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Saturday 24 July 2010

ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार

आज चर्चा करते है ब्लोगिंग के चार दुश्मनों की | वैसे देखा जाए तो ब्लॉग लेखक के लिए दुशमनो की बड़ी संख्या है लेकिन उनमे जो चार है वो ज्यादा महत्वपूर्ण है |
  1. - आपका कंप्यूटर - कम्पुटर के बगैर आप ब्लॉग लिखने की कल्पना भी नहीं कर सकते है लेकिन यह कंप्यूटर भी कभी कभी जी का जंजाल बन जाता है | विशेष कर जब आप हिन्दी ब्लोगिंग करते है और बहुत सारे टूल्स और सोफ्टवेयर इस्तेमाल करते है | बहुत से ब्राऊजर , उनके विभिन्न प्रकार के एड्ड ओन्स,प्लग इन और कई तरह की सेटिंग जिसे वायरस या अन्य औपरेटिंग सिस्टम फाईल के करप्ट होने पर कितनी मुसीबत होती है यह तो कोइ भुक्त भोगी ही बता सकता है | एक बार फोर्मेट मार देने पर सब कुछ नए सिरे से बनाना पड़ता है और सारा काम दो चार दिन तक चलता रहता है | अब आप यह कहेंगे की इसके लिए तो एंटी वायरस काम में ले सकते है | जरूर ले सकते है लेकिन कुछ वेब साईट इस प्रकार के वायरस लिए हुए बैठी है की आपका एंटी वायरस अपडेट होने में अगर एक मिनट लेता है और आपने उस एक मिनट के दौरान या उससे पहले ही अगर उस साइट को खोल लिया तो, हो गया सब सत्यानाश | और कई बार ऐसा हो भी जाता है | तब यह कम्प्यूटर जी का जंजाल लगता है |
  2. अब बात करते है दुसरे नंबर के दुशमन की यह आपका इंटरनेट कनेक्शन - इंटरनेट कनेक्शन आपका सबसे बड़ा साथी है तो यह सबसे बड़ा दुश्मन भी है | जब तक चलता है तब तक चलता है लेकिन जब अड़ जाता है तो फिर चलने का नाम भी नहीं लेगा | और आप सारे जतन करके देख लेंगे | टेम्परेरी फाईल हटाएंगे ,हिस्ट्री और रजिस्ट्री क्लीन करेंगे | और भी पता नहीं क्या क्या उपाय लगायेंगें | लेकिन फिर भी यह मृत शैया पर लेटे बूढ़े की साँसों की तरह अटक अटक कर चलेगा | यह समस्या अगर सर्विस प्रोवाईडर की वजह से है तब तो एक दो दिन में या कुछ समय बाद ठीक हो जाती है | लेकिन अगर वाइरस की वजह से हुयी तो बिना फोर्मेट किये बात नहीं बनेगी |
  3. विधुत की कटौती - जो ब्लॉग लेखक शहर में रहते है उन्हें इस समस्या से ज्यादा झूझना नहीं पड़ता है लेकिन मेरे जैसे बहुत से ब्लोगर जो गाँवो में या कस्बो में रहते है उन्हें इसकी बहुत बड़ी समस्या है | बिजली विभाग की कटौती तो जग जाहिर ही है | उस पर भी बीच बीच में शट डाऊन भी चलता रहता है | अब मजे की बात बताऊ जब भी आप कटौती का कारण जानना चाहेंगे तो उनके पास साल भर की कटौती का कारण तैयार रहता है | जनवरी से लेकर मार्च तक उनका कहना है की बिजली की मांग कृषी कार्यो में ज्यादा है इस लिए घरेलू विधुत सप्लाई में कटौती की जा रही है | अप्रेल में पूछने पर क़हा जाता है की गर्मी ज्यादा है इस वजह से कूलर पंखे आदि ज्यादा लोड होने से कटौती है | जून में पूछने पर क़हा जाता है की मानसून में देरी से पानी की कमी आ रही है जो विधुत उत्पादन का महत्वपूर्ण घटक है | जुलाई अगस्त में पूछने पर क़हा जाता है की बरसात की वजह से जगह जगह पोल उखड गए है या कहते है की शोर्ट सर्किट हो जाता है इस लिए बार बार फ्यूज उड़ जाते है | इससे बचने के लिए जैसे ही दो चार बूँद गिरने लगती है पावर कट हो जाता है | अब आप ही बताइये कौनसा मौसम है जब पावर कट नहीं हो सकता हो | इस एक पोस्ट को लिखने में भी पांच बार सिस्टम को चालू किया तब जा के यह पोस्ट पूरे हुयी है |
  4. आपका परिवार /आपका ऑफिस - जो ब्लॉग लिखता है वो ही जानता है की उसका परीवार ब्लॉग लेखन से कितनी शत्रुता रखता है | आपकी धर्म पत्नी तो इस मुए कम्पुटर को अपनी सौत की ही संज्ञा देती है | और बार बार चली आती होगी छोटी छोटी बातो का सलाह मशविरा करने और ओफीस वाले भी आपको तंग करने के लिए बिना जरूरी काम भी लेकर आपके पास आ जाते होंगे | विशेष कर तब जब आप कोइ नयी पोस्ट लिख रहे हो | लेकीन क्या बिना परिवार की मदद के आप ब्लॉग लेखन की कल्पना भी कर सकते है क्या शायद नहीं ना ... | 

छोटी सी उमर
प्रिय दोस्त लक्ष्मी कंहा हो तुम ?
राजस्थान के लोक देवता

Saturday 17 July 2010

गंदे पानी को पीने योग्य बनाने के तरीके - water filtering methods

 पानी एक प्राकृतिक संसाधन है | वर्तमान समय में इसका विदोहन बड़े पैमाने पर हो रहा है | कृषी के साथ साथ पीने के पानी की भी समस्याए खड़ी हो रही है |  पुराने समय में इसका उपयोग कम होने की वजह से जल स्तर ऊपर था लेकिन वर्तमान समय में इसका स्तर बहुत नीचे जा रहा है ओर साथ में अशुद्ध भी हो रहा है |
आइये आज हम जाने की पानी को अपने घर में कैसे शुद्ध किया जा सकता है और नीरोग रहा जा सकता है | पानी को शुद्ध करने की विधिया निम्न है -
  • छनन विधी   -
  • ताप विधी 
  • क्लोरीकरण एवं आयोडीन  विधी  
  • ताम्बे के बर्तन द्वारा 
  • चुने एवं फिटकरी के द्वारा
  • कोयले के द्वारा  
सबसे पहले हम  छनन विधी के बारे में जान ले - यह सबसे सरल और पुरानी विधी है इसमे पानी को दो या तीन स्तर में छान लिया जाता है जिससे अशुद्धिया पानी के साथ नहीं जा पाती है | यह सरल है लेकीन कारगर विधी नहीं है |
ताप विधी - पानी को प्लास्टिक की बोतल में भरकर ढक्कन लगा कर  चार से छः घंटे  धुप में रख देते है इस से ९० % हानी कारक जीवाणु नष्ट  हो जाते है |  या फिर पानी को उबाल लिया जता है जो की खर्चीला और समय लेने वाला काम है |
क्लोरीनीकरण एवं आयोडीन  विधी  - इस विधी में पानी में क्लोरीन और आयोडीन दवा  डाली जाती है | ज्यादातर सरकारी जल संसाधनों में इसी विधी को काम में लिया जाता है | इसका पहला नुकशान यह है की पानी में दवा की दुर्गन्ध आती है दूसरी यह है की अगर इसकी मात्रा ज्यादा हो तो यह शरीर के लिए भी नुकशान करती है | एक लीटर पानी में क्लोरीन की एक बूँद डाली जानी चाहिए |

क्लोरीनीकरण के घरेलू उपाय


(क) ब्लीच घोल (विलयन)
• एक गैलन पानी अथवा चार ली. पानी में चार बूंद ब्लीच विलयन मिला लेते हैं।

• यदि पानी गन्दा हो तो चार ली. पानी में आठ बूंद ब्लीच मिलाते हैं।

• अच्छी तरह मिलाने के बाद 15 मिनट के लिए छोड़ देते हैं। 15 मिनट के बाद हल्का स्वाद तथा 30 मिनट बाद क्लोरीन का स्वाद नहीं होना चाहिए। यदि 30 मिनट बाद भी पानी में क्लोरीन का स्वाद हो तो अगली बार एक बूंद कम ब्लीच डालना चाहिए।

(ख) ब्लीचिंग पाउडर

1.3 से 5 मि. ग्रा. ब्लीचिंग पाउडर (संक्रमण पर निर्भर) 1 ली. पानी को रोगाणु रहित करने के लिए जरूरी होता है। यह रोगाणु रहित करने में 0.5 से 1 घंटा समय लेता है। 26 से 100 मि.ग्रा. अथवा एक चुटकी ब्लीचिंग पाउडर 20 ली. पानी को रोगाणु रहित कर सकता है।

ताम्बे के बर्तन द्वारा - इस विधी में ताम्बे के बर्तन में पानी ७२ घंटे के लिए रखा जाता है | तीन ताम्बे के बर्तन में रखा जाता है क्रम से काम में लिया जाता है और खाली बर्तन को तुरंत भर दिया जाता है | ताम्बे के बर्तन में पानी ७२ घंटे में जीवाणु  मुक्त हो जाता है | यह विधी पानी को जीवाणु मुक्त करने में ९०% कारगर है |

चुने एवं फिटकरी के द्वारा - जब पानी बहुत ज्यादा गंदा हो यानी गद्लाया हुआ हो तो यह विधी काम में लेते है | इसमें बिना बुझा चुना का एक ढेला पानी में डाल देते है | या १० लीटर पानी में एक चुटकी फिटकरी दाल देते है जिससे जीवाणु भी मर जाते है और गन्दगी भी तलछट (पेंदे ) में बैठ जाती है |

कोयले के द्वारा   - इसको तीन स्टेप में बनाया जाता है  यानी की तीन बर्तन लिए जाते है | तीनों के तली में छेद किया  जाता है |   तीनों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है पहले में सूखी साफ़ घास डाल दी जाती है दूसरे में बजरी (वो मिट्टी जिसमें मोटे कण होते है )  और तीसरे में लकड़ी का कोयला डाला जाता है | अब पहले बरतन में अशुद्ध पानी भर देते है तो वो घास द्वारा फ़िल्टर हो कर  दूसरे बर्तन में गिरता है जिसमें की रेती भरी हुयी रहती है | रेती से फ़िल्टर हो कर यह पानी कोयले वाले बरतन में गिरता है कोयले द्वारा अशुद्धियों को अवशोषित कर लिया जाता है | इसके बाद जो साफ़ पानी है वो नीचे रखे बर्तन में संग्रहित किया जाता है | यह जीवाणु युक्त होता है जिसे बाद में हल्की मात्रा में क्लोरीन द्वारा जीवाणु मुक्त किया जा सकता है | 

Wednesday 14 July 2010

अगर आप मोबाईल रिचार्ज का काम करते है तो सावधान हो जाए !

जी हां यह सच है | अभी इन दिनों में इस व्यसाय में ठगे जाने के बहुत से मामले आ रहे है | सभी मोबाईल कंपनिया इस बारे में बार बार अपने रिटेलर को सावधान कर रही है | फिर भी ये ठगी के मामले कम नहीं हो रहे है |
एयर टेल की तरफ से कई बार मेरे लापू सिम ( ईजी रिचार्ज हेतु जो सिम दी जाती है ) पर इस सम्बन्ध में मेसेज मिले थे की आप अनजान नंबर से आयी हुआ काल पर रिचार्ज न करे | यह बात एक दम सीधे तरीके से कही जाती है इस लिए रीटेलर इस बात पर ध्यान नहीं देते है ओर ठगे जाते है |
अब आते है ठगी के तरीके पर आज सुबह सुबह मेरे नंबर पर एक कोल आयी जिसका नंबर +91-8084119727  था | उधर से कोइ श्री मान एयर टेल के कस्टमर केयर से बोल रहे थे | उन्होंने मुझसे पूछा की मुझे कोइ इनाम जीतने का मेसेज मिला है क्या ? मैंने उन्हें बताया की अभी तक तो कोइ मेसेज मुझे नहीं मिला है | तो उन्होंने मुझे दुबारा देखने के लिए क़हा ओर मैंने देखा तो सचमुच मेरे अकाउंट में एक रिचार्ज जमा हुआ बताया गया जिसकी अमाउंट तीन हजार तीन सौ तेतीस रूपये थी | मेसेज में लिखा था ( RECHARGE SUCCESSFUL on 13-07-2010 at 09:44PM.Talktime Rs 3333.00.MRP Rs 3333.00.TransID 71458687.Unlimited STD & Local SMS(500/day)-Rs102)  ओर जब रकम आपके खाते में आयी हुई दिखे तो आपका खुश होना लाजमी है | सो मै भी खुश हुआ की बैठे बैठाए बिना कुछ किये हमारा बैलेंस ३३३३ रूपये मिल रहा है सो आगे पीछे की बात भूल कर उन साहब की बाते आज्ञा कारी बालक की तरह मान ने लग गया | उन साहब ने क़हा की एयर टेल कंपनी की तरफ से यह लकी ड्रा निकाला गया था आपने यह जीता है इस लिए आपको यह रकम दी गयी है लेकिन इस बैलेंस को आपके खाते में जोड़ने के लिए कुछ प्रक्रिया आपको करनी पड़ेगी | मै तैयार था | उन्होंने क़हा आपके लापू अकाउंट ( वह खाता जिसमे से ग्राहकों का मोबाईल रिचार्ज किया जाता है) में बैलेंस कितना है ,मैंने उन्हें क़हा की ७०० रूपये है | उन्होंने क़हा ठीक है आप अपना कोइ दूसरा नंबर दीजिये जैसे ही मैंने दूसरा नंबर दिया तो उन्होंने नए वाले नंबर पर बात करनी शुरू कर दी |

उन्होंने क़हा आप अपने मोबाईल मेनू में एयरटेल सर्विस को खोले | वंहा जो रिचार्ज का ओपसन दिया उसमे यह नंबर ८०८४११९७२७ भर दे | उसके बाद जंहा रिचार्ज अमाउंट भरी जाती है वंहा एक नंबर ००५५० भरे ओर पिन नम्बर भर कर सेंड करे | तो आपके खाते में यह ३३३३ रूपये जुड़ जायेंगे | मैंने उनके कहे अनुसार आधा काम किया लेकिन मेसेज सेंड नहीं किया क्यों की मेरी छठी इन्द्री ने मुझे चेताया की यह तो रकम निकाले वाली बात हुयी देने वाली बात कंहा हुई , लेनी वाली बात हो रही है | मैंने फोन काट दिया ओर फिर कस्टमर केयर में फोन करके सम्बंधित फोन नम्बर के बारे में पूछ ताछ की तो उन्होंने बताया की यह फोन उनकी कंपनी का नहीं है ओर वो ईस मामले में कुछ नहीं कर सकते क्यों की यह नंबर राजस्थान का नहीं है बिहार के किसी जगह का है | जैसे ही मैंने फोन रखा दुबारा उन साहब का फोन आया की आपने मेसेज नहीं किया आप जल्दी करे नहीं तो यह रकम हाथ से जा सकती है |
पता चलने के बाद तो हमने भी उनके काफी मजे लिए है | अब उन बिहारी भैया की क्या हालत होने वाली है आप भी जान गए होंगे | यह सिम बहुत जल्द बंद हो जायगी क्यों की उन्होंने मुझे फोन किया है | लेकिन क्या फर्क पडेगा एक नंबर बंद होगा तो दूसरा नंबर मिल जाएगा| हैरानी की बात तो यह है की रिटेलर के नम्बर बगैर कंपनी कर्मचारीयों की मिली भगत के इन लोगो को कैसे उपलब्ध होते है ?   इंटरनेट पर तो इस प्रकार के लोगो के इलाज के लिए बहुत से उपाय दिए गए है तो क्यों न उन्ही पर आजमा लिए जाए क्या कहते है आप ?


क्या आप भी बनाना चाहते है इन्डली व ब्लोगिरी जैसा ब्लॉग एग्रीगेटर
प्रिय दोस्त लक्ष्मी कंहा हो तुम ?
राजस्थान के लोक देवता

Saturday 10 July 2010

ताजा चित्र प्रकृति के जो एक मिनट पहले लिए है |

आज कुछ लिखने का मन नहीं था केवल पढ़ ही रहा था | आजकल वैसे भी लिखने का मन नहीं करता है | कुछ पारिवारिक समस्याओं के कारण  कुछ व्यस्तता के कारण लिखने का काम नहीं हो पा रहा है  | वैसे भी हम कौन से कवी है या साहित्यकार है अगर होते भी तो कौन सा  तीर मार लेते पड़े रहते किसी अखबार के दफ्तर के किसी कोने में ||


अब आप ये चित्र देखिये यह मैंने अभी एक मिनट पहले लिए है |  मेरी दूकान में बैठे बैठे मुझे जो प्रकृति का  नजारा दिखा वही मै आपको दिखा रहा हूँ |   चित्र  नोकिया २७३० क्लासिक २ मेगा पिक्सल से लिए गए है |चित्र को बड़ा देखने के लिए उस पर क्लीक करे |

चित्र नम्बर १ 
चित्र नंबर २ 
चित्र नंबर ३ 

Friday 2 July 2010

आकाल को आमंत्रित करते है ये टोटके

जकल मानसून का मौसम है | साथ ही शादी विवाह का भी मौसम है | शादी विवाह में यदि बरसात हो जाए तो सारा मजा किर किरा हो जाता है | राजस्थानी में कहावत है की विवाह को दो ही चीजे बिगाड़ती है या तो मूंजी (कंजूस ) या मेह (बरसात )| कंजूस आदमी की कंजूसी का कोइ इलाज नहीं है| लेकिन बरसात को रोकने का उपाय हो सकता है |

             यंहा स्थानीय परम्परा के अनुसार जब भी किसी के यंहा शादी होती है तो उस घर की छत के नाले से एक नारियल को बाँध दिया जाता है | ओर जब शादी संपन्न हो जाती है तब उस नारियल को खोल दिया जता है | लेकिन जब तक नारियल बंधा हुआ रहता है तब तक बरसात नहीं आती है | अगर आ भी जाए तो केवल बूंदा बांदी हो कर रह जाती है | घनघोर बरसात नहीं आती है |

आप अनुमान लगा सकते है की हर पांच दस दिन में किसी न किसी के यंहा तो शादी होती ही रहती है | यानी जब भी किसी के यंहा शादी, तो समझिये की किसान की बर्बादी | यह टोटका काफी समय पहले केवल गिने चुने लोगो को ही पता था लेकिन आजकल ग्लोबलाईजेशन के दोर में इस का पता सभी को चल गया है परीणाम स्वरूप बरसात बेचारी को बरसने के लिए बहुत कम दिन मिलते है |

हो सकता है कुछ आधुनिक लोग जो अपने आप को ज्यादा वैज्ञानिक समझते है इस को बचकानी हरकत कह सकते है | लेकिन इसमे कुछ तो सच्चाई है | आप माने या ना माने ...|



क्या आप भी बनाना चाहते है इन्डली व ब्लोगिरी जैसा ब्लॉग एग्रीगेटर 
प्रिय दोस्त लक्ष्मी कंहा हो तुम ?
राजस्थान के लोक देवता