकीन नहीं होगा की जिस झोपडी के बीम में इसकी लकड़ी का उपयोग किया जाता हो उसमे भी बगैर मिट्टी के ही पत्तियां फूट नि्कलती है | और यहां तक की एक पेड़ को मैंने एक जगह से दूसरी जगह स्थनांतरित भी किया था जिसका तना तकरीबन दो फुट परीधी का था और वजन लगभग आधा टन था | और उस तने को स्थान ना मिलने की वजह से तीन महीने तक धुप में बगैर पानी और मिट्टी के जमीन पर चित पडा रहा था | उस पर एक भी पत्ती नहीं थी | उस तने को जब तीन महीने बाद खड़ा कर मिट्टी में दबाया गया और पानी दिया तो उसमे भी अंकुरण हुआ और पेड़ फिर तैयार हो गया जिसे आप तस्वीर में देख सकते है |
हमारे घर मे सहजन का वो पेड़ जो स्थनांतरित किया हुआ है 

     अगर आपको मई के महीने में धूप से बचाव हेतु पेड़ चाहिए तो आप जनवरी में इसकी एक शाख जो तकरीबन दस फुट बड़ी हो का वृक्षारोपण कर सकते है तो ये तैयार होकर मई के महीने चारपाई डालकर सोने हेतु छाया दे देगी |कहने का अर्थ ये है की ये बहुत जल्दी विकास करता है |

     इसके फूलो की सब्जी मुझे बहुत पसंद है ,थोड़ा मेहनत वाला काम जरूर है लेकिन स्वाद एक बार जिसे लग जाए वो इसको जिन्दगी भर नहीं भूल सकता है | सब्जी बनाने की विधी -:
इसके फूलों को जो खिले ना हो उनको तोड़ लीजिए कडाही में तेल गर्म कीजिए उसमे प्याज अदरक लहसुन हरी मिर्च आदि भून लीजिये | उसमे सब्जी का मसाला यथा लाल मिर्च धनिया पाउडर हलदी,नमक आदि पानी के साथ मिक्स करके डाल देवे | जब मसाला पक जाए तब उसमे सहजन के फूल(कलियाँ) डाल देवे थोड़ा पानी और मिला देवे जो की पकने पर जल जाता है,अगर आप चाहे तो इसमें टमाटर भी डाल सकते है या फिर पकने के बाद थोड़ा टमाटर सॉस भी मिलाया जा सकता है | तीन मिनट बाद सब्जी को तैयार होने के बाद चूल्हे से उतार लेवे | आपकी लाजवाब सब्जी तैयार है | ये सब्जी जितनी स्वादिष्ट होती है उतनी ही गुणकारी भी होती है | इस सब्जी को बदहजमी वाले,मधुमेह वाले ,ह्रदय रोग के मरीज भी आराम से खा सकते है | इसकी फली की सब्जी भी इसी प्रकार से बनती है अंतर केवल इतना है की फली की सब्जी में पानी की मात्रा ज्यादा रखते है जिससे चावल के साथ भी खाया जा सकता है |
इन फूलों और  कलियों को सब्जी हेतु तोड़ा गया है 

     इसके फूल, फली व पत्तों में इतने पोषक तत्त्व हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के मार्गदर्शन में दक्षिण अफ्रीका के कई देशों में कुपोषण पीडित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती व प्रसूता महिलाओं व वृद्धों के शारीरिक पोषण के लिए यह वरदान माना गया है। हमारे यंहा भी कैन्सर व पेट आदि शरीर के आभ्यान्तर में उत्पन्न गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ो में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है। जोड़ो का दर्द वायु विकार के कारण होता है | और सहजन वायु नाशक माना जाता है|सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से विषाणु जनित रोग चेचक के होने का खतरा टल जाता है।

     अब आते है पानी साफ़ करने वाली बात पर | इस से पहले भी पानी के शुद्धीकरण के लिए मैंने एक पोस्ट लिखी थी | पानी के शुद्धीकरण के लिए ये उपाय भी आप आजमा सकते है | माइक्रोबायलोजी के करेंट प्रोटोकॉल में कम लागत में पानी को साफ करने की तकनीक प्रकाशित की गई है। यह तकनीक आसान और सस्ती है। इस तकनीक की मदद से विकासशील देशों में जल जनित रोगों से बड़े पैमाने पर होने वाली मौत की घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इस तकनीक में पानी को साफ करने के लिए सहजन के बीज का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया के द्वारा पानी को 90.00 फीसदी से 99.99 फीसदी तक बैक्टीरिया रहित किया जा सकता है।

     सहजन दो प्रकार का पाया जाता है एक मीठा दूसरा कड़वा मीठे सहजन का ही उपयोग किया जाता है कडवे का उपयोग नहीं करते है | इस के बारे में कुछ और जानकारी चाहिए तो आप मुझे टिप्पणी द्वारा बताये या सीधे ही मेल करे |

चार लाख रु.लालच भी नहीं भुला सका मित्र की यादें-----ज्ञान दर्पण 

ताऊ पहेली 106 (हवा महल, जयपुर, राजस्थान)

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर,    मालीगांव

श्री राजपूत करणी सेना के शीर्ष सस्‍थांपक व कांग्रेसी नेता लोकेन्‍द्र सिंह कालवी ने निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता----राजपूतवर्ल्ड 

 

 

 

Friday 24 December 2010

आपकी जन्म कुंडली में कैसा है भाग्य स्थान -How's your horoscope fortune location


अपने जीवन पर भाग्य या किस्मत का प्रभाव सभी मानते हैं। कहते हैं कर्म से ही भाग्य बनता है लेकिन कई बार पूरी मेहनत से अच्छे कार्य करने के बाद भी संतोषजनक फल प्राप्त नहीं होता। ऐसे में यही बात सामने आती है कि हमारे भाग्य में यह परिणाम ही निर्धारित किया गया होगा। जन्म कुंडली ( horoscope )के अनुसार कड़ी मेहनत के बाद भाग्य की कितनी मदद मिलेगी यह भी मालूम किया जा सकता है।
  • - ज्योतिष में जन्म कुण्डली (horoscope) का नवम भाव भाग्य का होता है। यह स्थान यदि दूषित अथवा अशुभ फल देने वाला हो तो व्यक्ति सदैव भाग्यहीन रहता है।
  • - यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में भाग्य के नवम स्थान पर यदि चंद्र हो या उसकी दृष्टि हो तो वह भाग्यशाली होता है।
  • - यदि भाग्य का स्थान नवम भाव में राहु, मंगल, शनि यदि शत्रु राशि युक्त या नीच के हो तो व्यक्ति भाग्यहीनता से परेशान हो जाता है। उसे छोटे-छोटे कार्यों में भी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  • - सूर्य, शुक्र, बुध भाग्य स्थान पर सौभाग्यवती नारी दिलाते हैं। जो व्यक्ति के भाग्य को उच्च शिखर तक ले जाती है।
  • - भाग्य स्थान पर गुरु मान-सम्मान और वैभव दिलाता है। ऐसे व्यक्ति को हमेशा भाग्य का साथ मिलता है और वह कई सफलताएं प्राप्त करता है।
  • - भाग्य स्थान पर केतु सामान्य फल देने वाला होता है।
यदि आपको भाग्य का साथ नहीं मिल रहा है तो किस्मत बदलने में केवल ईश्वर ही सक्षम है। अत: अपने इष्टदेव की प्रतिदिन पूजन, अर्चन, आराधना करें। कुंडली के अशुभ ग्रह का ज्योतिषीय उपचार करें।
(उपरोक्त लेख भास्कर समाचार पत्र से लिया गया है )

Tuesday 21 December 2010

चर्चा हिन्दी के कुछ यूनिक ब्लोगों की पार्ट १ ..............नरेश सिंह राठौड़

हिन्दी ब्लॉग जगत में चिटठा संसार बहुत तेजी से बढ़ रहा है | इतने सारे ब्लोगों में कुछ ब्लॉग ऐसे भी है जो अपने आप में अलग है | मै यहां उन ब्लोगों की चर्चा कर रहा हूँ ताकी नए पाठको को उनके बारे में भी पता चल सके |

१. तीसरा खम्भा -यह ब्लॉग श्री दिनेश्वर राय द्विवेदी जी द्वारा लिखा जा रहा है | इस ब्लॉग में पाठको की क़ानून सम्मत समस्याओं का समाधान बताया जाता है जो की निःशुल्क सेवा है | ये ब्लॉग एक सक्रिय बलोग है |तथा अपने आप में यूनिक है | दिनेश्वर राय जी कोटा (राजस्थान ) में रहते है तथा वकालत के पेशे में है |

२. भाग्योदय ओगेनिक - यह ब्लॉग कृषि आधारित ब्लॉग है इसमें पेड़ पौधे एवं बागवानी पर बहुत सी सामग्री लिखी गयी है  |

विज्ञान गतिविधियाँ इस ब्लॉग के लेखक श्री दर्शन लाल बवेजा जी  है | इसमें बच्चो को विज्ञान के छोटे छोटे सरल प्रयोग सिलाये जाते है,जो की बच्चो के पढाई के साथ साथ सर्जनात्मकता को भी विकसित करते है |

४. मीडिया डॉक्टर यह ब्लॉग डोक्टर प्रवीण चौपड़ा जी का है - जो की  रेलवे विभाग में दांतों के स्पेशलिस्ट है |हरियाणा में रहते है इनके बलोग में दांतों के रोग एवं उनका उपचार कैसे किया जाता इस विषय पर बहुत पोस्ट लिखी गयी है |

५. मुसफ़िर  हूँ यारो- इस बलोग को नीरज जाट लिखते है जो दिल्ली मेट्रो में काम करते है ये ब्लॉग उनके द्वारा जितना पर्यटन किया गया है उसका लेखा जोखा है | ये ब्लॉग पर्यटन हेतु बढ़िया सन्दर्भ का काम देता है | इस बलोग पर चित्रों की भी बहुतायत है जो की पोस्ट को सजीव कर देती है |

..ब्लॉग परिक्रमा  - ये एक ब्लॉग जगत के ऊपर पैनी नजर रखने वाले रविन्द्र प्रभात जी ने बनाया है इस ब्लॉग में ब्लॉग जगत के सभी नए पुराने ब्लोगों के बारे में लिखा गया है | हिन्दी ब्लॉग जगत के विकास को विस्तार पूर्वक बताया गया है |इस प्रकार का ज्ञानवर्धक ब्लॉग,हिन्दी ब्लॉग शोधक विद्यार्थी के बहुत काम आता है  |

७. मल्हार    - इस ब्लॉग के लेखक   श्री पी.एन.सुब्रमनियन साहब  है | यह ब्लॉग ऐतिहासिक यात्राओं के ऊपर लिखा गया है| इसमें उस स्थान की स्थापत्य कला एवं संस्कृति के बारे में विस्तार से पढने को मिलता है |

८. गत्यात्मक ज्योतिष - ये ब्लॉग संगीता पुरी जी चलाती है | जो की बोकारो बिहार में रहती है | इस बलोग में ज्योतिष विधा का अलग ढंग से परिचय करवाया गया है जो की ग्रहों एवं नक्षत्रो की चाल का गणन करके भविष्य फल का निष्कर्ष निकाला जाता है |

९. हिन्दी बलोगरो के जन्म दिन - ये बलोग बी एस पाबला जी द्वारा संचालित है इसमें समस्त हिन्दी बलोगरो का जन्मदिन का ब्योरा रहता है जिस दिन जिस बलोगर का जन्म दिन होता है उस दिन उसकी सूचना इस ब्लॉग पर पोस्ट के रूप में लगाई जाती है | जिससे पाठको को पता चल जाता है की आज किस बलोगर भाई का जन्म दिन है और वो उन्हें बधाई सन्देश भेज सकता है |

१०. दाल रोटी चावल - ये बलोग पाक कला पर आधारित कम्यूनिटी बलोग है जिसे काफी लोगो द्वारा मिल कर चलाया जाता है | यहां नयी नयी रैसिपी से रूबरू करवाया जाता है |

११. नारी ये महिलाओं द्वारा बनाया गया साझा ब्लॉग है जिसकी मोडरेटर रचना जी है | ये एक नई प्रधान ब्लॉग है जिसमे नारी से जुडी समस्याओं पर लिखा जता है |इस ब्लॉग पर केवल महिलाए ही लिख सकती है |

१२. शब्दों का सफर - इस बलोग के लेखक श्री अजित वडनेरकर जी है | इसमें किसी भी एक शब्द पर पूरे पोस्ट लिखी जाती है जैसे की उस शब्द का उद्भव ,उसका दूसरी भाषा में प्रयोग आदि आदि विस्तार पूर्वक समझाया जाता है | इस प्रकार का ये एक मात्र हिन्दी बलोग है |

१३. प्राईमरी  का मास्टर - ये फतेहपुर के प्रवीण त्रिवेदी के द्वारा संचालित बलोग है जिसमें प्राथमिक शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को उकेरा गया है | इसमें मास्टरों के अन्तर्द्वन्द को भी दिखाया गया है | बालको को कैसे शिक्षा दी जानी चाहिए वो भी बताया गया | 

१४. चिट्ठा चर्चा  - ये बलोग हिन्दी बलोगो [पर लिखी जा रही पोस्टों के बारे में बताता है | इस प्रकार के और भी बलोग है जैसे बलोग ४ वार्ता | लेकिन  चिट्ठा चर्चा  ब्लॉग पुराना है और सक्रिय है |

१५. तरकश डोट कोम - ये पोर्टल बहुत बढ़िया है | इस पोर्टल पर रोजाना चार पांच पोस्ट पब्लिश होती है जो की स्वास्थ्य ,समाज ,सामाचार ,तकनीक ,गैजेट्स आदि पर आधारित होती है |

१६.  मेरे अंचल की कहावते _ यह एक साझा बलोग है जिसमे क्षेत्रीय  कहावतो का समावेश रहता है |

१७ .हिन्दी फिलम संगीत का खजाना _ इस बलोग में हिन्दी गीतों के वीडियो लिरिक्स सहित मिलते है गीतों का वर्गीकरण भी वर्ष के हिसाब से टैग लगे है |

१९. भाषा शिक्षा एवं रोजगार - इस बलोग पर आपको रोजगार संबंधी ताजा सुचनाये मिलेगी | देश भर की सभी यूनिवर्सिटी के लिंक यहां मिल जायेंगे और भी बहुत कुछ है यहां पर |

२०.सर्प संसार  ये साझा बलोग है जिसमें सांपो की दुनिया के बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बताया गया है |

२१. हिन्दी इंटरनेट   यंहा आपको हिन्दी का संसार मिलेगा हिन्दी के महत्वपूर्ण बलोग ,साईट,एवं पोस्ट और वो भी वर्गीकरण किये हुए | बहुत कुछ मिलेगा, हिन्दी प्रेमी लोग  एक बार अवश्य देखे |

नोट- ये ब्लॉग मैने अपने नोलेज के आधार पर छांटे है अगर आप भी इस प्रकार के किसी अन्य ब्लॉग के बारे में जानते है जो अपना अलग विषय रखता हो तो उसे भी यंहा पर बताए |

Friday 17 December 2010

विस्तरित बातचीत वरिष्ठ पत्रकार और टोटल टीवी के संपादक श्री उमेश चन्द्र जोशी जी से

     "आप सत्य के साथ समाज हित की लड़ाई लड़ोगे तो सफलता आपके साथ हमेशा चलेगी " ये कथन है वरिष्ट पत्रकार और टोटल टीवी के संपादक श्री उमेश चन्द्र जोशी जी का | ११ दिसम्बर सुबह सुबह मिलने का वक्त तय किया था श्री जोशी जी ने,और मै ने उन्हें सुबह सुबह ही घेर लिया मै पहुंचा तब वे ठीक से तैयार भी नहीं हो पाए थे |
ऊर्जा वान जोशी जी मुस्कराते हुए 


     जोशी जी अपनी भतीजी की शादी में पिलानी(जिला -झुंझुनू (राज.) आये हुए थे | मेरी उनसे फोन पर बातचीत हुई थी मेरी प्रार्थना पर उन्होने मुझे मिलने का समय दिया  | और मै ठहरा एक हिन्दी ब्लोगर मौक़ा कैसे चुकता सो मैं  फ़टाफ़ट उनसे मिलने पहुच गया | हालांकि पिलानी आगमन उनका पारिवारिक कार्यक्रम था सो किसी पत्रकार को खबर ना कर के अकेले ही इस सुअवसर का लाभ उठा लेना उचित समझा |

     श्री जोशी जी की पैदाइश राजस्थान के अलवर जिले में नायसराना नामक गाँव की है | नायसराना में उस समय विधा अध्ययन करना बहुत ही कठिन काम था | जमीन पर बैठना पड़ता था अपने घर से बोरी या चटाई लेकर जाना पड़ता था स्कूल की छत फूस की थी जो बारिश के समय चुने लग जाती थी | मजबूरन बरसात के दिनों में छुट्टी करनी पड़ती थी | ये बताते हुए जोशी जी अतीत में खो जाते है | और अपने भाईयो की तरफ इशारा करते हुए गर्व से बताते है की ये लोग भी उसी स्कूल से निकले हुए है | जिनमे एक भाई आजकल आर्थोपेडिक सर्जन है जयपुर रहते है ,एक वकील है जो कोटपुतली में रहते है | एक भाई लक्ष्मीनारायण झुंझुनू वाला ग्रुप में मैनेजर है | एक भाई सरकारी वैध की पोस्ट से रिटायर हो गए है और आजकल गाँव में ही दवा दारू करते है | जोशी जी ने बहुत आत्मीयता के साथ अपने परिवार जनों से मेरा परिचय करवाया | परिवार के लोग बहुत ही मिलन सार है |
फोन में कुछ ढूंढते हुए जोशी जी 
     जोशी जी ये बात बताते हुए रोमांच से भर जाते है की वे हिन्दुस्तान के पहले  ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने रेडियो ,टीवी ,और अखबार तीनो माध्यमो में काम किया है | २९ साल से कैमरे का सामना कर रहे है | जनसत्ता में उन्हें २१ साल का कार्यानुभव रहा है | रेडियो में १५-१६ साल काम किया है और टीवी में १९८१ में समाचार वाचन का काम किया | १९८४ में उन्होंने आकाशवाणी में समाचार वाचक का काम शुरू किया | उद्घोषक के तौर पर काफी पहले ही काम करना शुरू कर चुके थे | ये बताते हुए जोशी जी फिर अतीत में खोने लग जाते है |वे बताते है की समय की पाबंदी और आवाज का सामंजस्य उन्होंने आकाशवाणी में सीखा था | वहा उस समय रिताशु भादुड़ी नामके एक दिग्गज थे जिन्होंने मुझे माइक्रोफोन पकडना सिखाया और सांस कैसे लेना है कब रूकना है कब बोलना है, मुह से माइक की दूरी कितनी होनी चाहिए ये सब उन्होंने सिखाया जो आज भी काम आ रहा है |

     एकरिंग के अलावा मैंने कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मे भी बनाई है | लेकिन समय अभाव के कारण अब ये काम नहीं कर पाता हूँ भविष्य में समय मिल पाया तो इस काम को आगे बढ़ाऊंगा |

     पत्रकारिता के बारे में पूछने पर बताते है की वो जनसत्ता से काफी समय से जुड़े रहे है | एक्सप्रेस ग्रुप में काम करके उन्हें काफी अनुभव हुआ है | जनसत्ता में पत्रकारों का चयन बहुत ही कठिन परीक्षणों के बाद होता है | वहां जो भी काम कर लेता है वो इस क्षेत्र में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता है | इस ग्रुप की काम करने की शैली स्पष्टवादिता की रही है |   यंहा के बारे में बताते हुए जोशी जी कहते है की मैंने स्वर्गीय प्रभाष जोशी के समय में काम किया है | प्रभाष जी कहते थे की आप का काम है न्यूज लाना और विज्ञापन विभाग का काम है विज्ञापन लाना | जिसका विज्ञापन लगा है और उसके खिलाफ भी कुछ लिखना पड़े तो उस विज्ञापन के बाजू में बेहिचक छाप दो ज्यादा ज्यादा ये होगा की अगली बार विज्ञापन नहीं देगा लेकिन सच्चाई से मुह तो नहीं मोडोगे | प्रभाष जी ने कभी भी किसी पत्रकार की कोइ भी खबर छपने से नहीं रोकी भले ही वो किसी के भी विरूद्ध क्यों ना हो |ये मेरा सौभाग्य है की मै आज तक जिन संस्थानों में काम किया है वहां मेरे ऊपर किसी का अनावश्यक दबाव नहीं रहा है यही वजह है की मै आज तक अपनी बात खुल कर कहता आया हूँ |

     पत्रकारिता के वर्तमान हालात पर चर्चा करते हुए वे बताते है की बहुत दुःख होता है जब किसी व्यक्ति से परिचय कराया जाता है और यह क़हा जाता है की इनसे मिलिए ये फला साहब है और बहुत ही इमानदार है | क्यों की इमानदार होना मनुष्य का पहला गुण होना चाहिए | ईमानदारी तो इनबिल्ट होती है उसे उस के लिए परिचय में जोड़ने की क्या जरूरत है | एक पत्रकार के लिए ईमानदार होना पहली जरूरत है | अगर आपको बेईमानी ही करनी है तो आप पत्रकारिता का पेशा क्यों चुनते है दूसरा ही कोइ व्यवसाय चुन कर करे | इस पेशे में ना आये तो ही बेहतर है | अगर शराब बेचना है तो विटामिन का लेबल लगाकर ना बेचे उसे शराब के ही रूप में बेचे | दलाली ही करनी है तो पत्रकार ना बने, दलाल ही बने | हमारे समाज को पत्रकारों से बड़ी आस है मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ समझा जाता है | अगर तीनों स्तंभों पर अंकुश रखने वाला चौथा स्तम्भ ही भ्रष्ट हो जाएगा तो लोकतंत्र का क्या होगा  | मै गरीबी से ऊपर उठकर आया हूँ उसी ग्रामीण समाज से हूँ | जो आज अभावो को झेल रहा है | आज उसके लिए आवाज उठाना ही मेरी प्राथमिकता है |

     जब मैने उनसे ये जानना चाहा की आप कैमरे के सामने होते है या लिखते है तब आपकी राजनैतिक विचारधारा का प्रभाव कभी आपके ऊपर हावी नहीं होता ये चीज कैसे संभव होती है ? जवाब में वे कहते है की जब मै प्रोग्राम कर रहा होता हूँ तो मेरे सामने हमेशा आम आदमी का हित और सच्चाई ही सर्वोपरि होता है ना की मेरी राजनैतिक विचारधारा | मै जिस पार्टी को चाहता हूँ अगर उस पार्टी के द्वारा भी कुछ गलत हुआ है तो मै उसकी भी बुराई करने में नहीं हिचकता हूँ |

      जोशी जी से परिवार के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया की उनके तीन बेटियाँ है | एक बेटी जिसका नाम विधा लाल है वो कत्थक की राष्ट्रीय स्तर की डांसर है | उसके पति भी उसके साथ परफोर्म करते है वर्तमान में फीजी में रहते है  | दूसरी बेटी साक्षी जोशी है जो पहले यहां स्थानीय न्यूज चैनल में काम करती थी आजकल बी बी सी में काम करती है |  तीसरी बेटी ने एम् बी ए किया है और अपनी गृहस्थी में मस्त है| (नीचे वीडियो में आप उनकी लड़की विधा लाल को फीजी में परफोर्म करते हुए देख सकते है ) 

     मैंने उनसे हिन्दी बलोग के बारे में पूछा तो उन्होंने क़हा की ये माध्यम भी आजकल अपनी आवाज को समाज के दुसरे वर्गों तक पहुंचने का जरिया बन गया इसमें दोनों तरफ से प्रतिक्रिया मिल जाती है |आपके लिखे जाने का प्रभाव तुरंत पता चल जाता है | मैंने भी अपनी बात कहने के लिए एक ब्लॉग बनाया था जिस पर आजकल समयाभाव की वजह से कोइ पोस्ट नहीं का पा रहा हूँ |

     इस उम्र में उनकी एनर्जी का राज भी उन्होंने मरे पूछने पर जाहिर कर दिया | वे कहते है सुबह चार बजे उठता हूँ चार गिलास पानी पीकर ६ किलोमीटर की सैर पर निकल जाता हूँ | वापस आकर आधे घंटे प्राणायाम करता हूँ | और ये दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा ही मेरी ऊर्जा का राज है |

     मै जोशी जी का प्रशंसक कैसे बना इसके बारे में भी बताता चलू की जोशी जी को मै टोटल टीवी पर रोजाना शाम को ८ बजे से ९ बजे तक उनके एक कार्यक्रम मूड ऑफ इंडिया में देखता हूँ | एक समाचार वाचक खबर पढता है उसके बाद वो उस पर जोशी जी से प्रतिक्रिया पूछता है और जोशी जी उस खबर का सारा गुना भाग समझाते है | ऐसा लगता है जैसे वाचक ने उस खबर को लाल रंग के प्याज की शक्ल में थमाया हो और जोशी जी उसकी परत दर परत उतार कर उस लाल रंग के प्याज को छोटे से सफेद प्याज में बदल देते है | आखिर में जब खबर का सार निकल कर सामने आता है तब वो खबर इस प्रकार की खबर बन जाती है जिसका सरोकार समाज एवं आम आदमी से होता है | जोशी जी की ये ख़ासियत दूसरों से अलग करती है |

     समय काफी हो गया था(लगभग ४ घंटे ) उनके परिवार वाले भी विवाह की रस्मो के लिए उन्हें बुलवा रहे थे सो मेंने फिर मिलने का वादा लिया उन्हें अपने गाँव आने का निमंत्रण दिया और विदा ली | वो मुझे छोड़ने बाहर तक आये |
जोशी जी का ब्लॉग  है -: मुझे बोलने दो http://mujhebolnedo.blogspot.com

Thursday 16 December 2010

इन्हें पहचानिये ये कौन है

           आप नीचे दिए गए चित्र को देखिये और बताइये की ये कौन है | ये दिल्ली में रहते है | ब्लोगर है ,इन्हें आप देखते है | इन्हें आप सुनते थे ,इनका लिखा पढते थे | इनकी पहुच आपके घर तक है | इस पहेली का दूसरा हिंट शाम तक दिया जाएगा | अगर फिर भी नहीं पहचान पाए तो फ़िकर करने की जरूरत नहीं है कल की पोस्ट में आप इनके बारे में विस्तार से जानेगे जो आपने शायद कही नहीं पढ़ा होगा |
बंटी चोर जी आप भी कोशिश कर सकते है |






6:00 PM अपडेट -:  ये साहब रोजाना शाम को टीवी के एक न्यूज चैनल पर दिखाई  देते है | पत्रकार है ,समाचार वाचक है ,समाचार विश्लेषक है | देश की राजनीतिक आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति पर खुल कर बोलते है , राष्ट्रीय स्तर के एक दैनिक समाचार पत्र में इन्होने काफी लंबे समय तक पत्रकार के रूप में काम किया है |रेडियो पर समाचार वाचन और उद्घोषक के रूप में कार्य किया है | दूरदर्शन में समाचार वाचक के रूप में काम किया है |
अगर जवाब नहीं सूझ रहा है तो कोइ बात नहीं है तब तक आप इन्हें पढ़ सकते है |

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर,         मालीगांव

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2-    ज्ञान दर्पण 

श्री राजपूत करणी सेना के शीर्ष सस्‍थांपक व कांग्रेसी नेता लोकेन्‍द्र सिंह कालवी ने निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता-    राजपूत वर्ल्ड 

एक ब्लागर सम्मेलन इधर भी-    ताऊ नामा 

 

 

 

Monday 13 December 2010

गूगल रीडर के द्वारा पढ़िए अपने पसंदीदा ब्लोगों की नयी पोस्ट (पुन प्रकाशन )

क्या आप भी Internet पर पढने की आदत रखते हैं?
क्या आपके पसंदीदा Blogs की सूची जरा लम्बी है?
क्या आपका  Email Box केवल आपके Subscribe किए ब्लॉग के पोस्टों से भरा रहता है?
क्या आप भी ब्लोगवाणी और चिठ्ठाजगत की अनियमितता से नयी पोस्ट पढ़ने से वंचित रहते है ?
अगर आपका जवाब “हाँ” हैं तो आपके लिए Google Reader काफी फायदेमंद हो सकता है.
आप अपने पढने के शौक को और मजेदार बना सकते हैं और थोड़ा काम का भी.

चलिए जानते है कैसे. लेकिन पहले कुछ जरूरी और Basic जानकारी.

Google Reader, Google का Feed Reader Application है जिससे आप किसी भी ब्लॉग के Updates यानि उसके नए पोस्टों को पढ़ सकतें हैं.  ये आपके Google Account (Gmail या Orkut वाला) पर ही काम करता है यानि नया Account बनने की जरुरत नही.
पर इसका क्या फायदा है? ये काम तो आप उस ब्लॉग पर जाकर भी कर सकते हैं, तो एक नए जंजाल की क्या आवश्यकता? यही सोच रहें है ना?
तो हरेक ब्लॉग को उसके वेब पते पर जाकर पढ़ना और सबसे बड़ी बात उन्हें याद रखना काफी जटिल काम हो जाता है. और अगर वहां पर कोई नए पोस्ट न हो तो मेहनत बेकार !!! है ना?
तब यहाँ पर Google Reader का काम आता है. इससे आप जितने चाहें ब्लॉग को एक ही जगह से पढ़ सकतें है. बस Google Reader खोलिए और जो भी ब्लॉग अपडेट हुए है उन्हें पढ़ लीजिये या फिर उनकी पुरानी पोस्टों को भी.

और आपको सभी ब्लॉग को Email से भी पढने की जरुरत नही होगी. बस उन्हें अपने Google Reader में Subscribe कर लीजिये और काम खतम.
Google Reader में किसी भी ब्लॉग को Subscribe करने के दो रास्तें हैं.
Manualy Subscription : जिसमे आपको किसी भी ब्लॉग या उसकी Feed का पता डालना होगा और वो आपके Google Reader से जुड़ जायेगी.(नीचे वाले स्क्रीन शोट में आप देख सकते है )
Automatic Subscription : जिस भी ब्लॉग या साईट में लिंक हो “Add To Google” या ऐसा ही कोई और Option हो तो आप उस लिंक पर क्लिक करके ही उसे अपने Google Reader में जोड़ सकतें हैं.


तो ये तो थी ब्लोगों को Google Reader में जोड़ने की विधि.
अब आप स्वतंत्र है खुल के पढने के लिए. और हाँ इससे आपका प्यारा Email Box भी थोड़ा खाली ही रहेगा क्योकि आप अब Email Subscription की जगह Feed Subscription को वरीयता देना शुरु कर देंगे.

Google Reader for Advanced Bookmarking

अगर आप दिन भर में बहुत ज्यादा नई नई Sites या ब्लॉग को देखते रहते हैं तो Google Reader उनमे से कुछ Special को याद रखने में आपकी काफी मदद कर सकता है. आपको बस एक छोटा सा काम करना होगा.
आपके Google Reader में Notes नाम का option होगा.

इस पर क्लिक करने के से आपके save किए गए Notes खुल जायेंगे. और उसके साथ साथ Notes save करने का Bookmarklet भी.

उस Bookmarklet को Drag (खींच) करके अपने Browser के Bookmark Bar में ले जाईये.

बस काम खतम. अब कोई भी Site देखिये और वो important है तो इस Bookmarklet पर Click कर दीजिये.

Google Reader का एक बॉक्स खुल जाएगा और फिर आप वही से इस पेज में Note लगाकर अपने Google Reader Note में  Save कर सकते हैं.
लेकिन Google Reader में login होना मत भूलियेगा.
है ना मजेदार? अब कभी आप ये शब्द नही कहेंगे की “अरे यार Site का नाम याद नही आ रहा है जिसमें मैने उस चीज को देखा था“. बस अपना Google Reader खोलेंगे और वही से Note में जाकर सभी को देख लेंगे.

Social Sharing of Notes and Blog Posts

Google Reader, आपके शेयर किए गए Notes और Blog Posts को दोस्तों और दुनिया से share करने की भी सुविधा देता है.
इसके लिए बस आपको अपने वेब Notes या Blog Post  के नीचे share वाले बटन को Click करना होगा.

आपके share किए Items आपके दोस्तों को मिलते हैं और साथ साथ एक वेब पेज पर भी आ जातें हैं. इस वेब पेज का प्रयोग आप अपनी ऑनलाइन Bookmark लिस्ट के रूप में कर सकतें हैं.

आप देख सकतें है कितने सारी सुविधाएँ है यहाँ पर. तो एक अच्छे दोस्त होने का काम कीजिए और अच्छी चीजों को लोगो को बताईये……….

कैसे लगे ये Google Reader के Advanced प्रयोग?
(नोट- ये पोस्ट अंकित भाई के  ब्लॉग(प्रथम) पर  प्रकाशित हुई थी  अब वो पेज वंहा नहीं नहीं है | अगर ये पोस्ट अब वंहा पर होती तो मुझे दुबारा इसे प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं थी सीधे ही आपको उसका लिंक दे देता | इस पोस्ट का 95 प्रतिशत भाग अंकित भाई का है चित्र मेरे है | इस लिए इसका सारा श्रेय अंकित भाई को जाता है )
 आपके पढ़ने लायक यंहा भी है 





उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे -----ज्ञान दर्पण

भीम और दुर्योधन का टेस्ट : ब्लागाचार्य द्वारा टी.आर.पी. बढाने के लिये?.....ताऊनामा 

सरसों की फसल और सर्दी परवान पर, ............       मालीगांव

 राजपूत वर्ल्ड 

Wednesday 8 December 2010

नए पुराने ब्लोगरो हेतु ब्लोगिंग टिप्स

     मुझे हिन्दी ब्लोगिंग में बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है लेकिन जितना समय हुआ है उसमे बहुत कुछ सीख गया हूँ | ये पोस्ट लिखने की आवश्यकता भी रोहतक में ब्लोग्गर मिलन के बाद ही महसूस हुई है | ज्यादा भूमिका बनाए बगैर सीधे काम की बात पर आते है |

     नए बलोगर जो गलती करते है उनके बारे में पहले भी एक पोस्ट मैंने लिखी थी | उन बातों को दुबारा यहां लिख रहा हूँ |
वर्ड वैरिफ़िकेशन - नए ब्लोगर इसे हटाते नहीं जिससे उनके बलोग पर टिप्पणी देने में परेशानी आती है और मजबूरन पाठक दुसरे बलोग पर चले जाते है | इसका तरीका है -ब्लोगर डेशबोर्ड --> सेटिंग---> कमेंट्स ---- >शो वर्ड वैरिफ़िकेशन फार कमेंट्स ---->सेलेक्ट नो-----> सेव सेटिंग्स
     
     सब्सक्राईब करने का लिंक - अपने पाठको को ई मेल द्वारा सब्सक्राईब करने का लिंक जरूर लगाए |
विजेट बार में फोल्लोवर बनने का विजेट जरूर लगाए - आज कल नए टेम्प्लेट में तो यह सुविधा आती ही है अगर नहीं भी हो तो आप इसे चालू कर सकते है |
टिप्पणी देने में कंजूसी ना करे - टिप्पणियां हिन्दी बलोग जगत के विकास में टिप्पणियों की अहम भूमिका रही है | कोइ भी बलोग्गर इसके महत्त्व को नकार नहीं सकता है |तो आप भी ज्यादा से ज्यादा टिप्पणी दे ताकी आपका लिंक ज्यादा से ज्यादा जगह पर दिखाई दे | और वो गूगल सर्च में टॉप पर आये | चिट्ठा जगत में भी ताजा टिप्पणियों में आपका जिक्र होता रहेगा | 
 
      मित्र ब्लॉग -अपने मित्रो के ब्लॉग का लिंक अपने ब्लॉग के साईड बार में दिखाए और उन्हें भी ऐसा करने का आग्रह करे |जिससे आपके ब्लॉग का लिंक ज्यादा से ज्यादा जगह पर दिखाई दे और आपके विजिटरो की संख्या में इजाफा हो|
अपने ब्लॉग को ब्लॉग अग्रीगेटर से जोड़े  - अपने ब्लॉग को जितने भी ब्लॉग अग्रीगेटर है उनमे पंजीकृत करे | जिससे की आपके ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा पाठक मिल सके और आपके ब्लॉग का लिंक भी ज्यादा जगह पर पहुचे |

     अच्छे पाठक बने - आप किसी भी ब्लॉग की नयी पोस्ट कैसे पढ़ते है | सबका अलग अलग जवाब होगा | रोहतक में जब बलोगर मिले थे तब भी बहुत से ब्लोगरो ने यही समस्या बतायी थी की ब्लॉग वाणी के बंद होने के बाद चिट्ठो की नयी पोस्ट पढने में परेशानी होती है | और अब तो चिट्ठाजगत भी बीमार चल रहा है | अजय भाई ने इसका एक सरल उपाय बताया था की आप अपने पसंदीदा ब्लॉग को फोल्लो कीजिये और अपने ब्लोगर डेशबोर्ड पर उनकी नयी पुरानी पोस्ट आराम से पढ़िए | लेकिन मुझे ये तरीका कम पसंद है |इसका सबसे बढ़िया उपाय है गूगल रीडर | गूगल रीडर सबसे बढ़िया माध्यम है जिससे की आप अपने पसंदीदा ब्लॉग या वेब साईट की नयी पुरानी पोस्ट को आराम से पढ़ सकते है |  इस के बारे में आपको बता दू की आपको गूगल रीडर के लिए अलग से खाता बनाने की आवश्यकता नहीं है आप इसमें अपने जी मेल से भी लोगिन कर सकते है | आपने जिन ब्लॉग को फोल्लो कर रखा है वो वंहा आपको स्वत ही मिल जाते है |बाकी जानकारी आप अगली पोस्ट में पढ़ सकते है |

     गूगल चैट का उपयोग - आप अपने गूगल चैट विंडो के स्टेटस में आप अपनी जिस पोस्ट को पढवाना चाहते है यानी की नयी पोस्ट उसका लिंक वंहा लगा सकते है | उस मैसेज को संपादित भी कर सकते है| आपके दोस्त उस मैसेज को पढ़कर आपकी नयी पोस्ट पर पहुच जायंगे |
                                                                                                      
     ऑरकुट और फेस बुक जैसी शोसल नेटवर्किंग साईटो का उपयोग - ये साईट भी विजिटरो को आपके ब्लॉग तक लाने का अच्छा माध्यम हो सकती है | आप अपने प्रोफाइल में, नए ताजा मेसेज में अपनी पोस्ट और ब्लॉग का जिक्र कर सकते है | फेस बुक में तो अपने नोट्स के रूप में अपने ब्लॉग को ही इम्पोर्ट कर सकते है जिससे आपके ब्लॉग की पुरानी पोस्ट भी वंहा आ जायेगी ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार होगा |

     अपने दोस्तों को,जान पहचान वालो को ई मेल द्वारा अपने ब्लॉग के बारे में बताये लेकिन एक बात का ध्यान रखे उनको एक बार ही मेल करे , बार बार करने से गलत असर होता है |
अपने ब्लॉग को सर्च इंजन में जोड़े - इस बारे में आप आशीष भाई के ब्लॉग पर जाए उन्होंने बहुत बढ़िया पोस्ट लिखी है |
अपने ईमेल के हस्ताक्षर में अपने ब्लॉग का पता जरूर लिखे -जिससे मेल प्राप्तकर्ता एक बार आपके ब्लॉग पर जरूर जाएगा अगर ब्लॉग अच्छा लगा तो वह उसे बुक मार्क कर पढेगा |

     अपने ब्लॉग को ज्यादा तडक भड़क वाला ना बनाए क्यों की पाठक वंहा साज सज्जा देखने नहीं आता है वो उसकी विषय सामग्री हेतु ही आता है | जितने ज्यादा जावा विजेट्स होंगे उतना ही पेज लोडिंग का समय बढेगा जो की एक पाठक के लिए उबाऊ होगा |

     सर्च इंजन में आने का सबसे बढ़िया फार्मूला है जो भी शब्द ज्यादा सर्च किये जाते है उन पर पोस्ट का ताना बाना बुना जाए | जैसे आज कल"मुन्नी बदनाम " "विकिलीक्स" आदि शब्द ज्यादा सर्च किये जाते है |
यह पोस्ट आपको किसी लगी अपनी राय दे | अगर कुछ समझ में ना आये तो टिप्पणी या मेल द्वारा पूछे |

इन्हें भी देखे






Sunday 5 December 2010

रचना बी के तुलसीदास (चर्चा रचना बी की भाग २ )....................नरेश सिंह राठौड़

     पिछली पोस्ट में मैंने आपसे वायदा किया था की रचना बी के और भी किस्से मै आपको समय समय पर सुनाता रहूँगा | अब पाठक मित्रों के आग्रह पर उनका ये दूसरा किस्सा सुनिए |

     हुआ यू की हमारे मोहल्ले में रहने वाले पंडित हीरानंद जी शास्त्री रामायण के बहुत बड़े भक्त और विद्वान है | आस पास में रामायण का पाठ करने जब तब जाते रहते है | एक दिन वो भी चढ़ गए रचना बी के चक्कर में और वो ही क्या जो भी अपने आप को बड़ा ताऊ समझता है वे सभी रचना बी के साथ पंगे ले चुके है | पूरा गाँव भर जानता है की रचना बी के साथ पंगा लेने का अंजाम क्या है | उनसे पहले वो खाज जाटिया जिसकी कपडे की दूकान है और वो मालीत शर्मा जो पत्रकार है ,और भी ना जाने कितने सक्सेना,शर्मा,खत्री,पत्री,जोसेफ,थोमस आदि को पंगा लेना भारी पड गया था | खैर लम्बी लिस्ट है लेकिन आज चक्कर में चढ़े हीरानन्द शास्त्री जी |

     शास्त्री जी और रचना जी दोनों बहस करते हुए मेरी दूकान पर आये| रचना कह रही थी की तुलसी नारी विरोधी है जबकी शास्त्री जी कह रहे थे की तुलसी जी नारी को पूजनीय मानते है और पूरा सम्मान देते है | रचना ने अपनी बात के पक्ष में रामायण की एक चौपाई कही की
ढोल गंवार शुद्र पशु नारी,ये सब ताडन के अधिकारी || (जिसका अर्थ रचना बी ने बताया की ढोल(बाजा ),गंवार मनुष्य, निम्न जाती का मनुष्य, पशु और नारी ये सब जर्मन मेड लठ के लायक है )
जब की पंडितजी अपनी बात को मजबूत करने हेतु दूसरी चौपाई कही  "धीरज धरम मित्र अरू नारी आपति काल परखिये चारी || (जिसका अर्थ पंडितजी ने बताया की धैर्य ,धर्म ,मित्र और नारी ये सब विपत्ति के समय काम आने वाले सिद्ध होते है |
दोनों के तर्क देख का एक बरगी हम जैसे अज्ञानियों का भी सर चकराया लेकिन क्या करते बच कर निकने का कोइ रास्ता भी तो नहीं था |

     हमने कहा ये बात पूरा गाँव जानता है रचना बी आपने हमेशा ही अर्थ का अनर्थ किया है | आप अपनी बातों से पानी में आग लगा सकती है | ये बेचारे सीधे साधे पंडितजी तुम्हारे चक्कर में चढ़ गए है लेकिन बात तुलसी दास जी की है सो गलत कभी नहीं हो सकती है | आपने अपनी चौपाई में एक छोटे से कोमा को हटा कर पूरा अर्थ ही बदल दिया है | यहां तुलसी दास जी ने पशु और नारी दोनों को अलग नहीं किया है उनका आशय पशु समान नारी से है | जो नारी पशु समान व्यवहार करेगी जर्मन मेड लठ खायेगी ही उसे ना आप बचा सकती है और न ही तुलसी दास जी |

     आप घर जाओ कुछ ज्ञान ध्यान की और बाते पढ़ो तब पता चलेगा| रचना बी की हालत घायल नाग जैसी हो गयी अब फिर कभी ना कभी नया हमला करने की तैयारी में है | आल इज वैल ...आल इज वैल...

(नोट -उपरोक्त व्यंग का सम्बन्ध किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से नहीं है ,फिर भी अगर कोइ अपना सम्बन्ध इससे जोड़ना चाहे तो ये उसकी मर्जी है| )


इन्हें भी देखे





Wednesday 1 December 2010

एक रूपये में लाईव सोंग एक संतुष्टी दायक अहसास(वीडियो ) ---------------नरेश सिंह राठौड़

एक रूपये में आज भी बहुत कुछ आता है आपके नहाने के शैपू से लेकर गुटखा,टॉफी,पेपर सोप ,पता नहीं क्या क्या आ जाता है | एक रूपये में बहुत दम है दो रूपये में भले ही दम ना हो लेकिन एक रूपये में बहुत दम है| अगर आपकी जेब में एक रूपया नहीं हो,तो आप बिना मोबाईल के फोन भी नहीं कर पायेंगे |

मेरा इरादा आपको ज्यादा भटकाने का नहीं है | कल मेरी दूकान पर एक भिखारी सा बच्चा आया और एक रूपया मांगने लगा | मैंने उससे पूछा भाई कुछ काम काज करोगे दूकान के आगे साफ़ सफाई ही कर दे मै तुझे रूपया दे दूंगा | लेकिन कहते है ना की काम चोर लोग ही भिखारी और बाबा बनते है | उसने भी ना बोल दिया फिर मैंने उससे पूछा कुछ गाना वाना आता है तो उसने एक राजस्थानी गीत सुनाया उसका आप वीडियो देखे |
अगर आपको राजस्थानी,हरयाणवी या गुजराती भाषा बिलकुल नहीं आती है तो समय बर्बाद ना करे ये आपके किसी काम का नहीं है |
video

रोहतक ब्लाग स्पेक्ट्रम : ताऊ महाराज और ताई महारानी चिंतित

पीछोला (मरसिया)Elegy-२

भूखे भक्तों को भगवान , भोजन कब पहुचाओगे

हठीलो राजस्थान-54